ग्रीन पटाखों की मांग ज्यादा कारोबारियों को मुनाफे की उमीद

सिलवानी । बाजार में लगी आतिशबाजी की दुकान।
सिलवानी. सनातन का सबसे बड़ा पर्व दीपावाली पर्व है। इस दिन भगवान श्रीराम लंका विजय कर अयोध्या लौटे थे। साथ ही दीपावली पर्व पर महालक्ष्मी पूजन की परंपरा है। महालक्ष्मी पूजन के बाद रंगारंग आतिशबाजी की जाती है। यह क्रम धनतेरस से प्रारंभ होकर भाई दूज तक जारी रहता है। इन दिनों में बच्चों द्वारा आतिशबाजी चलाई जाती है। वहीं इस बार दीपावली पर महंगाई की मार देखने को मिल रही है। पटाखों की कीमत में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद भी पटाखा कारोबारियों को अच्छे मुनाफे की उमीद है। इसलिए पर्व के चलते पटाखा बाजार पूरी तरह से सज चुका है।
ग्रीन पटाखों का ट्रेंड ज्यादा
पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन पटाखों का चलन बढ़ा है, जिससे प्रदूषण कम होता है। इस बार भी ग्रीन पटाखों की मांग अधिक है। दुकानों पर हर वैरायटी में यह पटाखे मौजूद है। पटाखा व्यापारी संजू चौरसिया के अनुसार हर तरह के पटाखे इस बार बाजार में उपलब्ध है। हालांकि पटाखों की कीमत पिछली बार की तुलना में इस बार 20 प्रतिशत तक अधिक है। हालांकि यह वृद्धि त्योहार के चलते ज्यादा मायने नहीं रखती और दुकानदारों को इस बार भी अच्छे मुनाफे की उमीद है। बाजार में फुलझड़ी, अनार, चकरी और आसमानी पटाखों की डिमांड ज्यादा रहती है।
अस्पताल मैदान में लगीं 50 से अधिक पटाखी की दुकानें
स्थानीय स्तर पर सिविल अस्पताल मैदान पर आतिशबाजी की दुकानें लगाई जाती है। इस अस्थायी मार्केट में इस बार पचास से अधिक दुकानें हैं। पिछली बार की तुलना में दुकानों की संया बढ़ी है। वहीं सुरक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस ने अपने स्तर पर व्यवस्थाएं की है। सिविल अस्पताल मैदान पर लगी दुकानों पर ग्राहकी भी शुरु हो गई है।



