विकास की चमक या विनाश का धुआं ? एनटीपीसी के प्रदूषण और ‘ट्रालों’ के तांडव से जनजीवन त्रस्त

रिपोर्टर : कमलेश अवधिया
साईखेड़ा । गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी (NTPC) संयंत्र आज स्थानीय लोगों के लिए वरदान के बजाय अभिशाप बनता जा रहा है। संयंत्र से निकलने वाली राख और सड़कों पर दौड़ते अनियंत्रित ट्रालों ने पूरे क्षेत्र में ‘तांडव’ मचा रखा है। आलम यह है कि गाडरवारा शहर से लेकर तहसील क्षेत्र साईखेड़ा चीचली साहित दूर-दराज के गांवों तक लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है।
राख के गुबार ने छीनी स्वच्छ हवा
क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी से निकलने वाली ‘फ्लाई ऐश’ (राख) हवा में घुलकर जहर बन रही है। हवा के साथ उड़कर यह राख लोगों के घरों, किचन और यहां तक कि फेफड़ों तक पहुंच रही है। बच्चों और बुजुर्गों में सांस की बीमारियां, अस्थमा और आंखों में जलन की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। प्रदूषण की काली चादर ने पूरी विधानसभा क्षेत्र के पर्यावरण को अपनी चपेट में ले लिया है।
*सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे भारी वाहन*
एनटीपीसी से जुड़े भारी ट्रालों और डंपरों ने सड़कों पर दहशत का माहौल बना दिया है। वही साईखेड़ा से निकले स्टेट हाईवे 44 पर बे लगाम दौड़ रहे इन बड़े-बड़े ट्रालों से लोगों को भारी परेशानियां हो रही है छोटी-मोटी घटनाएं आए दिन होती रहती हैं रोड पर जाम लग जाता है इनसे उड़ने वाली धूल लोगों के घरों दुकानों में जम जाती है जिससे अन्य बीमारियां भी हो रही हैं स्थानीय निवासियों का कहना है कि
*तेज रफ्तार और लापरवाही*: ये वाहन बिना किसी ढके या सुरक्षा मानकों के राख और सामग्री लेकर तेज रफ्तार से दौड़ते हैं।
*बदहाल सड़कें*: इन भारी वाहनों के भार से सड़कें जर्जर हो चुकी हैं, जिससे आम वाहन चालकों के लिए निकलना दूभर हो गया है।
दुर्घटनाओं का केंद्र: आए दिन होने वाली छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। प्रशासन की ओर से इन ट्रालों की गति सीमा या समय निर्धारण पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं दिख रही है।
किसानों की बदहाली और प्रशासनिक चुप्पी
प्रदूषण का सीधा असर फसलों पर भी पड़ रहा है। खेतों में राख की परत जमने से पैदावार घट रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन को बार-बार अवगत कराने के बावजूद, समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सीएसआर (CSR) के नाम पर औपचारिकताएं तो पूरी की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता केवल धूल और धुआं फांकने को मजबूर है।
आक्रोश की सुगबुगाहट
यदि समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं पाया गया और ट्रालों की आवाजाही को व्यवस्थित नहीं किया गया, तो क्षेत्र में बड़ा जन-आंदोलन खड़ा हो सकता है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा और सुरक्षित सड़कों की मांग कर रही है।



