Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 17 अगस्त 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 17 अगस्त 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 07:24 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रोहिणी 03:17 AM तक उपरांत म्रृगशीर्षा
🪐 नक्षत्र स्वामी – रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इसके अलावा, ब्रह्मा को इसका नक्षत्र देवता माना जाता है।
⚜️ योग – व्याघात योग 01:40 AM तक, उसके बाद हर्षण योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 08:28 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 07:24 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:30:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:28:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:24 ए एम से 05:08 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:46 ए एम से 05:51 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:36 पी एम से 03:29 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:58 पी एम से 07:20 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:58 पी एम से 08:04 पी एम
💧 *अमृत काल : 12:16 ए एम, अगस्त 18 से 01:47 ए एम, अगस्त 18 🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, अगस्त 18 से 12:47 ए एम, अगस्त 18 🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें। 👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:। 💁🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर में सवाकिलो गुड़ चढ़ाएं। 🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मानस पूजा समाप्ति् (बंगाल)/ गोगा नवमी/ महान् स्वतंत्रता सेनानी पुलिन बिहारी दास जन्म दिवस, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान् क्रान्तिकारी मदन लाल ढींगरा जयन्ती, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर वॉय. वी. रेड्डी जन्म दिवस, प्रमुख उपन्यासकार अमृतलाल नागर जन्म दिवस, राष्ट्रीय गैर-लाभकारी दिवस, साहित्यक विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल जन्म दिवस, इंडोनेशियाई स्वतंत्रता दिवस ✍🏼 तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
वाशरूम के लिए गलत दिशा घर की उत्तर पूर्व दिशा को भगवान की दिशा माना गया है, ऐसे में इस दिशा में कभी भी बाथरूम नहीं बनवाना चाहिए। इस दिशा में बाथरूम के होने से घर में निगेटिव एनर्जी बनी रहती है। ऐसा कहा जाता है कि घर में बाथरूम गलत दिशा में हो तो पिता के साथ रिश्ते खराब रहते हैं।
साथ ही घर में भूलकर भी दक्षिण, दक्षिण पूर्व या दक्षिण पश्चिम दिशा में बाथरूम नहीं बनना चाहिए। इससे घर के सदस्यो की हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
वहीं, बाथरूम में भूलकर भी लाल और काले रंग की बाल्टी का इस्तेमाल न करें
इसके अलावा किचन के बगल वाशरूम नहीं बनवाना चाहिए।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
परमात्मा हमारी सारी शुभ इच्छा पूर्ति का सुबह सुबह वरदान देते हैं | सुबह उठकर के, हाथ मुंह धोकर के कम से कम आधा घंटा प्रभु का ध्यान जरूर करना चाहिए| कोई समस्या है तो परमात्मा को बतानी चाहिए | परमात्मा का स्वरूप इस समय भोले भण्डारी का होता है | उसे सच्चे दिल से याद करने से वे हमारी सारी मनोकामनाएँ सिद्ध करते हैं | पढ़ाई के लिए भी यह अनुकूल समय है | इस समय जो पढ़ते हैं वह याद रहता है, जल्दी समझ में आता है| सुबह उठने से दिन भर ताजा रहते हैं |
सुबह के समय वातावरण में ऑक्सीजन की मात्र ज्यादा होती है, वातावरण भी शुद्ध व साफ़ होता है, अतः सुबह उठने से शरीर को ऑक्सीजन ज्यादा मिलती है, स्वस्थ्य अच्छा रहता है व् आयु बढती है |
सुबह देरी से उठने से हम आलसियों की श्रेणी में आ जाते हैं | स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है | नशा करने वाले, भोग विलास में रहने वाले देरी से उठते है | योगी व् ज्ञानी जल्दी उठते हैं|
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
भाई, ये मत समझना कि ठंडा पानी पीकर तुम अपने शरीर को ठंडक दे रहे हो…
तुम दरअसल अपनी अग्नि बुझा रहे हो — यानी पाचनशक्ति को मार रहे हो!
🧊 फ्रिज का पानी = पाचनशक्ति की हत्या* राजीव दीक्षित जी साफ कहते हैं: “फ्रिज का ठंडा पानी शरीर के लिए ज़हर है। ये शरीर की पाचन अग्नि को बुझा देता है।” आयुर्वेद में हमारा शरीर एक अग्निकुंड की तरह है। जैसे हवन में ठंडा पानी डालो तो अग्नि बुझ जाती है, वैसे ही शरीर में ठंडा पानी डालते हो — तो तुम्हारी पाचन अग्नि मरने लगती है। 🚫 ठंडे पानी से ये नुकसान होते हैं:
खाना नहीं पचता — गैस, अपच, भारीपन।
कब्ज़ की शुरुआत।
बार-बार पेट फूलना।
थायरॉइड, मोटापा, कम ज़ोरी की जड़।
✅ क्या करना चाहिए?
मिट्टी या तांबे के घड़े का पानी पियो – बिल्कुल प्राकृतिक कूलिंग।
गर्मियों में सौंफ, धनिया या मुनक्का डालकर पानी रखो – शरीर को ठंडक भी मिलेगी और अग्नि भी बचेगी।
भोजन के तुरंत बाद पानी बिल्कुल मत पियो – कम से कम 30 मिनट का गैप दो।
खाना खाने के बीच में 2-3 घूंट गुनगुना पानी लेना उत्तम है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
★तथ्य तो यह है कि जन्म पत्रिका से पूर्व जन्म की जानकारी बता सकने की बात अभी यह सैद्धांतिक अधिक है।
मैं वर्षों से प्रयास रत हूं कि किसी पुनर्जन्म वाले की दोनों जन्मों की ,अर्थात पिछले जन्म में जहाँ जिस नाम पते पर जन्म लिया था वहाँ के जन्म दिनांक और संमय का ब्यौरा मिले- और उसी व्यक्ति का इस जन्म का भी ऐसा हीब्यौरा मिले तो प्रामाणिक कुंडली बनाकर पुनर्जन्म के ज्योतिषीय सिद्धान्त का परीक्षण होसके।
◆जहां तक ज्योतिष की क्लासिकल पुस्तकों में पिछले और अगले जन्म के ग्रह योगों की बात है तो ये सब अनिश्चित और व्यापक प्रकृति के केवल प्रतीक में या संकेत रूप में हैं। ज्योतिष के ये योग निश्चयात्मक नहीं हैं।
★उदाहरण के लिए देखिए मंत्रेश्वर की बहु प्रतिष्ठित पुस्तक फलदीपिका, इसकी टीका महा महोपाध्याय गोपेश कुमार ओझा ने की है।इस ग्रन्थ का रचना काल लगभग १३ वीं सदी का है।इसके अध्याय १४ रोग निर्णय के श्लोक २२ से २९ में जातक की मरणोत्तर गति और पिछले जन्म की स्थिति पर जो लिखा है उसका सार इस प्रकार है:
मरणोत्तर गति: जन्मपत्रिका के बारहवें व्यय भाव की राशि उसकी विभिन्न प्रकृति जैसे स्थिर,ऊर्ध्व इत्यादि,उसके स्वामी उसमें स्थित ग्रह के बली ,नवांश, निर्बली पीड़ित शुभ आदि के अनुसार जातक को ऊर्ध्व लोक या अधम लोक मिलता है। १२ वें भाव से मंगल सम्बद्ध हो तो पुनर्जन्म, बुध से बैकुंठ, गुरु से ब्रह्म लोक, शुक्र से स्वर्ग, शनि से यम पुरी, राहु से अन्य द्वीप, केतु से नरक मिलता है।
ऊपर कथित कर्मफल भोगकर पृथ्वी पर पुनर्जन्म कहाँ होगा : इस पर इसी प्रकार से विचार पंचम भाव से करने का निर्देश दिया है।
पूर्व जन्म विचार : नवम भाव से ही जाति, देश, दिशा आदि का विचार राशि नवांश, ग्रह के बलाबल का विचार करके बताना चाहिए।मंगल या शनि संलिप्त हो तो कुत्सित देश, म्लेच्छ देश, सूर्य ,-पर्वत जंगल, चन्द्र शुक्र -नदी तट, बुध -पुण्य स्थल, गुरु -हिमालय और विंध्य क्षेत्रों में पुनर्जन्म होता है।
●ज्योतिषके ये संकेत किस प्रकार से पूर्व जन्म पुनर्जन्म को पहचानने में सहायक हो सकते हैं इस पर बहुत व्यापक संगठित ,श्रम साध्य, धन साध्य ,पीढ़ियों तक चलने वाले समर्पित लगनशील ज्योतिषीय शोध की आवश्यकता पड़ेगी।
◆◆न तो ऐसा अतीत में संभव हुआ और न भविष्य में ही संभव हो सकेगा क्यों कि अभी तो ज्योतिष को इसी जन्म की भावी और अतीत की घटनाओं की घटनाओं की परिशुद्धता बढ़ाना है,अपने गणितीय उपकरण भी सुधारना है।
★पर ज्योतिषी वर्ग को और जिज्ञासुओं को ज्योतिष का प्रयोग परीक्षण आधारित बनानेमें इसका विभिन्न उद्देश्यों के लिए डेटा बैंक बनाने में कोई रुचि नहीं दिखती।
◆यही कारण है कि जब ज्योतिष कोई दावा करता है पर तर्क शोध आधारित तथ्य नहीं रखता तो वैज्ञानिक और तर्क शील व्यक्ति इसेpseudo science अर्थात स्व घोषित विज्ञान या आत्म प्रशंसा करने वाला शास्त्र कहने लगते हैं।
●जो लोग इसके ग्रह गणित के आधार का उदाहरण इसके वैज्ञानिक होने के लिए देते हैं उसेअलग प्राकृतिक विज्ञान या खगोल विज्ञान माना जाता है ।
★जबकि फलित ज्योतिष इससे भिन्न होता है फलित का आधार ग्रह नहीं होता, फलित का आधार समस्त ज्योतिष ग्रन्थों के प्रथम अध्यायों के अनुसार व्यक्ति के पूर्व कृत कर्म होते हैं, ग्रह इन कर्म फलों को ऐसे प्रकाशित करते हैं जैसे अंधेरे में रखी वस्तु को दीपक प्रकाशित करता है। फलित का आधार ग्रह नहीं कर्म होने से इस पहल कथन में इस जन्म के पुरुषार्थ के कारण परिवर्तन होता रहता है इसीलिए भविष्य कभी भी हमेशा सौफीसदी सही नहीं बताया जा सकता।
तब फिर अगले पिछले जन्म के पत्रिका में संकेतित कर्म फल में भी बदलाव तो आता ही है।
कहा गया है कि धर्म अर्थ काम और मोक्ष इन चार में से अर्थ और काम तो पूर्वकृत कर्म के अनुसार या प्रारब्ध से मिलते हैं ।पर धर्म और मोक्ष पुरुषार्थ व्यक्ति इसी जन्म में सिद्ध कर सकता है। इसलिए जन्म।पत्रिका के परलोक स्थिति को निर्णायक नहीं माना जा सकता।
●ज्योतिष को कर्म फल आधारित मान कर इसमें व्यक्ति स्वातंत्र्य को स्थान देकर इसे संभावना मूलक विज्ञान बनाने के प्रति उपेक्षा के कारण ज्योतिष को सामाजिक विज्ञान का दर्जा भी नहीं मिल पारहा है। जबकि पूर्वकृत कर्मफलका संकेतक होने से इसे सामाजिक विज्ञान का दर्जा तो मिल ही सकता है वह भी रिसर्च के अभाव में नहीं मिल सका है।
● बात इतनी सी है कि ज्योतिष मूलतः पूर्व कर्मफल संकेतक विज्ञान है तोइसे पुनर्जन्म से पास्ट लाइफ रिग्रेशन से जुड़ना चाहिए। इसके अध्यात्म ज्योतिष की अलग शाखा का विकास जरूरी है।यह ज्योतिष अब विकसित हो रहा है ।मेरा भी इस परशोध परक लेखन कुछ वर्षों से हो रहा है।
पर ज्योतिषी वर्ग तो व्यक्ति को भाग्य की शतरंज पर ग्रह का मोहरा माननेका भ्रम पाले हुए हैं और यही भ्रांति बनाए रखने में फायदा देखते हैं।
●past life regression के दावे करने वाले कई कथित विशेषज्ञों से भी मैं मिला जो मुझे बेवक़ूफ़ बनाते रहे।पूर्वजन्म की कोई पहचान नहीं बता सके जहां से ज्योतिषीय डेटा संकलित हो सके।
★पूर्व जन्म के आधार पर सफल मनोचिकित्सा करने वाले अमेरिकी आईरिस साल्टज़मैन का उल्लेखकिया है कि उनके मरीज ने गत जीवन की जो घटनाएं बताई थीं उनकीपुष्टि उक्त ज्योतिषी ने मरीज कीजन्मपत्रिका से की थी। पर उनज्योतिषी के कार्य का वेबसाइट पर नाम के अलावा कुछपता नहीं चलता।
नाड़ी ज्योतिष और पुनर्जन्म : अधिक तर नाड़ी ज्योतिषी पिछले जन्म के कर्म फल के अनुसार व्यक्ति के भविष्य का कथन करते हैं जो कुछ लोगों को बहुत सही अनुभव में आता है पर अधिकांश का अनुभव निराश जनक ही रहता है जिसमें मेरे अनुभव भी निराशाजनक रहे। पिछले जन्म की जो स्थिति बताई जाती है उसके देश काल की जांच सम्भव नहीं होती है।
निष्कर्ष यह है कि जन्म।पत्रिका सेपूर्वजन्म अगले जन्म की स्थिति बताने के सत्यापित प्रमाण वाली जन्म पत्रिकाओं के अभाव में अभी दावा यह सैद्धांतिक ही है पर यदि अथक परिश्रम से टीम वर्क हो तो इसमें शुरूआती सफलता मिल सकती है।पर इसकेलिए अध्यात्म ज्योतिष की अलग विशेषज्ञ शाखाको विकसित करना होगा तथा ज्योतिषी को भी अध्यात्म उन्मुखी बनना होगा।
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।

