धार्मिक

7 सितंबर 2024 को गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म व इन्द्र योग, मूर्ति स्थापना करते समय दिशा का रखें ध्यान

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री लक्ष्मी
⚜▬▬ஜ✵❀ श्री हरि: ❀✵ஜ▬▬⚜
🔮 07 सितंबर 2024 को गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म व इन्द्र योग, मूर्ति स्थापना करते समय दिशा का रखें ध्यान
🔮 HIGHLIGHTS
♦️ गणेश चतुर्थी का उत्सव देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है।
♦️ गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से मूर्ति की स्थापना करना चाहिए।
♦️ हर साल भाद्रपद महीने में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है।
🫅🏻 भगवान गणेश के जन्म के रूप में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। भगवान गणेश एक पूजनीय देवता हैं। जिन्हें ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य से जोड़ा गया है। भगवान गणेश को गजानन, धूम्रकेतु, एकदंत, वक्रतुंड और सिद्धि विनायक समेत कई नामों से जाना जाता है। पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल की चतुर्थी से देशभर में गणेश चतुर्थी पर्व का शुभारंभ हो जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से 10 दिनों तक चलता है। इस दौरान भक्त बप्पा को अपने घर लाते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की विदाई करते हैं।
इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत 7 सितंबर से होगी। इसका समापन अनंत चतुर्दशी के दिन 17 सितंबर को होगा। वैसे तो यह पर्व पूरे भारत में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन खासतौर से इसकी धूम महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मिलती है। गणेश उत्सव को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
📅 गणेश चतुर्थी तिथि का आरंभ
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, गणेश चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 सितंबर को दोपहर में 3 बजकर 2 मिनट से पर आरंभ होगी। चतुर्थी तिथि का समापन 7 सितंबर को शाम में शाम 5 बजकर 38 मिनट पर। शास्त्रों के विधान के अनुसार, उदया तिथि के हिसाब से गणेश चतुर्थी का व्रत और गणेशजी की स्थापना 7 सितंबर को की जाएगी।
💮 गणेश चतुर्थी मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त

🌟 अभिजित मुहूर्त का समय सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर में 12 बजकर 44 मिनट तक।
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर में 12 बजकर 34 मिनट तक।
💥 शुभ चौघड़िया का समय सुबह 8 बजे से 9 बजकर 33 मिनट तक।
☀️ चल चौघड़िया का समय दोपहर में 12 बजकर 38 मिनट से 2 बजकर 11 मिनट तक।
⚛️ गणेश चतुर्थी मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त
07 सितंबर को गणेश चतुर्थी की पूजा और मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 2 मिनट से लेकर दोपहर के 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त में बप्पा को स्थापित करना शुभ होगा। बता दें कि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक है।
💫 रवि और ब्रह्म योग में होगी गणेश चतुर्थी पूजा

इस साल गणेश चतुर्थी की पूजा रवि और ब्रह्म योग में होगी. चतुर्थी के दिन रवि योग सुबह 06:02 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक है, वहीं ब्रह्म योग सुबह से लेकर रात 11:17 बजे तक है.
🌙 गणेश चतुर्थी पर न देखें चंद्रमा
गणेश चतुर्थी के दिन भाद्रपद की विनायक चतुर्थी है. इस दिन आपको चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए. यदि आप ऐसा करते हैं तो आप पर झूठा कलंक लग सकता है. भगवान श्रीकृष्ण पर मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था. इसकी कथा चतुर्थी से जुड़ी है.
👉🏽 इस समय में भूलकर भी न करें गणेशजी की मूर्ति की स्थापना
राहुकाल में गणेशजी की मूर्ति स्थापना भूलकर भी न करें। राहुकाल में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित है। 7 सितंबर शनिवार के दिन राहुकाल का समय सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक।
🍱 मूर्ति स्थापना के लिए आवश्यक पूजा सामग्री
🔜 भगवान गणेश को विराजित करने के लिए चौरंगा या पाटा और रखने के लिए वस्त्र।
🔜 पूजा के लिए आवश्यक सामग्री हैं निरंजन, धूप, समई, कपूर और आरती की थाली।
🔜 पांच फल, सुपारी, नारियल, पान के पत्ते, सूखा नारियल, गुड़ और कुछ सिक्के।
🔜 पूजा स्थल पर रखने के लिए क्लश, जल और आम के पत्ते।
🔜 भगवान गणेश की मूर्ति को सजाने के लिए लाल फूल और दूर्वा का उपयोग किया जाता है।
🔜 अभिषेक के लिए पंचामृत, सुगंधित जल, शुद्ध जल, अष्टगंध, हल्दी, कुंकुम और अक्षत।
🗞️ गणेश चतुर्थी व्रत व पूजन विधि
🔸 गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर भगवान गणेश का ध्यान करें। इसके बाद घर की साफ-सफाई करें। गणपति की मूर्ति स्थापना के लिए मंडप सजाएं। इसके लिए पुष्प, रंगोली और दीपक का इस्तेमाल करें।
🔸इसके बाद कलश में गंगाजल, रोली, अक्षत, कुछ सिक्के और एक आम का पत्ता डालकर मंडप में रखें। अब एक चौकी में साफ कपड़ा बिछाएं और लंबोदर की मूर्ति स्थापित करें।
🔸 मूर्ति स्थापना के बाद तीन बार आचमन करें। फिर पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद घी का दीपक जलाएं। साथ ही भगवान गणेश को वस्त्र, जनेऊ, चंदन, सुपारी, फल और फूल अर्पित करें। 21 दूर्वा चढ़ाएं और उनके प्रिय मोदक का भोग लगाएं। आखिरी में सभी लोग गणेश जी की आरती करें।
💁🏻‍♀️ गणेश चतुर्थी का महत्व

भगवान गणेश को सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करने वाले माना जाता है. इस दिन उनकी पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सफलता मिलती है. गणेश चतुर्थी को नए कार्यों की शुरुआत करने के लिए शुभ माना जाता है. भगवान गणेश को ज्ञान और बुद्धि के देवता माना जाता है. इस दिन उनकी पूजा करने से बुद्धि में वृद्धि होती है. गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. यह पर्व लोगों को एक साथ लाता है और सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है. गणेश चतुर्थी के पीछे कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं जो इस पर्व को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती हैं.
📖 भगवान गणेश से जुड़ी कथाएं_
एक बार माता पार्वती स्नान करने के लिए जा रही थीं। उन्होंने अपने शरीर के मैल से एक पुतला निर्मित किया और उसमें प्राण फूंक दिए। फिर उसे घर की रक्षा के लिए द्वारपाल नियुक्त किया। ये द्वारपाल गजानन थे। गृह में प्रवेश के लिए उन्होंने भगवान शिवजी को रोक दिया। नारज होकर महादेव ने उनका मस्तक काट दिया।
जब पार्वती जी को इसका पता चला तो वह काफी दुखी हो गईं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए शिवजी ने गज का सर काटकर भगवान गणेश के धड़ पर जोड़ दिया। गज का सिर जुड़ने से उनका नाम गजानन पड़ गया।

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