मंडीदीप के 100 उद्योग 5 दिन से बंद, बाढ़ की तबाही से रोजाना 150 करोड़ रुपये का हुआ नुकसान
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। भले ही चाहे 22 अगस्त को आई बाढ़ के बाद भोपाल में स्थितियां सामान्य हो गई हों, लेकिन एक लाख लोगों को रोजगार देने वाले मंडीदीप इंडस्ट्रियल एरिया में 25% छोटे और मझौले उद्याेग पांच दिन बाद भी उत्पादन शुरू करने की स्थिति में नहीं पहुंच पाए हैं। 22 अगस्त को कलियासोत और बेतवा नदी पर बने दाहोद डेम के गेट एक साथ खोल देने के बाद यहां के 100 उद्योगों के भीतर 4 से 5 फीट पानी घुस गया था।बाढ़ के लबालब भरे गंदे पानी की वजह से फैक्ट्रियों में नए माल का उत्पादन नहीं हो पा रहा है।इस कारण 24 घंटे चलने वाली मशीनें बंद करनी पड़ीं। बाढ़ के पानी और कीचड़ के कारण कई मशीनें अब जरूरी मेंटेनेंस मांग रही हैं। कई अत्याधुनिक आयातित उत्पादन मशीनों के मेंटेनेंस के लिए विदेशों से इंजीनियर बुलाने पड़े हैं। मंडीदीप इंडस्ट्रियल एसोसिएशन का अनुमान है कि बाढ़ के 5 दिन बाद भी 50 से 70 कंपनियां उत्पादन शुरू करने की स्थिति में नहीं आ पाई हैं। इसके चलते रोज 150 करोड़ रु. के प्रोडक्शन का नुकसान हो रहा है। मैन्युफैक्चरिंग और प्रोसेसिंग कंपनियों को अपनी मशीनें दुरुस्त करने पर करीब एक हजार करोड़ रु. खर्च करने पड़ सकते हैं।
विदेशी कंपनियों के ऑर्डर अटके, भोपाल भेजे अपने प्रतिनिधि…..
वियतनाम की सीमेंट निर्माता कंपनी हाई फोंग से 4 करोड़ रु. का ऑर्डर लेने वाली सैफिया टेक के प्रमुख धनंजय पांडे कहते हैं कि उन्हें 28 अगस्त तक ऑर्डर पूरा करना था। लेकिन बाढ़ ने ऑर्डर अटका दिया। सैफिया जो मशीनरी बनाती है, वह सीमेंट प्लांट को चलाने के लिए बेहद जरूरी थी। परेशान कंपनी ने अगले ही दिन अपने प्रतिनिधि को भोपाल भेज दिया।उद्यमी मनोज मोदी कहते हैं, 7 साल में तीसरी बार बारिश का पानी कंपनियों में घुसा है। इससे पहले 2015 और 2020 में भी यही स्थिति बनी थी। वे कहते हैं कि यह दो डेम का डूब क्षेत्र है। आखिर सरकार ने यहां उद्योग लगाने के लिए जमीन ही क्यों दी।1000 करोड़ से अधिक का सालाना उत्पादन करने वाले दावत फूड की फैसिलिटी में भी पानी घुसा।
7 साल पहले मंडीदीप में अपना इंटरनेशनल डिजाइनिंग सेंटर खोलने वाली क्रॉम्प्टन ग्रीव्ज में बारिश के पानी से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कंपनी को पिछले दो बार पानी भरने के कारण 100 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा था। इस साल कंपनी अब तक मेंटेनेंस के काम में लगी है।
आयशर की फेसिलिटी के बाहर ज्यादा पानी भरा है। यहां खड़े ट्रैक्टर दो से तीन दिनों तक डूबे रहे। आईटी कंपनी नेट-लिंक के मंडीदीप स्थित सेंटर में कर्मचारी प्रवेश नहीं कर सके। इसलिए कंपनी वर्क फ्रॉम होम करा रही है।
कलियासोत नदी का प्रवाह सीधा कर दें तो रुकेगी बाढ़….
कलियासोत नदी एक पहाड़ की 90 डिग्री पर परिक्रमा करने के बाद बेतवा नदी से मिलती है। इसलिए पानी का फ्लो एक साथ आता है। अगर सरकार इस पहाड़ को खोदकर नदी का प्रवाह सीधा कर दें तो पानी इंडस्ट्रियल एरिया में नहीं घुसेगा। – राजीव अग्रवाल, अध्यक्ष, मंडीदीप इंडस्ट्रियल एसोसिएशन



