सचिव के बिना निकाली गई लाखों की राशि! जीआरएस पर परिजनों और दुकानदारों को मजदूर बनाकर भुगतान कराने का आरोप

ब्यूरो चीफ: भगवत सिंह लोधी
पटेरा /दमोह । जनपद पंचायत पटेरा एक बार फिर कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला ग्राम पंचायत राजबंदी का सामने आया है, जहां ग्राम रोजगार सहायक (जीआरएस) पर सचिव के कार्यमुक्त होने के बाद भी लाखों रुपये का भुगतान कराने और फर्जी मजदूरों के नाम पर राशि निकालने के गंभीर आरोप लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 09 जुलाई 2026 को पंचायत सचिव के कार्यमुक्त होने के आदेश जारी हो गए थे। इसके बावजूद आरोप है कि 17 जुलाई 2026 तक सहायक सचिव धर्मराज द्वारा लगभग 10 लाख रुपये से अधिक की राशि विभिन्न खातों में जारी कर दी गई। आरोप है कि भुगतान वास्तविक मजदूरों के बजाय अपने परिजनों तथा पटेरा के कुछ दुकानदारों के खातों में किया गया। इतना ही नहीं, एक नाबालिग के खाते में भी मजदूरी की राशि स्थानांतरित किए जाने की बात सामने आई है, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायत राजबंदी में विकास कार्यों के नाम पर लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें होती रही हैं। आरोप है कि मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना, खेत तालाब, वाटरशेड और अन्य विकास कार्यों में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला शासकीय धन के दुरुपयोग, फर्जी मस्टर रोल और नियमों के उल्लंघन का गंभीर उदाहरण माना जाएगा। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा शासकीय राशि की वसूली की मांग की है।



