धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार , 28 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 28 फ़रवरी 2025
आप सभी सनातियों को “फाल्गुन कृष्ण अमावस्या” की हार्दिक शुभकामनाएं
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 03:16 AM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र शतभिषा 01:40 PM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है, तथा शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुणदेव जी है।
⚜️ योग – सिद्ध योग 08:07 PM तक, उसके बाद साध्य योग
प्रथम करण : किंस्तुघ्न – 04:47 पी एम तक
द्वितीय करण : बव – 03:16 ए एम, मार्च 01 तक बालव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:17:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:43:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:08 ए एम से 05:57 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:32 ए एम से 06:47 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:11 पी एम से 12:57 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:29 पी एम से 03:15 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:18 पी एम से 06:43 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:20 पी एम से 07:35 पी एम
💧 अमृत काल : 07:05 ए एम से 08:33 ए एम 04:08 ए एम, मार्च 01 से 05:35 ए एम, मार्च 01
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, मार्च 01 से 12:58 ए एम, मार्च 01
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र की पत्नी को सौभाग्य सामग्री भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – चंद्रदर्शन/त्रिपुष्कर योग/ पंचक जारी/ अमावस्या समाप्ति सुबह 06.14/ (स्वतंत्रता सेनानी, विधिवेत्ता, प्रथम राष्ट्रपति-भारत) डॉ राजेंद्र प्रसाद जयन्ती, कमला नेहरू, जवाहर लाल नेहरू की पत्नी जयन्ती, प्रसिद्ध संगीतकार रवीन्द्र जैन जन्म दिवस, प्रसिद्ध संगीतकार ओ. पी. नैय्यर स्मृति दिवस, प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता सोहराब मोदी पुण्य तिथि, भारतीय राजनेता अरुण जेटली जन्म दिवस, जयेंद्र सरस्वती शंकराचार्य पुण्य तिथि, महाराणा प्रताप के पिता राणा उदयसिंह पुण्य तिथि, प्रसिद्ध कवि लेखक पंडित नरेंद्र शर्मा जन्म दिवस, दुर्लभ रोग दिवस, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu Tips_ 🗽
वास्तु शास्त्र में कल आपने आचार्य श्री गोपी राम से जाना था घर से सूखे हुए फूलों को हटाने के बारे में और आज भी हम उसी कड़ी में आगे बात करेंगे। घर में रखे सूखे फूल शव की तरह होते हैं। जैसे घर में शव नहीं रखा जाता है, वैसे ही सूखे फूल भी घर में नहीं रखने चाहिए। सुप्रसिद्ध तंत्र ग्रंथ ‘मंत्र महार्णव’ में कहा गया है कि भगवान को चढ़ाए हुए सभी पुष्प तत्काल निर्मालय हो जाते हैं।
उसी में आगे बताया गया है कि निर्मालयों को तत्काल हटा देना चाहिए, वरना उसके भोग के लिए चण्डाली, चण्डांशु और विश्वकसेन जैसी निगेटिव शक्तियों के आने की बात कही गयी है। आजकल सुखाए हुए पोट पोरी के फूलों को रखने का फैशन है, लेकिन आपको बता दूं कि आप नकली फूल लगा लें वो बेहतर है, परन्तु पोट पोरी के फूल विष के समान है। अतः सदा ताजे फूलों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
🔹 क्या न खायें : कड़वे, कसैले तीखे, रूखे-सूखे पदार्थ, जौ, ज्वार, मूँग, अरहर, करेला, मेथीदाना, सहजन, शहद, त्रिफला, हरड़, गोमूत्र आदि न लें ।
🔹क्या खायें : मधुर व स्निग्ध पदार्थ, जैसे देशी गाय या भैंस का दूध-घी, मक्खन, ताजा मीठा दही, गेहूँ, दालें, चावल, उड़द, चने, लाल चौलाई, शकरकंद, चुकंदर, मूँगफली, गोंद, तिल, फलों में आम, केला, चीकू, सीताफल, सेवफल, नारियल, खजूर, बादाम, काजू, अखरोट, अंजीर, मखाना आदि सूखे मेवे ।
🔹क्या न करें : अधिक उपवास, भुखमरी, चिंता, शोक, भय, व्यथा, अति मानसिक परिश्रम, क्षमता से अधिक कार्य, व्यायाम व प्राणायाम, रात्रि जागरण, व्यसन, हस्तमैथुन, पति-पत्नी के अधिक व्यवहार, अजीर्ण, कब्ज आदि से बचें ।
🍂 आरोग्य संजीवनी
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भृंगराज के तेल को बालों में रेगुलर लगाने से जड़ें मजबूत होती हैं. ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. केराटिन का उत्पादन बढ़ता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-फंगल गुण सिर की त्वचा को संक्रमण से बचाते हैं. डैंड्रफ से छुटकारा दिलाते हैं.बुजुर्ग आज भी भृंगराज के पत्तों को पीसकर लेप बनाते हैं और बालों में लगाते हैं. शहरों में लोग इसके तेल को महंगे ब्रांड्स से खरीदते हैं.
आप चाहें तो आसानी से घर पर भी भृंगराज का तेल तैयार कर सकते हैं. इसके लिए नारियल या सरसों तेल में भृंगराज की कुछ पत्तियों को उबालें. इससे इसका सार तेल में समा जाता है. बालों के अलावा, यह पौधा शरीर के आंतरिक स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही गुणकारी है.
भृंगराज का रस या कैप्सूल लिवर को डिटॉक्सिफाई करने में कारगर है. यह पित्त के स्राव को संतुलित करता है. फैटी लिवर, पीलिया जैसे रोगों में राहत देता है. शोध के अनुसार, इसमें मौजूद ‘वेडेलोलैक्टोन’ नाम का कम्पाउंड लिवर सेल्स के पुनर्जनन में मदद करता है.
🌷 गुरु भक्ति योग 🌹
नारद, संत, विष्णु भक्त होने पर बहुत गर्व करते थे। एक बार “नारायण नारायण” का जप करते हुए पृथ्वी पर भटकते हुए, उन्होंने विश्वास करना शुरू कर दिया कि वह केवल वही हैं जो नारायण की देखभाल और पूजा करते हैं, जबकि बाकी लोग अधिक रुचि रखते हैं। उनकी दिन-प्रतिदिन की छोटी-छोटी बातें।
अगली बार जब वह नारायण की पूजा करने आए, तो भगवान विष्णु ने पूछा कि क्या नारद के पास प्रसव कराने में मदद करने के लिए थोड़ा समय है। नारद ने गर्व के साथ छलांग लगाई और पूछा कि उन्हें क्या देना है।
भगवान विष्णु ने नारद को एक बार कीमती तेल से भरा मिट्टी का दीपक पकड़े हुए और कीमती तेल गिराए बिना दीपक को वापस लाना सुनिश्चित करते हुए पृथ्वी की परिक्रमा करने को कहा।
अगले दिन सुबह नारद पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े और दिन के अंत में एक भी बूंद गिराए बिना कीमती तेल के दीपक को वापस ले आए।
स्पष्ट रूप से नारद मुस्कुरा रहे थे क्योंकि उन्हें इस कार्य के लिए नारायण द्वारा चुना गया था और उन्होंने तेल की एक बूंद खोए बिना कार्य पूरा किया।
नारायण ने नारद को अगले दिन “जग्गा दास” नामक एक गरीब किसान से मिलने और यह देखने के लिए कहा कि वह क्या कर रहा है और जग्गा की दैनिक गतिविधियों की रिपोर्ट करें। अपनी भक्ति के अहंकार से भरे भगवान की भक्ति के साथ, नारद अगले दिन सुबह देखने के लिए निकल पड़े जग्गा दास।
जग्गा दास सुबह उठा, अपनी सुबह की गतिविधियों को समाप्त किया, जानवर को खिलाया, और सुबह का नाश्ता किया और खेतों पर काम करने के लिए निकल गया। दिन में ज्यादातर वह खेत में काम करता था, शाम को वापस आता था, जानवर को खिलाता था , और दिन के लिए सोने से पहले देर रात का खाना खाया। बिस्तर पर जाने से पहले, उन्होंने कहा “हे भगवान, कृपया मेरा नमस्कार स्वीकार करें”। इसके साथ ही जैसे ही उनका शरीर बिस्तर को छुआ, उन्होंने खर्राटे लेना शुरू कर दिया।
जग्गा दास के सेवानिवृत्त होने के बाद, नारद वैकुंठ के लिए रवाना हुए और भगवान को उस दिन का वर्णन किया।
नारद भगवान से नाराज़ थे क्योंकि भगवान ने उन्हें एक ऐसे व्यक्ति का निरीक्षण करने के लिए कहा था जो मानते थे कि नारद एक गुण से रहित है जो सभी भक्तों के लिए सामान्य हो सकता है और वह भगवान के लिए सम्मान था। चूंकि जग्गा दास ने पूरे समय के दौरान उनका नाम नहीं लिया था। अगले दिन, नारद को विश्वास हो गया कि जग्गा दास सीधे नरक जा रहे हैं।
नारद द्वारा जग्गा दास के दयनीय वर्णन को सुनने के बाद, भगवान ने नारद से पूछा कि वह जग्गा दास पर इतना पागल क्यों थे। निश्चित रूप से यह जग्गा दास के साथ केवल एक बार भगवान का नाम लेने के लिए था और वह भी दिन के लिए सेवानिवृत्त होने से पहले। इस समय भगवान नारद ने नारद से पूछा कि नारद ने कितनी बार दीपक लेकर पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए भगवान का नाम लिया। बेशक, नारद के पास एक अच्छा बहाना था कि उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि दीपक को कीमती तेल के साथ एक बूंद खोए बिना वापस लाना सुनिश्चित करें। जबकि पर इतना महत्वपूर्ण मिशन, उनसे प्रभु का नाम लेने की उम्मीद नहीं की जा सकती थी।
इस समय भगवान ने एक बड़ी मुस्कान के साथ कहा “हे ऋषि नारद, आपने एक दीपक से पृथ्वी की परिक्रमा की, जबकि बेचारा जग्गा दास 365 दिनों से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है, जिसमें कई दीपक अपने परिवार, जानवरों और समुदाय को खिला रहे हैं। फिर भी, जग्गा दास के पास एक बार मेरा नाम लेने का समय था जबकि आपके पास एक बार भी मेरा नाम लेने का समय नहीं था। इसके साथ उन्होंने नारद और मानवता के प्रति अपने पूरे प्रेम के साथ कहा
“न अहम् थिथामि वैकुंठे, योगिनाम हृदये न च मुद् भक्त यात्रा गायन्ति, तत्र थिथामी नारद”।
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।

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