खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जवाबदेही के नाम पर ढीमरखेड़ा एसडीएम की तुनकमिजाजी बनीं चर्चा का विषय
कोई भी जानकारी देने से पहले पारा पहुंच जाता है सातवें आसमान पर
उप तहसील सिलौड़ी का मामला
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । समाचार का शीर्षक पढ़कर चौकिये मत। हम बात कर रहे है एसडीएम ढीमरखेड़ा श्रीमती नदीमा शीरी की। मैडम महोदया से जब उप तहसील सिलौड़ी में पदस्थ लिपिक अनिल श्रीवास्तव द्वारा अपने पुत्र अभिषेक श्रीवास्तव को तहसील में नियुक्त कर काम करवाने के मामले में जब एसडीएम से संपर्क किया गया और पूछा गया कि आखिर किस अधिकार के तहत अभिषेक श्रीवास्तव उप तहसील सिलौड़ी में काम कर रहे है तब मैडम का पारा सातवे असमान पर पहुंच गया और उन्होंने कह दिया कि आपको जो स्टेटमेंट लगाना हो लगा दो। हमें सब कुछ पता है। सवाल यह उठता है कि एसडीएम जैसे जिम्मेदार पदों का निर्वाहन कर रही अधिकारी को क्या यह शोभा देता है कि वे किसी भी पत्रकार से इस तरह की बात करें और अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से इस तरह से पल्ला झाड़े। बहरहाल एसडीएम ढीमरखेड़ा की बातों से स्पष्ट हो गया है कि वे कितनी संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वाहन कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि कटनी जिले की उप तहसील सिलौड़ी में पदस्थ लिपिक अनिल श्रीवास्तव जो कि 80 प्रतिशत लकवाग्रस्त है के द्वारा अपने पुत्र अभिषेक श्रीवास्तव को उप तहसील सिलौड़ी में पदस्थ कर दिया गया है और उनके द्वारा यह कहा जा रहा है कि मेरे द्वारा कलेक्ट्रेट से आदेश जारी करवा लिया गया है। सवाल यह उठता है कि शासन के द्वारा ऐसा कोई प्रावधान निहित नहीं किया गया है कि यदि पिता किसी बीमारी से पीडि़त हो तो उस स्थान पर पुत्र नौकरी कर सके। गांव के रजनीकांत राय, कुंवर लाल सोनी, सूरज राय, हेमचंद्र राय, दुर्गेश रजक, शिवम सेन, रामनाथ राय, अर्जुन हल्दकार, सचिन साहू, बेड़ी लाल चक्रवर्ती सहित अन्य ग्रामीणों द्वारा इस संबंध में आरोप लगाया गया कि अभिषेक श्रीवास्तव द्वारा उप तहसील सिलौड़ी में बैठकर शासकीय कामकाज किया जा रहा है और इस संबंध में नायब तहसीलदार सिलौड़ी रैना तामिया को भी अवगत कराया गया लेकिन उनके द्वारा भी किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई है और उनके द्वारा भी मौन साध लिया गया है। ग्रामीणों के द्वारा लिपिक पुत्र पर अवैध वसूली भी करने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यालय में जिम्मेदार अधिकारी नहीं रहने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता है।
एसडीएम और नायब तहसीलदार सिलौड़ी का संरक्षण
उपरोक्त पूरे मामले में एसडीएम ढीमरखेड़ा और उप तहसील सिलौड़ी में पदस्थ नायब तहसीलदार रैना तामिया की भूमिका संदेश के घेरे में प्रतीत हो रही है क्योंकि इस मामले में नायब तहसीलदार तामिया को पूर्व में भी ग्रामीणों द्वारा सूचित किया गया था इसके बाद भी इनके द्वारा किसी तरह का कोई निर्णय नहीं लिया गया। रही बात एसडीएम की तो मैडम महोदया की बात ही अलग और इन्होंने तो कह दिया है कि हमें सब कुछ पता है आपको जो छापना हो छाप दो। एसडीएम जिस तरह से आग बबूला हुई है इससे यह स्पष्ट है कि इस मामले की जानकारी उन्हें है और जानकारी के बाद भी किसी तरह की कार्यवाही न करते हुये लिपिक के पक्ष में खड़ी है जो नियम विरूद्ध है और शासन के द्वारा ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है कि पिता किसी बीमारी से पीडि़त हो तो उसके स्थान पर पुत्र नौकरी करें और न ही इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय से कोई आदेश जारी किया गया है।
इस संबंध में प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर कटनी का कहना है कि आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। संबंधित अधिकारी से इस संबंध में जानकारी ली जायेगी।
नदीमा शीरी एसडीएमए ढीमरखेड़ा का कहना है कि मुझे इस मामले में कुछ नहीं कहना, जो कुछ मेरा स्टेटमेंट लगाना हो लगा दो।



