ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 17 दिसम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 17 दिसम्बर 2023

17 दिसम्बर 2023 दिन रविवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष का पञ्चमी तिथि है। आज रात्रि 07:05 बजे से पंचक अर्थात पचखा आरम्भ हो जाएगा। आज से सौर पौष मास का आरम्भ हो जाता है। आज श्रीराम विवाहमहोत्सव का पावन त्यौहार है। इसलिए इस पञ्चमी को विवाह पञ्चमी भी कहा जाता है। मिथिलांचल के लोग इसे बड़ी धूमधाम के साथ उत्सव के रूप में मनाते हैं। इतना की नहीं पूरे देश में जगह-जगह इसे उत्सव के रूप भी मनाया जाता है। इसे भविष्योत्तर पुराण में श्रीपञ्चमी व्रत भी कहा गया है। कहीं-कहीं इसे दूसरा नाग पञ्चमी भी कहा जाता है। आज किसी तीर्थ क्षेत्र में स्नान एवं दानदी का बहुत पुण्य होता है। आप सभी सनातनियों को “विवाह पञ्चमी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष वार रविवार पंचमी तिथि 05:33 PM तक उपरांत षष्ठी
🖍️ तिथि स्वामी – पंचमी तिथि के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र धनिष्ठा 02:54 AM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी : मंगल इस नक्षत्र का स्वामी है, वहीं राशि स्वामी शनि है। तथा नक्षत्र के देवता वसु है।
📣 योग : हर्षण योग 12:35 AM तक, उसके बाद वज्र योग
प्रथम करण : बव – 06:46 ए एम तक बालव – 05:33 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 04:22 ए एम, दिसम्बर 18 तक
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:56 ए एम से 05:48 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:22 ए एम से 06:39 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:50 ए एम से 12:34 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:03 पी एम से 02:47 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:43 पी एम से 06:09 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:45 पी एम से 07:03 पी एम
💧 अमृत काल : 05:15 पी एम से 06:44 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:47 पी एम से 12:38 ए एम, दिसम्बर 18
❄️ रवि योग : 02:54 ए एम, दिसम्बर 18 से 06:40 ए एम, दिसम्बर 18
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पीताम्बर भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : पंचक प्रारंभ/श्रीपंचमी (श्रीराम-जानकी विवाहोत्सव)/सौर पौष मास प्रारंभ/ विवाह पञ्चमी, मुग़ल सम्राट जहांगीर की पत्नी नूरजहां स्मृति दिवस, पेंशनर दिवस, भूटान राष्ट्रीय दिवस, अब्दुल रहीम खान-ए-खान जन्म दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ अवतार सिंह भड़ाना जन्म दिवस, पार्श्व गायक इंद्रजीत सुकुमारन जन्म दिवस, क्रांतिकारी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी शहीद दिवस, सेक्स वर्कर्स के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗽 Vastu tips 🗼
किस दिशा में खड़े होकर नहाना चाहिए? आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार जब आप पूर्व दिशा की ओर मुंह करके स्नान करते हैं तो आपके शरीर की गंदगी के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा भी आपका साथ छोड़ देती है। इसका कारण यह है कि पूर्व दिशा सूर्यदेव की दिशा है। जब सूर्य इस दिशा से उगता है तो उसकी तेज और प्रभावी सकारात्मक ऊर्जा आती है। ऐसे में सुबह के समय इस दिशा में सबसे ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा होती है। ऐसे में जब आप इस दिशा की ओर मुंह करके नहाते हैं तो यह सकारात्मक ऊर्जा आपके शरीर की सभी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देती है। जब आपके शरीर में कोई नकारात्मक ऊर्जा नहीं होती, सकारात्मक ऊर्जा की अधिकता होती है तो आपकी किस्मत अपने आप चमकने लगती है।
▶️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जिंदगी में किन चार लोगों के पेर नहीं छूना चाहिय?
लड़की को अपने माता पिता के या मायके में किसी के भी पैर नहीं छूने चाहिए ,,दामाद को अपने सास ससुर के या ससुराल में किसी के भी पैर नहीं छूने चाहिए ,,,क्योंकि सनातन धर्म के अनुसार बेटी और दामाद को लक्ष्मी और नारायण का स्वरूप माना जाता है,,,इसके बाद भांजे भांजी से किसी को पैर नहीं छुलवाने चाहिए ,,क्योंकि भांजा नारायण स्वरूप दामाद का बेटा होता है,,और कभी किसी गिरे हुए व्यक्ति के पैर नहीं छूने चाहिए
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
शीघ्रपतन को जड़ से खत्म करने की कौन सी दवाई सबसे अच्छी होती है, जिसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हो?
शीघ्रपतन को जड़ से खत्म करने के लिए आप यह सबसे अच्छी दवाई बना सकते है, जिसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता
आयुर्वेदिक सामग्री :-
बबूल के पेड़ की फळी : 80 ग्राम कौंचबीज का पाउडर : 80 ग्राम सिट्टा मिश्री : 100 ग्राम
बनाने की विधि :-
सबसे पहले बबूल की फली और कौंचबीज को धुप में सूखा लें ताकि इसमें नमी न रहे.
अब इन तीनो सामग्रियों को किसी मिक्सर में अलग अलग पीस लें.
अब इन तीनों पाउडर को अच्छे से मिक्स कर हवारहित कांच की बोतल या डिब्बे में भर कर रख लें और शीघ्रपतन को जड़ से खत्म करने के लिए सबसे अच्छी दवाई तैयार हो गयी है
सेवन की विधि :-
सूबह के समय नाश्ता करने के एक घंटे बाद आधा चम्मच लगभग 02 ग्राम पाउडर गुनगुने दूध के साथ लेना है और रात्रि में भी भोजन करने के एक घंटे बाद गुनगुने दूध के साथ आधा चम्मच पाउडर लेना है.
सेवन अवधि :- 60 दिन
लागत :- इस दवा को तैयार करने में 450 रूपए का खर्च आता है.
यह दवा कौन ले सकता है :- यह दवा 18 वर्ष के नौजवान से लेकर 75 वर्ष तक का बुजुर्ग ले सकता है जो डायबिटीज का मरीज न हो.अगर आप डायबिटीज के मरीज है तो सिट्टा मिश्री ना डालें और पाउडर की एक बार में एक ग्राम मात्रा ही लें.
दवाई के बारे में ख़ास बात :-
इस दवाई का स्वाद थोड़ा कड़वा है लेकिन इस दवाई का असर बेमिसाल है.
यह दवाई 100% आयुर्वेदिक है तो इस दवाई का कोई भी साइड इफ़ेक्ट होने की कोई भी गुंजाइश नहीं है
इस दवाई का 08–10 दिनों में असर आना शुरू हो जाता है.
इस दवाई को गुनगुने दूध के साथ ही लें पानी से मत ले.
एक बार में दो महीने से ज्यादा की दवाई तैयार न करें क्योंकि ज्यादा दिन रखने से दवाई में महक आने लगती है.
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
क्या कुंडलिनी जागृत होने के बाद हम बंद आंखों से बाहर का देख सकते हैं?
हमारी कुंडलिनी जेल के अंदर जागृत हुई सबसे पहले हमारा तीसरा नेत्र 18 दिनों के अंदर खुला उसके बाद हमें वीडियो फिल्म की तरह दृश्य दिखाई देने लगे जो कि लगातार 24 घंटे दिखाई देते थे ।लगभग 18 दिन बाद ही रात्रि से हमारी कुंडलिनी चक्र जागृत होना शुरू हो गए मूलाधार से लेकर आज्ञा चक्र तक हमारे चक्र जागृत हो गए।
जब हमारी यात्रा आज्ञा चक्र में चल रही थी। उस दिन रात्रि का समय था मैं ध्यान की अवस्था में लेटा हुआ था जेल के अंदर ही हमारे पास में कई बंदी जुआ खेल रहे थे जब मैं ध्यान बंद करके बैठा तथा अपनी आंखें बंद की तो हमने देखा कि जो जुआरी जुआ खेल रहे थे वह हमें बंद आंखों से भी दिखाई दे रहे थे लेकिन वह बिल्कुल स्पष्ट नहीं थे मैंने कई बार अपनी आंखें खोली और बंद की कि कहीं यह अचंभा तो नहीं है लेकिन वह अचंभा नहीं था बल्कि मैं बाहर का भी देख सकता था।
जिस प्रकार हमारी आंखों के सामने वस्तु का चित्र जहां पर वस्तु होती है वह हमें सीधे ही दिखती है लेकिन आंखें बंद करने पर तीसरे नेत्र से जो चित्र दिखता है वह आंखों की तरह सीधे सामने नहीं दिखता है बल्कि 60 अंश का कोण बना कर नीचे नाक की सीध में दिखता है इसीलिए देखने में थोड़ी हमें परेशानी हो रही थी क्योंकि चित्र सीधा सामने नहीं दिखता था इसके बाद तो मैंने तीन-चार दिन जब भी मैं बाहर निकलता इसी प्रकार से आंखें बंद करके विभिन्न लोगों को देखता। हमारी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था लेकिन यह हमारी खुशी अधिक दिनों तक नहीं रही क्योंकि ऐसी दृष्टि मिलने के चार-पांच दिन बाद ही हमारी जमानत मंजूर हो गई और मैं जेल से बाहर निकल आया जेल से बाहर पैर रखते ही हमारी सारी सिद्धियां तथा बाहर देखने की दृष्टि भी चली गई।
अब मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि यह हमारी सिद्धियां ब अन्दृष्टि क्यों गई? क्या यह जेल ही कोई सिद्ध जगह थी ? यह जेल फतेहगढ़ की जिला जेल है। इस जिले में गंगा भी हैं तथा कपिल मुनि का नाम भी इस जिले से जुड़ा हुआ है क्या यह जेल कपिल मुनि का ही आश्रम थी अथवा यहां पर कोई अन्य आश्रम था। जब मैंने यहां पर अपनी साधना शुरू की थी तो साधना के 4 या 5 दिन बाद एक स्वप्न में मुझे एक देवी दिखाई दी थी मैंने उस देवी से कहा कि तुम हमारे शरीर में प्रवेश कर जाओ वह देवी हमें एक साधु की कुटिया में ले गई वहां पर हमें चार पांच साधु दिखाई दे रही थे तथा उन साधुओं में एक लड़की भी थी। देवी ने हमसे कहा कि यह लड़की अब तुम्हारे ही साथ रहेगी, उस लड़की ने हमें दो भगवा वस्त्र भेंट किए एक वस्त्र को मैंने अपने ऊपर ओढ़ लिया तथा दूसरे वस्त्र को मैंने अपनी कमर में लपेट लिया हमारी वेशभूषा बिल्कुल बाबाओं जैसी हो गई थी इसके बाद सपना समाप्त हो गया था लेकिन यही लड़की हमें फिर से चौथे पांचवें तथा छठे चक्र में दिखाई दी तथा इन तीनों चक्रों में उस लड़की के साथ हमारे क्रम से चौथे चक्र में साढ़े तीन विवाह के फेरे पांचवे चक्र मैं पांच विवाह के फेरे तथा छठे आज्ञा चक्र में 6 विवाह के फेरे संपन्न हुए लेकिन उस लड़की के साथ हमारा सातवा विवाह का फेरा नहीं हो सका क्योंकि सहस्त्रार चक्र में जाने पर समय के शून्य अनुभव से हमारी घबराहट के कारण हमारी कुंडलिनी ही बंद हो गई इसलिए हमारा कुंडलिनी का जागृत होना पूर्ण नहीं हो सका।
एक शोध का विषय है। क्योंकि इसी जेल में हमारी कुंडलिनी जागृत हुई तथा जब तक मैं जेल में रहा हमारी कुंडलिनी लगातार चलती रही लेकिन हमारे बाहर निकलते ही तुरंत ही कुंडलिनी कैसे बंद हो गई? तथा एक एक करके हमारी सारी सिद्धियां भी चली गई।
▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬
⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

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