गणपति पंडालों में गूंज रहे जयकारे, जैन मंदिरों में अभिषेक-शांतिधारा के साथ आत्मशुद्धि के पर्व की शुरुआत

सिलवानी। नगर में इन दिनों धर्म और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। एक ओर विघ्नहर्ता भगवान गणेश के आगमन से गणेशोत्सव की धूम है, वहीं दूसरी ओर जैन समाज द्वारा आत्मशुद्धि के महापर्व पर्युषण की आराधना श्रद्धा और उत्साह के साथ की जा रही है। दोनों ही पर्व श्रद्धालुओं को भक्ति, संयम, सद्भाव और आत्मकल्याण का संदेश दे रहे हैं।
जगह-जगह विराजे विघ्नहर्ता, गूंज रहे गणपति बप्पा के जयकारे
गणेशोत्सव के चलते नगर के विभिन्न चौराहों, मोहल्लों और प्रमुख स्थानों पर गणेश समितियों द्वारा आकर्षक पंडाल सजाए गए हैं। पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं विराजमान हैं, वहीं विभिन्न झांकियों को अंतिम रूप देने का कार्य भी जारी है। सार्वजनिक पंडालों के साथ श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों में भी विधि-विधान से भगवान गणेश की स्थापना की है।
सुबह और शाम आयोजित होने वाली महाआरती में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। आरती के दौरान भक्ति गीतों और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो रहा है। नगर के विभिन्न क्षेत्रों में “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे गूंज रहे हैं।
जैन मंदिरों में अभिषेक-शांतिधारा के साथ पर्युषण पर्व की शुरुआत
इसी बीच जैन समाज में आत्मशुद्धि और संयम का महापर्व पर्युषण भी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। जैन मंदिरों में सुबह धार्मिक अनुष्ठान, अभिषेक और शांतिधारा सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। समाजजन भगवान जिनेंद्र की आराधना कर आत्मचिंतन, संयम और सदाचार का संकल्प ले रहे हैं।
पर्युषण पर्व के दौरान धार्मिक प्रवचन, पूजा-अर्चना और आत्ममंथन के माध्यम से श्रद्धालु अपने जीवन में संयम, क्षमा और सद्भाव को अपनाने का प्रयास करते हैं। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की उपस्थिति से धार्मिक वातावरण बना हुआ है।
नगर में एक साथ चल रहे गणेशोत्सव और पर्युषण पर्व ने सिलवानी की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को और समृद्ध किया है। दोनों पर्व अपने-अपने तरीके से श्रद्धालुओं को आस्था के साथ सद्भाव, संयम और आत्मकल्याण की प्रेरणा दे रहे हैं।



