मध्य प्रदेश

नशे का हफ्ता : सत्ता से सर्पदंश तक…

मध्यप्रदेश की साप्ताहिक घटनाओं का रोजनामचा
हरीश मिश्र, लेखक ( स्वतंत्र पत्रकार ) 9584815781
मैं साप्ताहिक कालचक्र का मूक गवाह हूं, जिसमें हर घटना आंखों देखी है। इस रोजनामचा में सिर्फ घटनाएं नहीं, उनके भीतर की नब्ज़ दर्ज है—जहां शब्दों से ज़्यादा अर्थ बोलते हैं और शोर से पहले साज़िश सुनाई देती है।
बीते हफ्ते की घटनाएं बताती हैं कि नशा!
मंत्री पद का! सत्ता का!
शराब का! चमड़ा कुटाई का! जिहाद के नाम पर नफरत का! लुटेरी दुल्हन का! हाथियों के डोलने का! सर्पदंश का ! भ्रष्टाचार का! जब चढ़ता है, तो इंसान अंधा हो जाता है।
लेकिन हर नशा उतरता भी है- नशेबाज़ों का नशा इस सप्ताह उतरते देखा।
मध्यप्रदेश इस हफ्ते भी ऐसे ही नशे से जूझता दिखा। कहीं राजनीतिक बयानबाज़ी में ज़हर घुला, तो कहीं राजसी ठाट-बाट देखा । लेकिन वक़्त की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वक्त के पास सबका लेखा है।
चलिए! कालचक्र का मूक गवाह मैं बताता हूं—मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर मन की बात को मन से सुना।
दूसरी तरफ हम उत्सव धर्मी हैं, कंगाल होकर भी, कर्ज़ लेकर उत्सव मनाते हैं। कंबल ओढ़कर घी पीना हमारी आदत बन गई है। उत्सव मनाना भी चाहिए, क्योंकि प्रसन्न होकर कम से कम कंगाली का दुख तो भूल जाते हैं।
मोहन सरकार अब तक 4.21 लाख करोड़ का कर्ज़ ले चुकी है। यह कर्ज़ हमारी कंगाल स्थिति का लेखा है, लेकिन सरकार ने देवी अहिल्याबाई होलकर की नगरी में राजसी जश्न मना कर सिद्ध किया है कि कंगाली में भी ग़म भूलकर खुश रह सकते हैं।
सरकार ने निर्णय लिया कि प्रदेश में 3867 करोड़ के जनकल्याण के काम होंगे, 2195 करोड़ का अद्वैत (संग्रहालय) लोक बनेगा और राहवीर योजना के तहत सड़क हादसों में घायल की जान बचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। पहले यह राशि 5 हजार रुपए थी।
मंत्रिपरिषद की राजसी बैठक में मंत्री विजय शाह नहीं पहुंचे। शाह की अनुपस्थिति में मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने शाही लुत्फ के छप्पन व्यंजनों का आनंद लिया, लेकिन मोहन सरकार को समय रहते आभास हो जाना चाहिए, दोपहर में दिया जलाने से अंधकार नहीं, दिए का वजूद खत्म होता है। इसलिए कर्ज की स्थिति से उबरना है,तो प्रदेश की प्राकृतिक संपदा का दोहन कर, बेरोजगारों को रोजगार देकर उत्सव मनाएं।
राजनीति जब नग्न होती है तो उसका स्वरूप कैसा होता है, यह हमें मंदसौर हाईवे पर दिखाई दिया।
भाजपा नेता की चमड़ा कुटाई का शर्मनाक कृत्य देखकर। भाजपा विधायक अंबरीश शर्मा ने कांग्रेसियों को कुत्ता, सांप, कुकुरमुत्ता कहा। अंबरीश भूल गए कि कमलनाथ सरकार जब अनाथ हुई थी, तो इन्हीं कांग्रेसियों के कारण। भाजपा संगठन पहले गुणवत्ता पर ध्यान देती थी, जब से संख्या बल पर ध्यान देने लगी, उसकी मिट्टी पिस रही है।
इसलिए अब भाजपा संगठन ने आदेश दिया—कम बोलें, बस ‘जय हिंद’ बोलें।
‘मोहसिन’ नाम का अर्थ होता है “परोपकारी”, लेकिन ईमान को ताक पर रखकर इंदौर में लव जिहाद की फ़ैक्ट्री संचालित कर रहा था मोहसिन। अब समय आ गया है कि बंगले से निकलकर मोहन को मोहसिन जैसे नरपिशाचों की नसबंदी, आर्थिक पाबंदी करनी चाहिए।
सरकार को पाप की वृत्ति का विनाश करना चाहिए, अन्यथा समाज में नैतिकता का ढांचा चरमरा जाएगा।
इस सप्ताह हेराफेरी का नया रंग देखा—राजस्थान पुलिस ने भोपाल से लुटेरी दुल्हन को गिरफ्तार किया।मेहंदी का रंग छूटने से पहले दुल्हन अपना रंग बदलती थी। सात महीने में 175 फेरे लेकर हेराफेरी करती रही। शहडोल में जंगली हाथियों ने डोल-डोल कर तीन को कुचल डाला। मध्यप्रदेश में अधिकारी और कर्मचारी इतने योग्य हैं कि सिवनी में सर्पदंश से एक ही व्यक्ति को फाइलों में 30 बार कटवाया और 11 करोड़ 26 लाख हज़म कर गए।
यह सत्य है कि धन एक बुराई है—चौकीदारों के संरक्षण में अधिकारी-कर्मचारी धन वसूलने वाले सिद्धहस्त तांत्रिक बन गए हैं, लेकिन एक बात तय है—हर नशा उतरता है,
जब अदालतें जागती हैं,
जब समाज सवाल करता है,
जब कैमरे सच पकड़ते हैं,
और जब एक पत्रकार अपनी कलम को हथियार बनाता है।
नशे में डूबे जो थे ,
तख़्तो-ताज के साथ,
उतर गया जब नशा, तो हकीकत आई हाथ।

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