मध्य प्रदेश

लिपिक संदीप शुक्ला लोकायुक्त की रडार में,

बीईओ ऑफिस ढीमरखेड़ा का मामला, बिना चढ़ोत्तरी के नहीं होता काम
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान ।
विगत दिवस जिला शिक्षा अधिकारी ऑफिस कटनी में लोकायुक्त टीम ने बाबू अजय कुमार खरे को 55 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। जिस तरह से जिला शिक्षा अधिकारी कटनी में भ्रष्टाचार फैला है ठीक उसी तरह बीईओ ऑफिस ढीमरखेड़ा में भ्रष्टाचार चरम सीमा में है और किसी भी दिन लोकायुक्त की टीम दबिश दे सकती है। ढीमरखेड़ा में पदस्थ कई कर्मचारी-अधिकारी लोकायुक्त की रडार में है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीईओ ऑफिस ढीमरखेड़ा में पदस्थ लिपिक संदीप शुक्ला द्वारा बिना रिश्वत के काम नहीं किया जाता और एक शिक्षक से पेंशन प्रकरण का निराकरण करने के एवज में रिश्वत की मांग की गई। शिक्षक द्वारा बताया गया कि वह वर्ष 2021 के 8 वें माह में सेवानिवृत्त हुये था लेकिन आज दिनंाक तक उसकी पेंशन प्राप्त नहीं हो रही है जबकि मेरे से रिश्वत भी ले ली गई है। कुछ कर्मचारी ने बताया कि लिपिक शुक्ला द्वारा बिना रिश्वत के कोई भी काम नहीं किया जाता है और स्कूलों को विभिन्न मदों में शासन से राशि प्राप्त होती है जिसका आहरण करने के लिये पहले लिपिक को पैसा देना पड़ता है। आगे सूत्रों ने यह भी बताया कि लिपिक शुक्ला के द्वारा पेंशन प्रकरणों में जमकर लेन-देन किया जाता है और जो शिक्षक या कर्मचारी लिपिक को रिश्वत नहीं देता तो उनके प्रकरणों का निपटारा नहीं किया जाता है और लिपिक के द्वारा नियमों की झड़ी लगा दी जाती है जिससे परेशान होकर संबंधित कर्मचारी रिश्वत देने के लिये मजबूर हो जाता है। लिहाजा जिस तरह से बीईओ ऑफिस ढीमरखेड़ा में भ्रष्टाचार चरम पर है इससे किसी भी दिन लोकायुक्त टीम दबिश दे सकती है। जानकारी यह भी लगी है कि इस संबंध में एक गोपनीय शिकायत ईओडब्ल्यू में की गई है जिस संबंध में जांच जारी है।
जब से नियुक्ति तब से यही पदस्थ
सूत्रों ने बताया कि लिपिक संदीप शुक्ला की पदस्थापना बीईओ ऑफिस ढीमरखेड़ा में हुई थी तभी से वह यहां पर पदस्थ है। इस बीच चुनाव आयोग द्वारा कई चुनाव संपन्न करवाये गये और हर चुनाव के पहले इस संबंध में संबंधित विभाग प्रमुख से यह जानकारी मांगी जाती है कि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी तीन वर्ष से ज्यादा समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हो तो इस संबंध में अवगत कराकर उसे अन्यंत्र पदस्थ किया जावे लेकिन लगभग 15 वर्षों से एक स्थान पर पदस्थ लिपिक को अन्यंत्र पदस्थ क्यों नहीं किया जाता है क्या इस संबंध में विभाग प्रमुख द्वारा यह जानकारी छिपाई जाती है कि वें लम्बे समय से यहां पर पदस्थ है या फिर चुनाव आयोग को भी अंधेरे में रखा जाता है।

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