लापरवाही की जीती-जागती मिसाल मिसाल बनी जीवन रक्षक 108 व जननी एक्सप्रेस

आमजन की शिकवा शिकायतें व स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी की फटकार बेअसर?
रिपोर्टर : विनोद साहू
बाड़ी । दिनांक 9.10 को रात्रि 12 बजे से 108 पर काल करने के बावजूद सुबह साठे पांच बजे परेशान होकर बुलाई प्रायवेट गाड़ी ।
रास्ते में हुआ प्रसव बामुश्किल बची जच्चा-बच्चा की जान ।
पूर्व में 18, जुलाई 2025 को इस 108 व जननी एक्सप्रेस की लापरवाही ने किबलाझिर की महिला की जान पर आ गई और शिशु की दुनिया देखने से पहले हुई मौत ।
रायसेन जिले में 108 जीवन रक्षक वाहन के संचालन में हो रही धांधली अब जच्चा-बच्चा की जानों से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रही। ताज़ा मामला बाड़ी थाने अंतर्गत आने वाले ग्राम डुंगरिया में महिला इमरती बाई पति चंदन सिंह धानक उम्र 24 वर्ष का प्रसव समय आने पर बहां की आशा कार्यकर्ता प्रीति धाकड़ ने रात बारह बजे से 108 डायल पर फोन लगाना शुरू किया लेकिन कभी आधा घंटे तो कभी एक घंटे में आने का कह कर जच्चा-बच्चा के परिवार व आशा कार्यकर्ता को गुमराह करते रहे जब प्रसव पीड़ा हद से ज्यादा होने लगी तब परिजनों ने बाड़ी में परिचित को फोन कर किराए की गाड़ी बुलाई और सुबह छह बजे के करीब रास्ते में डिलीवरी हो गई लेकिन डिलेवरी सुरक्षित न होने के कारण आधा गर्भ में और आधा बाहर हो गया सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर लाया गया जहां डां राहुल शर्मा की देखभाल में बॉर्ड नर्स ने नवजात शिशु की नाल काटकर सुरक्षित प्रसव कराया।
लेकिन सवाल इस बात का हैं कि जब 108 व जननी एक्सप्रेस समय पर नहीं मिलती तो इसके संचालन में हर माह करोड़ों रुपए खर्च करने का औचित्य क्या।
जबकि 108 वाहन अस्पताल परिसर में खड़ी रहती है लेकिन काल पर कभी भी समय पर नहीं पहुंचती।



