धार्मिकमध्य प्रदेश

तुम अर्जी करो, मर्जी करें मैया जानकी, लाखों श्रृध्दालु रंगपंचमी को अर्जी लगाने पहुंचे करीला धाम

रिपोर्टर : कुंदन लाल चौरसिया
गौरझामर । आस्था का जन सैलाब रंगपंचमी के दिन शक्ति की भक्ति के पावन करीला धाम मे देखने को मिला जहां लाखों भक्तो ने माता जानकी के श्रीचरणो मे पूरी शिद्दत के साथ अपनी अपनी अर्जी लगाकर मनौती मांगी और जिनकी माता ने दिल से मांगी गई मुराद पूरी की उन्होने माता के दरबार मे बधाव कराया। बेडनियां का नाच कराया निछावर दी इस बार गौरझामर क्षेत्र से भी हजारो की संख्या में श्रृध्दालु मनोती लेकर अपने अपने यातायात संसाधनो से करीलाधाम पहुंचे श्रृध्दालुओ ने हमारे प्रतिनिधि को बताया की दशको से रंगपंचमी पर प्रतिवर्ष लगने वाले अशोकनगर जिले के करीला धाम मे वार्षिक मेले में पूरे भारतवर्ष से लाखो की संख्या मे भक्तजन बडे ही उत्साह उमंग के साथ पहुंचते है जहां पर महाकुम्भ जैसा नजारा बन जाता है दूर दूर तक केवल वाहन ही वाहन दिखलाई देते है मेले मे शासन प्रशासन व्दारा मेलार्थियो की सुख सुविधा हेतु योजनाबध्द तरीके से मूलभूत सुविधाओ की तरफ कोई ध्यान नही दिया जाता, परिणाम स्वरुप मेला परिसर मे गंदगी दुर्गंध आदि होने से लोगो को भोजन बाटी भर्ता बनाना व खाना चुनौती भरा होता है। बता दे की हर वर्ष केवल पुलिस के ही डंडे बरसते दिखाई देते है मेले मे महिलाये पुरुष बच्चे सभी सबसे ज्यादा पहुंचते है जहां पर शासन प्रशासन व्दारा एक भी छाया दार पेड नही लगाया लोग भीषण गरमी से बचने के लिये छाया की खोज में यहां वहां भटकते रहते है पीने नहाने के पानी की किल्लत से लोग हलाकान देखे गये वह तो आसपास के किसानो की भलमनसाहत की सराहना की जानी चाहिए जो लोगो को निशुल्क पानी की व्यवस्था हेतु अपनी अपनी पानी की बिधुत मोटरे नलकूप आदि चालू करके पुण्य लाभ कमा लेते है करीला धाम पहाडी पर स्थित होने के कारण पूरे पहाडी इलाके में करोदा छोटी जंगली बेरी आदि के पेड ही बहुतायत पाये जाते है जिनमे कांटे अत्याधिक होने से यात्रियो को खतरनाक व नुकसानदेह होते है पूरे मेला परिसर को श्रृध्दालुओ के अनूकूल बनाने की आवश्यकता है लोग कहते की जब मेला प्रशासन दूकानदारो से करोडो रुपये टैक्स हर साल बसूलता है तो वह राशि मेला व्यवस्था मे क्यो नही व्यय की जाती ,मंदिर परिसर जहां पर नर्तकीयां नृत्य करती है वहां पर कोई व्यवस्था नही की जाती गोल गोल व नुकीले पत्थरो कंकंडीली मुरमीली उबड खाबड ऊंची नीची भूमि पर नृत्य करना बेहद दुखद व अमानवीय है प्रशासन ने उक्त परिसर पर समतलीकरण के लिये रोलर चलाने की व्यवस्था नही की, बारहमासी तालाब नही बनाये, पूरी पहाडी पर सदाबहार छायादार पेड नही लगाये जो शासन प्रशासन भृष्ट नीति को उजागर करता है हर साल बढते मेले की भीड को ध्यान मे रखते हुए शासन प्रशासन को व्यवस्था करना चाहिए।

Related Articles

Back to top button