बीएमओ ने गर्भवती महिला को दी गालियां, महिला ने पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उमरियापान के प्रभारी बीएमओ बीके प्रसाद ने एक गर्भवती महिला और उसके पति के साथ अभद्रता करने, गाली-गलौज और इलाज से इनकार करने का गंभीर आरोप लगा है।
ग्राम गढ़वास के निवासी गर्भवती महिला पूनम लोनी पति पुष्पराज लोनी ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत पत्र देते हुए न्याय की गुहार लगाई । पुलिस अधीक्षक को सौंपें गय शिकायत पत्र में उल्लेख है कि विगत दिनों गर्भवती महिला अपनी दो वर्षीय बच्ची का इलाज कराने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे । वहां उन्होंने नियमानुसार ओपीडी पर्ची बनवाकर इलाज के लिए डॉक्टरों का इंतजार किया। बच्ची की हालत बिगड़ रही थी लेकिन किसी ने इलाज शुरू नहीं किया। आखिरकार, मजबूरी में उन्होंने प्रभारी बीएमओ डॉ. बी. के. प्रसाद से निवेदन किया कि उनकी बच्ची का इलाज कराने। लेकिन यह निवेदन उस गरीब पिता को भारी पड़ गया ।
पुष्पराज के अनुसार, डॉ. बी. के. प्रसाद ने उनके साथ न केवल अशिष्ट व्यवहार किया, बल्कि उन्हें अपमानजनक शब्द कहते हुए अस्पताल से भगा दिया। जब इस व्यवहार का विरोध किया तो डॉ. बी के प्रसाद ने गर्भवती पूनम लोनी को भी अश्लील और आपत्तिजनक गालियां दीं।
शिकायत पत्र में उल्लेख है कि इस घटना से आहत पूनम लोनी ने उमरियापान थाने में डॉ. बी. के. प्रसाद के खिलाफ एक लिखित शिकायत दर्ज कराई।
हताश होकर पूनम लोनी शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कटनी को लिखित में शिकायत सौंपी है और दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है। पूनम का कहना है कि अगर एक आम नागरिक अस्पताल में इलाज की गुहार लगाने पर अपमान और गालियां सुनने को मजबूर हो जाए, तो यह सिस्टम की विफलता नहीं तो और क्या है?
इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है । स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में गरीबों के साथ इस तरह का बर्ताव रोजमर्रा की बात बन गई है, लेकिन अब यह सहन से बाहर हो चुका है । लोग पूछ रहे हैं कि क्या कोई जिम्मेदार अधिकारी ऐसे डॉक्टरों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी तमाम मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
अब निगाहें जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील मामले में किस प्रकार की प्रतिक्रिया देते हैं ।



