मुरवारी पंचायत में लबें समय से जमे सचिव को कटनी जिले के बाहर स्थानांतरण हो

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान | भारतीय लोकतंत्र की आत्मा ग्राम पंचायतों में बसती है । यहीं से प्रशासन की जड़ें मजबूत होती हैं और आम जनता को शासन की योजनाओं का लाभ मिल पाता है ।किंतु जब कोई अधिकारी या कर्मचारी एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ रहता है, तो व्यवस्था में निष्पक्षता, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल उठने लगते हैं । ऐसा ही एक मामला है सामने आया है ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मुरवारी में पदस्थ सचिव बशरूलहक मंसूरी का, जो विगत तीन वर्षों से अधिक समय से इस ग्राम पंचायत में कार्यरत हैं । अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि इनका स्थानांतरण कटनी जिले के बाहर किया जाए ।
*तीन वर्ष की सीमा के बाद भी ग्राम पंचायत मुरवारी में तैनाती एक गंभीर प्रश्न*
मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थानांतरण नीति स्पष्ट रूप से बताती है कि किसी भी कर्मचारी को सामान्यत: तीन वर्षों से अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं रखा जाना चाहिए । यह नीति इसलिए बनाई गई है ताकि कोई भी कर्मचारी किसी क्षेत्र विशेष में व्यक्तिगत हित स्थापित न कर सके और प्रशासनिक कार्यों में निष्पक्षता बनी रहे । लेकिन सचिव बशरूलहक मंसूरी की मुरवारी में अब तक की तैनाती इस नीति का उल्लंघन प्रतीत होती है । सचिव बशरूलहक मंसूरी का मुरवारी में अंगद के पैर की तरह जमे रहना कई प्रकार की शंकाओं को जन्म देता है क्या वे किसी राजनीतिक संरक्षण का लाभ ले रहे हैं? क्या स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से स्थानांतरण टाला जा रहा है? और सबसे महत्वपूर्ण क्या आम जनता को इसके कारण किसी प्रकार की कठिनाई हो रही है?
*स्थानीय ग्रामीणों की नाराजगी और असंतोष*
ग्राम पंचायत मुरवारी के स्थानीय निवासी अब खुले तौर पर यह कहने लगे हैं कि मुरवारी सचिव बशरूलहक मंसूरी की लंबी तैनाती के कारण पंचायत स्तर पर कार्यों में पारदर्शिता नहीं है । उनके ऊपर आरोप हैं कि निर्माण कार्यों, मनरेगा जैसी योजनाओं में नियमों की अनदेखी । पक्षपातपूर्ण रवैया, लाभार्थियों का चयन करते समय अपने करीबी लोगों को प्राथमिकता देना । फॉर्मल कार्यवाही करने के बजाय टालमटोल किया जाता है । जब एक कर्मचारी अपने पद का उपयोग जनहित से अधिक व्यक्तिगत लाभ के लिए करने लगे, तो उसकी उपस्थिति उस क्षेत्र के विकास में बाधा बन जाती है।
*स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका और चुप्पी*ग्राम पंचायत मुरवारी में बशरूलहक मंसूरी की लंबी पदस्थापना, कटनी जिले के बाहर होना चाहिए स्थानांतरण
उमरियापान | भारतीय लोकतंत्र की आत्मा ग्राम पंचायतों में बसती है। यहीं से प्रशासन की जड़ें मजबूत होती हैं और आम जनता को शासन की योजनाओं का लाभ मिल पाता है।किंतु जब कोई अधिकारी या कर्मचारी एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ रहता है, तो व्यवस्था में निष्पक्षता, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल उठने लगते हैं।ऐसा ही एक मामला है ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मुरवारी में पदस्थ बशरूलहक मंसूरी का, जो विगत तीन वर्षों से अधिक समय से इस ग्राम पंचायत में कार्यरत हैं। अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि इनका स्थानांतरण कटनी जिले के बाहर किया जाए।
*तीन वर्ष की सीमा के बाद भी ग्राम पंचायत मुरवारी में तैनाती एक गंभीर प्रश्न*
मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थानांतरण नीति स्पष्ट रूप से बताती है कि किसी भी कर्मचारी को सामान्यत: तीन वर्षों से अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं रखा जाना चाहिए। यह नीति इसलिए बनाई गई है ताकि कोई भी कर्मचारी किसी क्षेत्र विशेष में व्यक्तिगत हित स्थापित न कर सके और प्रशासनिक कार्यों में निष्पक्षता बनी रहे। परंतु बशरूलहक मंसूरी की मुरवारी में अब तक की तैनाती इस नीति का उल्लंघन प्रतीत होती है।बशरूलहक मंसूरी का मुरवारी में अंगद के पैर की तरह जमे रहना कई प्रकार की शंकाओं को जन्म देता है क्या वे किसी राजनीतिक संरक्षण का लाभ ले रहे हैं? क्या स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से स्थानांतरण टाला जा रहा है? और सबसे महत्वपूर्ण क्या आम जनता को इसके कारण किसी प्रकार की कठिनाई हो रही है?
*स्थानीय ग्रामीणों की नाराजगी और असंतोष*
ग्राम पंचायत मुरवारी के स्थानीय निवासी अब खुले तौर पर यह कहने लगे हैं कि बशरूलहक मंसूरी की लंबी तैनाती के कारण पंचायत स्तर पर कार्यों में पारदर्शिता नहीं है। उनके ऊपर आरोप हैं कि निर्माण कार्यों, मनरेगा जैसी योजनाओं में नियमों की अनदेखी। पक्षपातपूर्ण रवैया, लाभार्थियों का चयन करते समय अपने करीबी लोगों को प्राथमिकता देना। जनसुनवाई की अनदेखी, कई बार ग्रामीणों की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता, फॉर्मल कार्यवाही करने के बजाय टालमटोल किया जाता है। भ्रष्टाचार के आरोप, कुछ ग्रामीणों द्वारा यह आरोप भी लगाए गए कि बिना लेन-देन के कोई कार्य संपन्न नहीं होता। जब एक कर्मचारी अपने पद का उपयोग जनहित से अधिक व्यक्तिगत लाभ के लिए करने लगे, तो उसकी उपस्थिति उस क्षेत्र के विकास में बाधा बन जाती है।
*स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका और चुप्पी*
यह भी चिंतन का विषय है कि जनपद स्तर के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मुखर क्यों नहीं हैं? क्या वे किसी दबाव में हैं या स्वयं भी इस स्थायित्व के पीछे किसी लाभ की आशा कर रहे हैं? बशरूलहक मंसूरी की लंबी तैनाती कहीं स्थानीय स्तर पर गठजोड़ की ओर संकेत तो नहीं करती? यदि ग्राम पंचायतों में ऐसे गठजोड़ बनते हैं, तो यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है और गरीब, अशिक्षित ग्रामीण जनता के अधिकारों का हनन करता है।
*स्थानांतरण की आवश्यकता जनहित में निर्णय*
बशरूलहक मंसूरी का स्थानांतरण अब केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं बल्कि जनहित का मुद्दा बन गया है। नए कर्मचारी के आने से कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। ग्रामीणों को विश्वास होगा कि शासन उनकी बात सुनता है। शासन की निर्धारित नीति के अनुसार कार्य करना प्रशासन की विश्वसनीयता बढ़ाता है।
*कटनी जिले के बाहर स्थानांतरण जरूरी*
यदि बशरूलहक मंसूरी को केवल मुरवारी से हटाकर कटनी जिले के किसी अन्य ग्राम में तैनात किया जाता है, तो यह स्थिति जस की तस रह सकती है। जिले के भीतर स्थानांतरण से उनके पुराने संबंध और प्रभाव क्षेत्र बने रहेंगे। पुराने नेटवर्क का प्रभाव कम होगा। नवीन स्थान पर नई जिम्मेदारियों के साथ कार्यप्रणाली में बदलाव आएगा। निष्पक्ष और स्वतंत्र कार्य प्रणाली स्थापित होगी। ग्राम पंचायत मुरवारी के कुछ जागरूक नागरिकों ने यह स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि शीघ्र ही बशरूलहक मंसूरी का स्थानांतरण नहीं किया गया, तो वे जन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे ।
यह भी चिंतन का विषय है कि जनपद स्तर के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मुखर क्यों नहीं हैं? क्या वे किसी दबाव में हैं या स्वयं भी इस स्थायित्व के पीछे किसी लाभ की आशा कर रहे हैं? बशरूलहक मंसूरी की लंबी तैनाती कहीं स्थानीय स्तर पर गठजोड़ की ओर संकेत तो नहीं करती? यदि ग्राम पंचायतों में ऐसे गठजोड़ बनते हैं, तो यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है और गरीब, अशिक्षित ग्रामीण जनता के अधिकारों का हनन करता है।
*स्थानांतरण की आवश्यकता जनहित में निर्णय*
मुरवारी सचिव बशरूलहक मंसूरी का स्थानांतरण अब केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं बल्कि जनहित का मुद्दा बन गया है । नए कर्मचारी के आने से कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी । ग्रामीणों को विश्वास होगा कि शासन उनकी बात सुनेगा ।
*कटनी जिले के बाहर स्थानांतरण जरूरी*
मुरवारी सचिव बशरूलहक मंसूरी लंबे समय से पदस्थ हैं इस कारण से पंचायत में खुल कर अनिमित्ता कर रहे हैं । इनको मुरवारी पंचायत से हटाकर कटनी जिले के किसी अन्य ग्राम पंचायत में तैनात किया जाए । जिले के भीतर स्थानांतरण से उनके पुराने संबंध और प्रभाव क्षेत्र बने रहेंगे । पुराने नेटवर्क का प्रभाव कम होगा । निष्पक्ष और स्वतंत्र कार्य प्रणाली स्थापित होगी । ग्राम पंचायत मुरवारी स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर से आग्रह किया है कि लंबे समय से पदस्थ मुरवारी सचिव बशरूलहक मंसूरी का स्थानांतरण कटनी जिले से बाहर किया जाए।



