वन माफियाओ की बढती बेजां दखल से वनविभाग बौना साबित, पर्यावरण के लिए वन सुरक्षा जरुरी

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । वन सुरक्षा के मामले में वन विभाग का बौना साबित होना वन माफियाओ को खुला संरक्षण है इस समय जिस तेजी से वनो का विनाश नई तकनीक व वैज्ञानिक पध्दति के जरिये हो रहा है इससे नही लगता की आज के बाद एक या दो दशक तक हम वनो का वर्तमान व विध्दमान स्वरुप को देख भी पायेगें वनो के विनाश में जन चर्चा व जन चिंतन का विषय बने फर्नीचर लाइसेंसो का वन विनाश मे बडी भूमिका से इन्कार नही किया जा सकता इस समय वन परिक्षेत्र के नजदीकी गांव कस्बो नगरो मे वन विभाग व्दारा बिना सोचे समझे अविवेक पूर्ण तरीके से दिये गये अनगिनत फर्नीचर लाइसेंसो के अब दुष्परिणाम सामने आते जा रहे है लाइसेंस धारको व्दारा जिस प्रकार से पीठ पीछे वन विनाश की गतिविधियो को अंजाम दिया जा रहा है ऐसा नही है की वन विभाग इससे अंजान हो आज घने जंगल ढोल की पोल बन गये है वन माफियाओ ने वन अमले की मिली भगत व व्यापक भृष्टाचार के चलते मौका का फायदा उठाते हुए वनो से सागौन के वेशकीमती सभी उन बडे गगन चुम्बी पेडो को इलैक्टिक आरे की भेट चढाया जा रहा है जो जंगल के बीचो बीच हैं इन सागौन के पेडो को बडी बेदर्दी से काट काट कर ठोली के रुप मे बनाकर उन्हे फोलव्हीलर टुव्हीलर टैक्टर टा्लियो मे भरभरकर चोरी छुपे फर्नीचर मार्टो मे पहुंचाया जा रहा है जहां पर वैध कम अवैध फर्नीचरो को सबसे ज्यादा खपाया व बनाकर बेचा व निर्यात किया जा रहा है यहां मजेदार बात तो यह है की लकडी के वैध अवैध फर्नीचर निर्माण की इस तथाकथित प्रक्रिया या यूं कहे की इस गोरखधन्धे की सूक्ष्म समीक्षा किये बगैर वन विभाग भी धडाधड फर्नीचरो की परिवहन रसीदे जारी करता जा रहा है यही नही वनविभाग से जारी रसीद पर एक नही अनेको बार माल सप्लाई किसी चमत्कार से कम नही है सबसे चिंता का विषय तो यह है की वनविभाग आगत पर्यावरण की चिंता व समीक्षा किये बगैर ही हर वर्ष फर्नीचरो के लाइसेंस पर लाइसेंस जारी करता जा रहा है इसमे नीलामी की लकडी तो एक दिखावा मात्र रहती है सर्वाधिक इमारती सागौन की लकडी तो चोरी की ही इस्तेमाल की जा रही है जंगल से सागौन की लकडी की कटाई जिस तेज गति से और अंधाधुंध तरीके से हो रही है वह भविष्य के लिये बेहद दुखद व खतरनाक है कटते जंगल के साथ खाली होती जा रही वन भूमि को हडपने के लिये लुटेरो की फौज भी अतिक्रमण के लिये तैयार बैठी रहती है इस प्रकार आज जंगल का अधिकांश भू भाग वन सुधार व संरक्षण की जगह भू माफियाओ की भेंट चढकर उनकी चपेट मे है जहां आज उक्त वन भूमि मे धडल्ले से खेती की जा रही है वन विभाग ने आज तक इस ओर कोई ध्यान ही नही दिया आज हम जिस सुगमता से सांस ले रहे है व अनुकूल तापमान का आनंद ले रहे है हम भूल रहे है की यह पर्यावर्णीय सुख हमें चन्द्रमा या किसी अन्य ग्रह से नही बल्कि इसी धरती व इसके सघन वनो से मिल रहा है हमारे पूर्वजो ने हमारी सांसो के साथ कभी समझौता नही किया वरना आज वनो के स्थान पर सपाट मेंदान होता और हम शुध्द वायु के लिए तरस जाते ,बतादे की वन परिक्षेत्र गौरझामर दुर्लभ तेलिया सागौन के लिए प्रसिद्ध है लेकिन दुर्भाग्यवश वन विभाग इसे बचाने के चक्कर में इसका रकबा कम करता जा रहा है हालात यह बन गये है की सागौन की जगह अब सतकठा व अन्य प्रजाति ने पेड बहुतायत मे दिखलाई देने लगे है वैसे कहा जाये तो जंगल अब गर्भ करने लायक नही बचे है जंगलो को यदि वास्तव में बचाना है तो जंगल के समीप गांव कस्बो नगर शहरो के फर्नीचर लाइसेंस तत्काल प्रभाव से वापिस लेना होगें।



