मध्य प्रदेश

बन्द पड़े बीडी, अगरबत्ती, हथकरघा, चरखा, सूतकताई बुनकर आदि कुटीर गृह उद्योगो को पुन: चालू कराने की मांग

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । कभी कुटीर उद्योगो में अग्रणी व आत्मनिर्भर रहा मप्र का सागर सम्भाग जहां अस्सी व नब्बे के दशक तक इनकी तूतू बोलती थी लोगो को अपनी आजीविका चलाने मे कोई भी आर्थिक परेशानी नही थी तब लोगो के घरो मे चलने वाले कुटीर उद्योगो की आवाजो से क्रान्ति सी आई हुई थी लोग खुशहाल जीवन आत्मसम्मान के साथ जी रहे थे। बता दे की तब जगह जगह घरघर मे जहां महिलाऐ समूहों में बैठकर बीडी बनाने का काम अपने दैनिक घरेलु कामकाज को निपटाकर करती थी जिनसे उनकी घर बैठे अच्छी आय होती थी इसी की कमाई से उनका भरण पोषण अच्छे से होता था इसी प्रकार परिवारो मे अगरबत्ती बनाने, चरखे से सूत कातने, हथकरघा उद्योग मे कपड़ो का निर्माण, बढईगिरि मे लकडी के काम आदि बखूबी संचालित हुआ करते थे अब इन बन्द या मन्द पडे कुटीर उद्योगो को पुन:मजबूती से उद्योग नीति के तहत पूरे प्रशिक्षण व नवीन उपकरणो के साथ शासकीय आर्थिक सहायता से संचालित करने की नितांत आवश्यकता है। इसमे अब नये कुटीर उद्योगो में मोमबत्ती, दोना पत्तल, रेशम उद्योग, चाक निर्माण, मुर्गी पालन, मिट्टी बरतन मे मिट्टी के खिलौने, घडा, गमला, मूर्ति निर्माण कलां आदि हजारो कुटीर उद्योगो के स्वरोजगार है यदि इनको सही मायनो मे क्रियान्वित किया जाता है तो सचमुच मे यहां कुटीर उद्योग क्रांति का प्रादुर्भाव अवश्यम्भावी है।

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