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Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 26 अप्रैल 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾

रविवार 26 अप्रैल 2026
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।_
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। *रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_

🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – रविवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 06:07 PM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र मघा 08:27 PM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – मघा नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह हैं। जिसके राशि स्वामी सूर्य हैं। मघा के अधिष्ठाता देवता ‘पितर’ (पूर्वज) माने जाते हैं।
⚜️ योग – वृद्धि योग 10:27 PM तक, उसके बाद ध्रुव योग
प्रथम करण : तैतिल 06:14 AM तक
द्वितीय करण : गर 06:07 PM तक, बाद वणिज
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:38:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:30:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:18 ए एम से 05:01 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:40 ए एम से 05:45 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:53 ए एम से 12:45 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:23 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:52 पी एम से 07:14 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:53 पी एम से 07:58 पी एम
💧 अमृत काल : शाम 06:01 पी एम से 07:38 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : दोपहर 11:57 पी एम से 12:40 ए एम, अप्रैल 27
❄️ रवि योग : प्रातः 05:45 ए एम से 08:27 पी एम
🔥 विडाल योग : प्रातः 05:45 ए एम से 08:27 पी एम
🚓 यात्रा शकुन- रविवार को इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – महावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान/ गण्ड मूल/ रवि योग/ विडाल योग/ सिक्किम स्थापना दिवस, विश्व बौद्धिक संपदा दिवस, चेर्नोबिल त्रासदी स्मृति दिवस (बेलारूस), श्रीनिवास रामानुजन् स्मृति दिवस, माता-पिता बधिर दिवस, राष्ट्रीय प्रेट्ज़ेल दिवस, भारतीय अभिनेत्री मीनू मुमताज़ जन्म दिवस, राजस्थान की राज्यपाल प्रभा राव स्मृति दिवस, वल्लभाचार्य पुष्टिमार्ग स्थापना दिवस, अभिनेत्री मौसमी चटर्जी जन्म दिवस, संगीतकार शंकर सिंह रघुवंशी स्मृति दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗼 Vastu tips 🗽
शंख की स्ख्या का भी रखें ध्यान अगर आपने पूजा घर में दो या दो से ज्यादा शंख रख रखे हैं तो एक को छोड़कर बाकी सभी को हटा दें। आचार्य श्री गोपी राम अनुसार, घर के मंदिर में एक से ज्यादा शंख नहीं रखने चाहिए। मान्यता है कि आसपास की ऊर्जा और घर में रहने वालों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अगर आप पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने पूजा घर में हमेशा एक ही शंख रखें।
*टूटे-फूटे बर्तनों का न करें उपयोग घर के मंदिर में टूटे-फूटे बर्तन जैसे थाली, कटोरी, गिलास आदि न रखें। पूजा के लिए इस तरह के बर्तनों को प्रयोग करना अशुभ माना जाता है। यह ग्रह दोष का कारण भी बन सकता है, जो कई तरह की समस्याएं की वजह बनता है। मान्यता है कि इससे गृह क्लेश और कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में आपके पूजा घर में इस तरह के बर्तनों हैं, तो उन्हें तुरंत बदल दें। *भोग को पूजा घर में ज्यादा देर तक न छोड़ें बहुत से लोग भगवान जी को भोग अर्पित करने के बाद उसे लंबे समय तक या पूरी रात के लिए पूजा घर में ही छोड़ देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान को प्रसाद चढ़ाते ही उनका भोग लग जाता है। वहीं वास्तु के अनुसार ऐसा करना सही नहीं है। ऐसे में भोग लगाने के कुछ देर बाद ही उसे वहां से हटा देना चाहिए। इस प्रसाद को बाकी भोजन में मिला दें या घर के सभी में बांट देना चाहिए।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शनिवार के दिन उड़द के पकौड़े सरसों के तेल में बना लें तथा पूरी रात उन्हें ढंककर रख दें। अगले दिन (रविवार को) सुबह जल्दी उठकर बिना किसी से कुछ बोले सूर्योदय के समय पकौड़े लेकर घर से निकल जाएं और रास्ते में जो भी कुत्ता सबसे पहले दिखाई दें, उसे खिला दें। ध्यान रखें कि पकौड़े कुत्ते को डालने के बाद वापस पलटकर न देखें और घर चले आएं। इस दौरान किसी से कोई बात न करें, न किसी बात का जवाब दें। आपका काम हर हाल में पूरा होगा।
*बुधवार, गुरुवार या रविवार के दिन एक रोटी लेकर उस पर अपनी तर्जनी (हाथ की पहली) और मध्यमा (दूसरी) अंगुली तेल में डुबोकर लाइन खींच लें। इस रोटी को किसी भी दोरंगे कुत्ते को खाने के लिए दे दीजिए। यदि कुत्ता इस रोटी को खा लेता है तो समझिए आपको साक्षात भैंरू बाबा का आशीर्वाद मिल गया। परन्तु कुत्ता रोटी खाने के बजाय सूंघ कर आगे बढ़ जाए तो इस उपाय को दो बार (कुल तीन बार से अधिक न करें) और करें। ध्यान रखें यह उपाय केवल बुधवार, गुरुवार या रविवार को ही करना है, अन्य दिन नहीं।। 🍲 *आरोग्य संजीवनी* 🍜 खाने से पहले सलाद या फल जरूर खाए
खाना खाने से कम से कम एक घंटे पहले सलाद या फल जरूर खाए. इनमे पाया जाने वाला फाइबर आपके आंतों और लीवर के लिए बहुत फायदे बंद होता है इससे आपके आंतों की अच्छे से सफाई हो जाती है और कब्ज जैसे समस्या में भी राहत मिलती है
खाने के साथ हल्का गर्म पानी या छाछ पीएं
*आयुर्वेद के अनुसार आपको खाने के साथ हल्का गर्म पानी या छाछ दही जरूर ले ये आपके खाने को पचाने में काफी मददत करता है. पानी को आपको हमेशा बैठ कर और सिप सिप कर के पीना चाइए जिससे की आपके मुंह का सलायबा मिलता है *इकट्ठा ही ज्यादा खाना न खाए
*अक्सर हम लोग जल्दी जल्दी में ज्यादा खाना खा लेते है जिसको पचने में काफी दिक्कत होती है. दो दो या तीन तीन करके दिन में एक दो बार खाना खाए जिससे की आपके आंतो पे कोई दबाव नहीं पड़ेगा और खाने को खूब चबा चबाकर खाए जिससे की मुंह का सिलायबा मिले और पचने में आसानी हो 🌷 *गुरु भक्ति योग* 🌸 विंशोत्तरी दशा महर्षि पराशर की सबसे बड़ी देन है बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है कि विंशोत्तरी दशा सर्वेषां श्रेष्ठा कलियुगे विशेषतः। विंशोत्तरी का अर्थ है एक सौ बीस वर्ष का चक्र जिसमें नौ ग्रहों में से प्रत्येक को एक निश्चित काल दिया गया है। जैसे सूर्य को छह वर्ष और शुक्र को बीस वर्ष। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, उसी नक्षत्र के स्वामी की दशा से आपके जीवन का क्रम तय होता है। लेकिन यह केवल समय का गुज़रना नहीं है। एक शोधकर्ता के रूप में मेरा अनुभव कहता है कि दशा आपकी आन्तरिक ऊर्जा का एक नया रूपांतरण है। जब शनि की दशा आती है तो मनुष्य की सोच में गम्भीरता और अनुशासन स्वतः आने लगता है और जब शुक्र आता है तो वही मन कला, सौन्दर्य और जीवन के सुखों की ओर मुड़ जाता है। भाग्य केवल बाहरी परिस्थिति नहीं, वह आपकी आन्तरिक मानसिक स्थिति का प्रतिबिम्ब है और वह दशा ग्रह तय करते हैं। महादशा महादशा और अन्तर्दशा: दो स्तरों पर काम करता है यह विज्ञान में आचार्य श्री गोपी राम कहते हैं कि जिस ग्रह की दशा चल रही हो, कुंडली में वह जिस भाव का स्वामी है उस पूरे कालखंड में वही भाव आपके जीवन का केन्द्र बन जाता है। महादशा वह दीर्घकालीन ढाँचा है जो दस से बीस वर्षों का विज़न तय करती है, जबकि अन्तर्दशा उस ढाँचे के भीतर का सूक्ष्म क्रियान्वयन है जो हर एक दो वर्ष में दिशा बदलती है। महादशा और अन्तर्दशा के संयोग से ही फल की सिद्धि होती है। इसे एक उदाहरण से समझिए कि किसी की शुक्र महादशा चल रही हो और विवाह का योग भी कुंडली में हो, फिर भी शुक्र और राहु की अन्तर्दशा में विवाह नहीं होगा यदि राहु का सम्बन्ध बाधक भावों से हो। विवाह तब होगा जब शुक्र के साथ गुरु या लग्नेश की अन्तर्दशा आए। यही सूक्ष्मता वैदिक ज्योतिष को विशिष्ट बनाती है। केपी ज्योतिष की बारीकी: जहाँ सामान्य ज्योतिष रुक जाता है
हम केवल ग्रह की राशि या भाव नहीं देखते बल्कि उसका नक्षत्र स्वामी और उप-स्वामी देखते हैं। एक ग्रह अपनी दशा में वही फल देगा जो उसका नक्षत्र स्वामी संकेत करता है। यदि महादशा का स्वामी करियर में तरक्की का संकेत दे रहा हो लेकिन अन्तर्दशा का स्वामी किसी बाधक भाव से जुड़ा हो, तो उस विशेष समय में पदोन्नति होते-होते रुक जाएगी। जैसे ही अन्तर्दशा बदलेगी वही काम बिना किसी विशेष प्रयास के हो जाएगा। यही वह बारीक विज्ञान है जहाँ केपी पद्धति ज्योतिषीय गणना को पूरी तरह तार्किक बना देती है।
एक बड़ा प्रश्न यह है कि दशा भाग्य को नियंत्रित करती है या प्रकट करती है? जातक पारिजात में आचार्य वैद्यनाथ दीक्षित ने स्पष्ट किया है कि कोई ग्रह स्वतन्त्र रूप से फल नहीं देता, वह आपके संचित कर्मों के अनुसार फल देता है। दशा उन कर्मों की परिपक्वता का समय है। जो बीज आपने बोए वे कुंडली में ग्रहों की स्थिति के रूप में संचित हैं और दशा वह ऋतु है जब वे बीज अंकुरित होते हैं। इसीलिए मैं कहती हूँ कि भाग्य नियंत्रित नहीं होता बल्कि भाग्य केवल प्रकट होता है।
दशा भाग्य को नियंत्रित करती है या प्रकट करती है?
सारावली में आचार्य कल्याणवर्मा कहते हैं कि गोचर कभी स्वतन्त्र रूप से फल नहीं देता बल्कि वह दशा के अनुसार ही परिणाम देता है। गोचर वह डाक है जो द्वार तक आती है लेकिन दशा वह पता है जहाँ वह डाक पहुँचनी है। यदि दशा अनुमति नहीं दे रही तो आकाश में कितना भी बड़ा गोचर हो जाए, आपके जीवन में कोई बड़ी घटना नहीं घटेगी। जन्मकुंडली आपका मानचित्र है और दशा उस मानचित्र पर आपकी यात्रा की गति और दिशा।
*अंत में अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या खराब दशा का अनुभव बदला जा सकता है? दशा का क्रम तो नहीं बदला जा सकता लेकिन उस काल का अनुभव अवश्य बदला जा सकता है। जब आप दशा के ग्रह की प्रकृति को समझकर उसके अनुरूप अपना आचरण ढाल लेते हैं, जैसे शनि की दशा में परिश्रम और राहु की दशा में सावधानी, तो वही समय आपके लिए संकट के बजाय शोध और परिष्कार का काल बन जाता है। शास्त्र में इसी को उपाय कहा गया है। उपाय ग्रह को नहीं बदलते बल्कि वे आपको उस ग्रह की ऊर्जा के अनुकूल बनाते हैं। ••••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤•••• ⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।। *दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।।

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