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रविवार से शुरू हुआ अध‍िकमास, विवाह और मांगलिक कार्यों पर रोक,

लेकिन पूजा-पाठ और दान पुण्यदायी ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण शास्त्री
रिपोर्टर : सतीश मैथिल
सांचेत । अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा अत्यंत फलदायी होती है ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण शास्त्री सांचेत बालों ने बताया अधिक मास में सत्यनारायण भगवान की पूजा सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल ज्येष्ठ मास में अधिकमास लग रहा है. इसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है. यह खास अवधि 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगी. इसलिए ज्येष्ठ मास लगभग दो महीनों का हो जाएगा और इसके चलते यह वर्ष सामान्य 12 महीनों के बजाय 13 महीनों का माना जाएगा. इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है.
ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण शास्त्री बताते हैं
ज्येष्ठ मास में कैसे जुड़ेगा अधिकमास
इस बार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष 16 मई तक रहेगा, जिसके बाद 17 मई से अधिकमास प्रारंभ होगा. इसके बाद 15 जून तक अधिकमास चलेगा और फिर ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष 29 जून तक जारी रहेगा. इस प्रकार सामान्य ज्येष्ठ मास और अधिकमास की अवधि आपस में ओवरलैप करेगी, जिससे यह खास स्थिति बनेगी
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क्या है अधिकमास और क्यों पड़ता है यह महीना
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अधिकमास का कारण सूर्य और चंद्र कैलेंडर के बीच अंतर है. सौर वर्ष 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है. इस अंतर को बैलेंस करने के लिए लगभग हर 32 महीने 16 दिन में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या मलमास कहा जाता है. इसी कारण हिंदू पंचांग में त्योहारों और तिथियों के बीच बैलेंस बना रहता है. अगर ऐसा न हो, तो समय के साथ त्योहार ऋतुओं से अलग हो सकते हैं।
पूजा-पाठ और धार्मिक महत्व
अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा अत्यंत फलदायी होती है. इस अवधि में सत्यनारायण व्रत कथा, विष्णु सहस्त्रनाम, श्रीमद्भागवत गीता का पाठ और रामायण का श्रवण विशेष रूप से शुभ माना गया है. इस मास में शालीग्राम की पूजा, घी का दीपक जलाना और मंत्र जाप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. इसके साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जप ग्रह दोषों की शांति के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
मांगलिक कार्यों पर विराम, लेकिन दान पुण्यदायी
इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, भूमि पूजन और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्यों को शुभ नहीं माना जाता. हालांकि दान, जप, तप और पूजा-पाठ को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है. इस दौरान जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, अनाज, जूते-चप्पल, छाता और धन का दान करने की परंपरा है. गौशाला में दान और गायों की सेवा को भी विशेष महत्व दिया गया है।
सत्यनारायण पूजा और यज्ञ का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास में सत्यनारायण भगवान की पूजा सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है. इसके अलावा यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. ब्रजभूमि की यात्रा और तीर्थ स्नान को भी इस मास में अत्यंत शुभ बताया गया है।
आध्यात्मिक लाभ
ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण शास्त्री के अनुसार, अधिकमास में किए गए जप-तप, दान और पूजा का फल कई जन्मों तक मिलता है. यह महीना आत्मिक शुद्धि और ईश्वर आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस अवधि का सही उपयोग व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति ला सकता है।

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