गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कल, जानें मुहूर्त, पूजा-विधि व उपाय, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या करें और क्या नहीं?
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कल, जानें मुहूर्त, पूजा-विधि व उपाय, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या करें और क्या नहीं? जानें क्या है सही नियम
🔘 *_HIGHLIGHTS_*
🔹 *_सनातन धर्म में गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है।_*
🔹 *_यह दिन पूरी तरह से गणेश जी को समर्पित है।_*
🔹 चतुर्थी के दिन गणेश पूजा का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
👉🏼 हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस शुभ असवर पर भगवान गणेश की उपासना की जाती है। साथ ही जीवन के संकटों को दूर करने के लिए व्रत भी किया जाता है। मान्यता है कि गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से जातक को गणपति बप्पा की कृपा प्राप्त होती है। आइए आचार्य श्री गोपी राम के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि मार्गशीर्ष माह में मनाई जाने वाली गणाधिप संकष्टी चतुर्थी की डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।
⚛️ *गणाधिप संकष्टी 2024 चतुर्थी मुहूर्त_*
मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 18 नवंबर, शाम 06 बजकर 55 मिनट से शुरू हो रही है, जो अगले दिन यानी 19 नवंबर दोपहर को शाम 05 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत 18 नवंबर को किया जाएगा। इस दिन शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। ऐसे में चन्द्रोदय शाम 07 बजकर 34 मिनट पर होगा।
☄️ *_ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजे से 05 बजकर 53 मिनट तक_*
✡️ *_विजय मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 53 मिनट से 02 बजकर 35 मिनट तक_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 26 मिनट से 05 बजकर 53 मिनट तक_*
🕰️ *_अशुभ समय_*
🤖 *_राहुकाल – सुबह 08 बजकर 06 मिनट से 09 बजकर 26 मिनट तक।_*
🔥 *_गुलिक काल – सुबह 01 बजकर 29 मिनट से 02 बजकर 46 मिनट तक।_*
🧾 *गणाधिपा संकष्टी चतुर्थी 2024: पूजा विधि*
सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें और पूजा अनुष्ठान शुरू करें। भक्तों को घर और पूजा कक्ष को साफ करना चाहिए और संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने का संकल्प लेना चाहिए। भगवान गणेश की मूर्ति रखें और मूर्ति के सामने दीया जलाएं। मूर्ति को माला पहनाएं और तिलक लगाएं। भगवान को लड्डू और दूर्वा घास अर्पित करें जो भगवान को अर्पित करने के लिए एक महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है। संकष्टी चतुर्थी की कथा और गणेश जी को समर्पित मंत्रों का पाठ करें। अंत में गणेश जी की आरती गाएं और आशीर्वाद लें। शाम को, चंद्रोदय के बाद, चंद्र देव को अर्घ्य दें और फिर अपना व्रत तोड़ें और सात्विक भोजन करें।
✍🏼 *_गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या करें_*
*_गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा विधि-विधान से करें._*
*_गणेश जी को मोदक, दूध, फल आदि अर्पित करें._*
*_संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखें और व्रत के दौरान एक समय भोजन करें._*
*_गणेश मंत्र का जाप करें और गरीबों को दान करें._*
*_गणेश पुराण का पाठ करें._*
☝🏻 *_संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या नहीं करें:_*
👉🏼 *_लहसुन और प्याज: इस दिन लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए._*
👉🏼 *_मांसाहार: मांसाहार का सेवन भी वर्जित है._*
👉🏼 *_अनाज: कुछ लोग चावल का सेवन नहीं करते हैं._*
👉🏼 *_नकारात्मक विचार: नकारात्मक विचारों से दूर रहें._*
👉🏼 *_झूठ बोलना: झूठ बोलने से बचें._*
किसी को दुःख ना दें: किसी को दुख देकर कष्ट न दें.
💁🏻♀️ *_संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या खाएं:_*
फल, दूध, दही, कुट्टू का आटा, साबूदाना, सिंघाड़ा, मखाना,
🙇🏻♀️ *पूजा विधि*
स्नान और संकल्प करें- व्रत करने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
गणेश जी की स्थापना- घर के पूजा स्थल पर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। मंत्र जाप और पूजा- गणेश जी के मंत्र “ॐ गण गणपतये नमः” का जाप करें। गणेश जी की प्रतिमा पर फूल, धूप, दीप, रोली, और अक्षत अर्पित करें।
भोग और प्रसाद- गणेश जी को मोदक, लड्डू, या कोई अन्य मिठाई का भोग लगाएं।
चंद्र दर्शन- रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा का समापन करें। इसके बाद व्रत खोलें।
💁🏻 उपवास के समय सावधानी
▪️ संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन लहसुन, प्याज या किसी अन्य तामसिक भोजन से बचें। संभव हो तो केवल फलाहार करें या दूध और अन्य सात्विक आहार का सेवन करें।
▪️ व्रत के दौरान भगवान गणेश की कहानियां सुनें और उनके भजनों का पाठ करें।
▪️ धार्मिक कथाओं के अनुसार मान्यता है किगणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से जीवन में सुख-शांति आती है। वहीं गणेश भगवान की कृपा से सभी कार्य सफल होते हैं। इसलिए इस दिन पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान गणेश की आराधना करें।
🤷🏻 *गणाधिपा संकष्टी चतुर्थी 2024: महत्व*
संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की पूजा करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है क्योंकि चतुर्थी तिथि भगवान गणपति जी को समर्पित है। यह दिन सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है जब भगवान गणेश के भक्त उनकी पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद मांगते हैं। भगवान गणेश हिंदू धर्म में सबसे प्रिय और सबसे पहले पूजे जाने वाले देवताओं में से एक हैं। उनकी पूजा किए बिना कोई भी शुभ कार्य या पूजा अनुष्ठान नहीं किया जाता है, इसलिए सभी पूजा अनुष्ठान और शुभ कार्य शुरू करने से पहले उनकी पूजा करना महत्वपूर्ण है।



