24 दिसम्बर, साल 2025 की आखिरी विनायक चतुर्थी? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
श्री हरि नारायण
🔮 24 दिसम्बर, साल 2025 की आखिरी विनायक चतुर्थी? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
⭕ HEADLINES
🔹 हर माह की शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है विनायक चतुर्थी
🔸 24 दिसंबर को किया जाएगा विघ्नेश्वर चतुर्थी व्रत
🔹 साधक को मिलता है भगवान गणेश का आशीर्वाद
🔸 *गणेश जी की पूजा सभी देवी-देवताओं से पहले की जाती है। 👉🏼 हिंदू धर्म में हर व्रत और त्योहार का अपना अलग और विशेष महत्व होता है. पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश के लिए व्रत किया जाता है. यह व्रत बहुत लोकप्रिय है. पौष मास की चतुर्थी को भक्तिपूर्वक भगवान गणेश के विघ्नेश्वर स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन ब्राह्मणों को लड्डुओं का भोज कराकर दक्षिणा दी जाती है. इस व्रत का पालन करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है. ऐसा मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न के समय हुआ था, इसीलिये मध्याह्न काल को गणेश पूजन हेतु सर्वोत्तम माना जाता है. भगवान गणेश प्रथम पूज्य देवता हैं. जिनका हर धर्म-कर्म में सबसे पहले पूजन किया जाता है. 📆 *विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025 तिथि* विघ्नेश्वर चतुर्थी 24 दिसंबर, 2025 बुधवार को मनाई जाएगी
इस दिन पूजा दोपहर के समय की जाती है. चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त – 11:48 से 14:42 तक रहेगा.*
जिसकी अवधि – 02 घण्टे 54 मिनट्स* एक दिन पूर्व, वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – 17:12 से दिसम्बर 23 को 23:01 बजे तक रहेगा.*
इसकी कुल अवधि – 05 घण्टे 49 मिनट्स* वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – 09:29 से 23:32 अवधि – 14 घण्टे 02 मिनट्स इस दिन चतुर्थी तिथि की शुरुआत 23 दिसंबर, 2025 को शाम 17:12 बजे होगी. चतुर्थी तिथि समाप्त 24 दिसंबर, 2025 को शाम 18:11 बजे होगी. ✡️ शुभ योग और मुहूर्त
इस दिन विशेष रूप से वृद्धि और ध्रुव योग बन रहे हैं, जो पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।*
इसके अतिरिक्त, ब्रह्म मुहूर्त (04:31 से 05:18 बजे), विजय मुहूर्त (14:23 से 15:12 बजे), गोधूलि मुहूर्त (18:32 से 18:55 बजे) और निशिता मुहूर्त (23:55 से 00:41 बजे) भी विशेष महत्व रखते हैं।
🤷🏻♀️इस दिन चंद्रदर्शन है वर्जित
विघ्नेश्वर चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना अशुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठे कलंक या आरोप लगने का खतरा हो सकता है. विशेष समयावधि इस प्रकार है:
23 दिसंबर (व्रत से एक दिन पहले): दोपहर 12:12 बजे से रात 08:27 बजे तक*
24 दिसंबर (मुख्य व्रत का दिन): सुबह 10:16 बजे से रात 09:26 बजे तक
जहां तक संभव हो, इन समयों के दौरान चंद्रमा का दर्शन न करें.
🌝 चंद्र दर्शन दोष नियम
चतुर्थी पर चंद्रमा देखना वर्जित – अपमान का भय। यदि अनजाने में देख लिया:* पूजा स्थल पर फल/पानी गिरे तो चिंता न करें।
गणेश जी को अर्पित करें।
विघ्नेश्वर चतुर्थी पूजा विधि: स्टेप बाय स्टेप
संकल्प: “ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः…” गणेश जी विघ्नेश्वर स्वरूप पूजन।
📑 गणेश पूजा की सरल विधि
स्नान और शुद्धता: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा के समय मन और वातावरण दोनों को शुद्ध रखना आवश्यक है.
फोटो या मूर्ति स्थापना: घर के मंदिर में गणेश जी की मूर्ति को गंगाजल से साफ करें. उसके पास दीपक जलाएं और वातावरण को पवित्र बनाएं.
अभिषेक और तिलक: गणेश जी को हल्का जल अभिषेक करें. फिर लाल चंदन का तिलक लगाएं और सिंदूर अर्पित करें.
प्रिय वस्तुएं अर्पित करें: गणेश जी को 21 दूर्वा (घास) की गांठें चढ़ाएं. लाल फूल अर्पित करें. उन्हें मोदक या बेसन के लड्डू का भोग जरूर लगाएं, क्योंकि ये उनके प्रिय हैं.
मंत्र जाप और आरती: ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें. अंत में गणेश जी की आरती करें और भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें.
📖 व्रत कथा
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा में बाणासुर की कन्या उषा और भगवान श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के प्रेम प्रसंग का वर्णन है।
उषा ने अनिरुद्ध को अपने सपने में देखा और उनसे विवाह का संकल्प लिया। चित्रलेखा नामक अपनी सहेली के माध्यम से अनिरुद्ध का अपहरण कर लिया।
इस घटना से श्री कृष्ण जी और रुक्मिणी जी शोकाकुल हो गए। लोमश ऋषि ने उन्हें विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने की सलाह दी।
व्रत के प्रभाव से भगवान श्री कृष्ण ने बाणासुर को पराजित किया और अनिरुद्ध को मुक्त किया। इस कथा के श्रवण से सभी बाधाएं दूर होती हैं और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।

