बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता जरूरी, न्यायालय में दी गई अहम कानूनी

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने और बच्चों के अधिकारों के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को ढीमरखेड़ा न्यायालय परिसर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम में उपस्थित पक्षकारों एवं आमजन को बाल श्रम एवं किशोर श्रम अधिनियम, 1986 के प्रावधानों की जानकारी दी गई।
मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के पालन में तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जीतेन्द्र कुमार शर्मा के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में ढीमरखेड़ा न्यायालय की माननीय न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने बाल श्रम से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला ।
उन्होंने बताया कि बच्चों से मजदूरी अथवा किसी संस्थान में जबरन श्रम कराया जाना उनके अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है । विशेष रूप से 14 वर्ष से 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कराए जाने वाले कार्यों में कानून के प्रावधानों का पालन करना आवश्यक है। बच्चों को शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और स्वस्थ विकास का अधिकार है ।
कार्यक्रम के दौरान बाल श्रम की रोकथाम के लिए सामुदायिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई गई । ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए गांव-गांव शिविर आयोजित किए जाने तथा बाल श्रम से संबंधित मामलों की जानकारी सामने आने पर संबंधित विभागों एवं सक्षम अधिकारियों को सूचना देने के महत्व पर भी चर्चा की गई।
न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने कहा कि बाल श्रम को केवल कानून के माध्यम से नहीं, बल्कि समाज की जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी से भी समाप्त किया जा सकता है । उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे बच्चों को मजदूरी में लगाने के बजाय उनकी शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए प्रयास करें ।
कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित जनों को बाल श्रम के दुष्परिणामों और बच्चों के कानूनी अधिकारों की जानकारी देते हुए समाज में जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।



