ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 27 अगस्त 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 27 अगस्त 2023

27 अगस्त 2023 दिन रविवार को शुद्ध श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। आज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि श्रावण पुत्रदा नाम का एकादशी व्रत है। शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर एक व्यक्ति को अवश्य करना चाहिये।। आप सभी सनातनियों को श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – अधिक श्रावण मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – श्रावण मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 09:32 PM तक उपरांत द्वादशी
✏️ तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मूल 07:16 AM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा 05:15 AM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है तो वहीं राशि स्वामी गुरु है।
प्रथम करण : वणिज – 10:55 ए एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 09:32 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : रविवार का शुभ (गलिक काल) 03:37 पी एम से 05:16 पी एम
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय- सुबह 5:56 AM
🌅 सूर्यास्त- शाम 6:49 PM
🎆 ब्रह्म मुहूर्त : 04:27 ए एम से 05:12 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:50 ए एम से 05:56 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:48 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:31 पी एम से 03:23 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:49 पी एम से 07:11 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:49 पी एम से 07:55 पी एम
💧 अमृत काल : 12:51 ए एम, अगस्त 28 से 02:19 ए एम, अगस्त 28
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 ए एम, अगस्त 28 से 12:45 ए एम, अगस्त 28
🌸 त्रिपुष्कर योग : 05:15 ए एम, अगस्त 28 से 05:57 ए एम, अगस्त 28
💦 सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:56 ए एम से 07:16 ए एम
❄️ रवि योग : 05:56 ए एम से 07:16 ए एम
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:56 ए एम से 07:16 ए एम 05:15 ए एम, अगस्त 28 से 05:57 ए एम, अगस्त 28
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को लाल वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – पुत्रदा एकादशी व्रत/ पवित्रा(पुत्रदा) एकादशी व्रत(सर्वे) /सर्वार्थसिद्धि योग/त्रिपुष्कर योग/ झुलन यात्रा/ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में आदि ग्रंथ साहिब स्थापना दिवस, भारतीय पार्श्वगायक मुकेश कुमार स्मृति दिवस, प्रसिद्ध निर्माता व निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी स्मृति दिवस, लोकसभा के सदस्य आनन्द सिंह पुण्यतिथि, सर डॉन जॉर्ज ब्रैडमैन जन्म दिवस, दोराबजी टाटा जन्मोत्सव, राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा
✍🏼 विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।
🏝️ Vastu Tips 🗽
वास्तु में शास्त्र में हर एक चीज को रखने के लिए एक सही दिशा निर्धारित होती है, जिससे उस चीज के और उस दिशा के शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। उसी प्रकार धातु की चीजों को रखने के लिये भी एक सही दिशा निर्धारित है। आपको बता दें कि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में धातु की चीजें रखने के लिए सबसे सही दिशा पश्चिम और वायव्य कोण, यानि उत्तर-पश्चिम दिशा है। इन दोनों ही दिशाओं में धातु की कोई चीज रखना शुभ फलदायी होता है।
वास्तु के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम दिशा में धातु की चीजें रखने से पिता को लाभ मिलता है। उनका दिमाग स्वस्थ रहता है। आपको मानसिक रूप से किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती। साथ ही आपकी बौद्धिक क्षमता में बढ़ोतरी होती है।
वहीं पश्चिम दिशा में धातु की चीज़ें रखने से सबसे अधिक फायदा घर की छोटी बेटी को होता है। इससे उनका हर्ष तत्व मजबूत होता है और उनकी खुशी बनी रहती है। साथ ही मुंह से जुड़ी परेशानियां नहीं होती और चेहरे का निखार बना रहता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सौंफ चबाएं कच्चा प्याज खाने के बाद सौंफ का सेवन इस दुर्गंध को दूर करने में मदद कर सकता है। दरअसल, सौंफ खुद में कुछ एरोमेटिक गुणों से भरपूर है और इसे चबाना मुंह के लार में बैक्टीरियल गतिविधियों में बदलाव लाता है जिससे प्याज की बदबू चली जाती है और आपके सांस से सौंफ की अच्छी खुशबू आती है।
इलायची चबा लें इलायची एक ऐसी चीज है जो कि आपके ओरल हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद है। खाना खाने के बाद इलायची खाना न सिर्फ आपके पाचक एंजाइम्स को बढ़ावा देने में मददगार है बल्कि ये आपके मुंह से आती दुर्गंध को भी दूर कर सकता है। ये आपके मुंह को साफ करके बैक्टीरियल गतिविधियों को शांत कर सकता है। साथ ही ये आपके सांस से प्याज के दुर्गंध को दूर करता है जिससे आपके मुंह से प्याज की बदबू नहीं आती।
🫒 आरोग्य संजीवनी 🍈
ओरल हेल्थ के लिए जावित्री मुंह के स्वास्थ का ध्यान न रखा जाए तो कई और गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ओरल हेल्थ को सुधारने के लिए भी जावित्री का उपयोग किया जाता है। एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर जावित्री में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं, जो मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं।
किडनी के लिए जावत्री किडनी की सेहत के लिए भी जावित्री फायदेमंद साबित होती है। जावित्री में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो किडनी के लिए लाभदायक होते हैं। जावित्री का इस्तेमाल कई तरीकों से खाने में किया जा सकता है।
जोड़ों में दर्द के लिए जावित्री शरीर में कैल्शियम की कमी से अक्सर लोगों को गठिया, जोड़ो में दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर जावित्री के सेवन से गठिया के दर्द व सूजन में कमी आती है। कई रिसर्च में सामने आया है कि जावित्री के सेवन से सूजन और दर्द को कम किया जा सकता है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
पुराणों के अनुसार ब्रह्मा ने सरस्वती को अपने वीर्य से बनाया था, फिर उसी पुत्री को अर्धांगिनी बनाने का विचार ब्रम्हा जी के मन में क्यों आया?
ब्रह्माजी का अपनी पुत्री से विवाह का असली सच क्या है यह आज भी शोध का विषय है। इस पर विचार किए जाने की जरूरत है। भारतीय पौराणिक इतिहास में ब्रह्मा का नाम महत्वपूर्ण रूप से प्रकट होता है, जबकि प्रचलित समाज में विष्णु और शिव को उनसे श्रेष्ठ माना गया है। कालांतर में ब्रह्मा को हाशिए पर धकेल दिए जाने के कई कारणों में से एक है सावित्री का शाप और दूसरा कारण यह कि ब्रह्मांड की थाह लेने के लिए जब भगवान सदाशिव ने विष्णु और ब्रह्मा को भेजा तो ब्रह्मा ने वापस लौटकर सदाशिव से असत्य वचन कहा था।
हालांकि प्रचलित समाज में यह धारणा फैली है कि ब्रह्मा ने उनकी पुत्री सरस्वती के साथ विवाह किया था इसलिए उन्हें नहीं पूजा जाता। अब यह कितना सच यह यह तो शोध का विषय है। कुछ विद्वान इसे भ्रांत धारण मानकर खारिज करते हैं। हालांकि सचाई यह भी है कि पुराणों में एक जगह उल्लेख मिलता है कि ब्रह्मा की पत्नी विद्या की देवी सरस्वती उनकी पुत्री नहीं थीं। उनकी एक पुत्री का नाम भी सरस्वती था जिसके चलते यह भ्रम उत्पन्न हुआ।
पौराणिक मान्यता अनुसार ब्रह्मा की पुत्री सरस्वती का विवाह भगवान विष्णु से हुआ था, जबकि ब्रह्मा की पत्नी सरस्वती अपरा विद्या की देवी थीं जिनकी माता का नाम महालक्ष्मी था और जिनके भाई का नाम विष्णु था। विष्णु ने जिस ‘लक्ष्मी’ नाम की देवी से विवाह किया था, वे भृगु ऋषि की पुत्री थीं।
माना जाता है कि ब्रह्माजी की 5 पत्नियां थीं- सावित्री, गायत्री, श्रद्धा, मेधा और सरस्वती। इसमें सावित्री और सरस्वती का उल्लेख अधिकतर जगहों पर मिलता है। यह भी मान्यता है कि पुष्कर में यज्ञ के दौरान सावित्री के अनुपस्थित होने की स्थित में ब्रह्मा ने वेदों की ज्ञाता विद्वान स्त्री गायत्री से विवाह कर यज्ञ संपन्न किया था। इससे सावित्री ने रुष्ट होकर ब्रह्मा को जगत में नहीं पूजे जाने का शाप दे दिया था। गुर्जर इतिहाकार के जानकार मानते हैं कि गायत्री माता एक गुर्जर महिला थी।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।

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