Aaj ka Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •• ✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 20 अक्टूबर 2023
20 अक्टूबर 2023 दिन शुक्रवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। आज माता जगतजननी जगदंबा के छठे रूप माता श्री कात्यायनी देवी की पुजा-अर्चना एवं आराधना का सुअवसर होता है। आज माताजी का आवाहन-आमंत्रण और अधिवासन पूर्वक पूजन करना चाहिए। आज मूल नक्षत्र भी है तो माता सरस्वती देवी का भी आवाहन-पूजन करना चाहिए। साथ ही आज माता कात्यायनी को बिल्व पत्र से विधिवत अर्चना करनी चाहिए। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “माता श्री कात्यायनी देवी की पुजा-अर्चना एवं आराधना” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – आश्विन मास शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 11:25 PM तक उपरांत सप्तमी
✏️ तिथि स्वामी – षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र स्कन्द कुमार है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मूल 08:41 PM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है तो वहीं राशि स्वामी गुरु है।
🔊 योग – अतिगण्ड योग 03:02 AM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 12:01 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 11:24 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:19:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:41:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:44 ए एम से 05:34 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:09 ए एम से 06:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:28 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:59 पी एम से 02:45 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:47 पी एम से 06:12 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:47 पी एम से 07:03 पी एम
💧 अमृत काल : 02:23 पी एम से 03:58 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 21
❄️ रवि योग : 06:25 ए एम से 08:41 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-देवी मंदिर में श्रंगार सामग्री भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/महानिशा पूजा/ तपष्षठी (उड़ीसा)/ सरस्वती आहवान रात्रि 08.40, भूतपूर्व राज्यपाल निरंजन नाथ वांचू स्मृति दिवस, क्रांतिकारी एच. सी. दासप्पा पुण्य तिथि, भारत में उच्च न्यायालय की प्रथम महिला न्यायाधीश लीला सेठ जन्म दिवस, भारतीय सिनेमा के सर्वाधिक पार्श्वगायक कुमार सानू जन्म दिवस, क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग जन्म दिवस, नवजोत सिंह सिद्धू जन्म दिवस, ऐक्टर किरण कुमार जन्म दिवस, विश्व सांख्यिकी दिवस, इंटरनेशनल शेफ्स डे, विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस, मूल समाप्त
✍🏼 विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🗺️ _Vastu Tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे घर में शौचालय की दिशा के बारे में। होगा। सबसे पहले शुरुआत करते हैं पूर्व दिशा से। पूर्व दिशा में शौचालय बनवाने से आपकी जीवन की गति गडबड़ा सकती है। आपके ऊपर मुसीबतों के बादल घराने लगेंगे।आपके बड़े बच्चे की तरक्की में बाधा होगी। उन्नति का मार्ग अवरूद्ध हो सकता है। जीवन में एक ठहराव की स्थिति हो सकती है और जैसे रूका हुआ पानी सड़ जाता है, वैसे ही जीवन में ऊब महसूस होने लगती है।
वास्तु के अनुसार हमारे पैरों पर इस दिशा के शौचालय का बुरा असर पड़ सकता है और हर दिन सुबह 5 से 7 बजे के बीच हमें आवांछित स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। अगर किसी वजह से आपके घर की पूर्व दिशा में शौचालय है तो शौचालय की छत में बांस का प्रयोग करके दुष्टप्रभावों को कम करने की कोशिश की जा सकती है।
आचार्य श्री गोपी राम के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व दिशा में शौचालय का निर्माण शुभ नहीं है। इस दिशा में शौचालय होने से धन की हानि संभव है। व्यापार और विकास में बाधा होगी। हरा रंग आपको हर तरह से नुकसान देने लगेगा। हर साल गर्मी शुरू होते ही आपके व्यापार और करियर में गिरावट आएगी। अगर आपकी बेटी बड़ी है तो उसको बहुत तरह की समस्याएं हो सकती हैं। सुबह 7 से 9 बजे का समय आपके लिए रोज ही उलझनों का संदेश लेकर आएगा। आपकी पेल्विक गर्डिल का अलाइनमेंट बिगड़ सकता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
एंटी बैक्टीरियल स्क्रब के फायदे-एक्ने कम करता है एक्ने को कम करने में एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर ये स्क्रब फायदेमंद है। ये दानों को कम करता है और दाग-धब्बों में कमी लाता है। इसके अलावा ये आपकी स्किन को अंदर से साफ करता है और ये बेदाग साफ स्किन पाने में मदद करता है। इसके अलावा ये स्किन पोर्स को खोल देता है ताकि हवा का सर्कुलेशन बना रहे और एक्ने न हो।
डेड सेल्स का सफाया करने में ये स्क्रब काफी मददगार है। ये स्किन को साफ करता है और फिर पिग्मेंटेशन में कमी लाता है। इतना ही नहीं ये सनबर्न को भी कम करने में मददगार है। तो, इस स्क्रब को घर में बनाएं और इन तमाम कारणों से आप इस स्क्रब का इस्तेमाल कर सकते हैं।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
सीने में दर्द के हो सकते हैं ये कारण सीने में दर्द होता है तो हार्ट अटैक का डर सताने लगता है। हार्ट अटैक के वक्त ब्लड वेसेल्स फट जाती हैं जिससे चेस्ट में पेन होने लगता है।
कई बार फेफड़ों संबंधी परेशानी होने पर भी छाती में दर्द होने लगता है। निमोनिया या फिर फेफडों के आप-पास सूजन आने पर भी दर्द होता है
मांसपेशी या हड्डियों की वजह से भी छाती में दर्द होने लगता है। कई बार हड्डी टूटने या ज्यादा एक्सरसाइज करने, पसलियों के तनाव में आने पर भी दर्द होने लगता है।
पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या होने पर भी कई बार सीने में दर्द की समस्या होने लगती है और गैस ब्लॉक हो जाती है।
मानसिक तनाव या फिर पैनिक अटैक आने पर भी सांस लेने में परेशानी और घबराहट होती है और कई बार छाती में दर्द हो सकता है।
पथरी होने, छाती में जलन होने या पेट में अल्सर की समस्या होने पर भी कुछ लोगों को सीने में दर्द की शिकायत होने लग जाती है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
आज नवरात्रा की षष्ठी तिथि है। इसलिए आज के दिन आदिशक्ति माता श्री जगतजननी जगदम्बिका माता श्री दुर्गा देवी के छठे रूप माता श्री कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वही आदिशक्ति जगतजननी माता कात्यायनी कहलाती हैं।
नवरात्रि में उपवास एवं साधना करनेवाले भक्तों के लिए आज के दिन हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा ऐसा अनुभव किया गया है, कि उनका मन आज आज्ञाचक्र में स्थित होता है। आज माता कात्यायनी की उपासना से साधकों के आज्ञा चक्र जाग्रत होकर सिद्धियों को स्वयंमेव ही प्राप्त हो जाता है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है। तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वदा के लिए विनष्ट हो जाते हैं।
इनका स्वरूप अत्यन्त ही दिव्य और स्वर्ण के समान देदीप्यमान है। इनकी चार भुजायें हैं, इनका दाहिना ऊपर का हाथ अभय मुद्रा में है। तथा नीचे का हाथ वरदमुद्रा में रहता है। बांये ऊपर वाले हाथ में तलवार और निचले हाथ में कमल का फूल लिए रहती हैं। और इनका वाहन सिंह है। आज के दिन साधक का मन आज्ञाचक्र में स्थित होता है। योगसाधना में आज्ञाचक्र का महत्त्वपूर्ण स्थान है।
इस चक्र में स्थित साधक कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है। पूर्ण आत्मदान करने से साधक को सहजरूप से माँ के दर्शन हो जाते हैं। माँ कात्यायनी की भक्ति से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। माता की आराधना से भक्त का हर काम सरल एवं सुगम हो जाता है। जिनकी भुजाओं में चन्द्रहास नामक तलवार शोभायमान हो रहा है। श्रेष्ठ सिंह जिसका वाहन है, ऐसी असुर संहारकारिणी देवी कात्यायनी हमारा कल्याण करें।
माता दुर्गा के छठा रूप महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनके यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं। महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा के इस रूप को कात्यायनी कहा गया है। देवी कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। इनकी पूजा अर्चना द्वारा भक्तों के सभी संकटों का नाश हो जाता है।
माता कात्यायनी के पूजन से भक्तों के भीतर एक अद्भुत शक्ति का संचार होता है। इस दिन साधकों के साधारण पूजन से ही माता कात्यायनी सहज रूप से ही अपने भक्तों को दर्शन दे देती हैं। जो साधक कुण्डलिनी जागृत करने की इच्छा से देवी की अराधना में समर्पित होते हैं। उन्हें दुर्गा पूजा के छठे दिन माँ कात्यायनी जी की सभी प्रकार से विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए। फिर मन को आज्ञा चक्र में स्थापित करने हेतु माता से प्रार्थना करनी चाहिए।
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⚜️ आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो भगवान कार्तिकेय का पूजनकरें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में सफलता प्राप्ति केलिये षष्ठी तिथि के सायंकाल में शिवमन्दिर में छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा परबाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं एवं सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमनेका कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायेंमनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होताहै और छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।

