भगवान श्रीकृष्ण के खिलाफ टिप्पणी करने वाले प्रभारी प्राचार्य के विरुद्व कार्यवाही की मांग को लेकर हिन्दू समाज ने सौंपा ज्ञापन

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान | श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पवित्र अवसर पर शासकीय महाविद्यालय ढीमरखेड़ा के पूर्व प्रभारी प्राचार्य बृजलाल अहिरवार ने भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना, साधु-संतों एवं महापुरुषों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने की घटना ने हिंदू समाज को आहत और आक्रोशित कर दिया और हिंदू समाज के सदस्यों ने कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा और तत्काल कार्यवाही की मांग की है।
*ज्ञापन की मांग, अपमानजनक व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही*
हिंदू समाज ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में मांग की है कि संबंधित प्राचार्य बृजलाल को शासकीय सेवा से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाए। इसके अलावा, श्री बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों पर भी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
*समाज में अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता*
पद्मेश गौतम, जो कि सांसद प्रतिनिधि हैं ने संबंधित प्राचार्य की शिकायत की थी। इसके बाद, भीम आर्मी के कुछ तथाकथित अराजक तत्वों ने पद्मेश गौतम के पोस्टर और उनके छाया चित्र के साथ अपमानजनक और अश्लील व्यवहार किया। ज्ञापन में इन सभी अराजक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर और दंडात्मक कार्यवाही की मांग की गई है।
*प्रशासन की जिम्मेदारी और कर्तव्य*
हिंदू समाज ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह इस प्रकार की घटनाओं का संज्ञान लेकर त्वरित और सख्त कार्यवाही करे। यदि प्रशासन इस पर उचित और त्वरित कार्यवाही नहीं करता है, तो समस्त सनातनी हिंदू समाज प्रदेश और देशभर में आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
*समस्त हिन्दू समुदाय हुआ एकत्रित*
सनातन संस्कृति पर हो रहे हमले न केवल धार्मिक मुद्दे हैं, बल्कि ये राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हैं।
*कठोर कार्यवाही की आवश्यकता*
ऐसी घटनाओं के खिलाफ कानूनी उपायों का सहारा लेना जरूरी है ताकि समाज में एक संदेश जाए कि धर्म, संस्कृति और आस्था का अपमान किसी भी प्रकार से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । ज्ञापन में हिंदू समाज ने प्रशासन से मांग की है कि वह खुद ऐसी घटनाओं पर संज्ञान लेकर कार्यवाही करे ।
*जनआंदोलन की संभावना और सरकार की जवाबदेही*
ज्ञापन में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि प्रशासन ने इस पर तत्काल कार्यवाही नहीं की, तो पूरे मध्य प्रदेश और भारत में व्यापक आंदोलन किए जाएंगे । ऐसे आंदोलनों की स्थिति में होने वाली अव्यवस्था और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं की जवाबदेही शासन और प्रशासन की होगी। ज्ञापन में उल्लेख है कि सनातन संस्कृति और उसके अनुयायियों की रक्षा के लिए प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही की जाए।



