दशलक्षण महापर्व पर सांगानेर के पंडित श्री आदीश जैन के मुखारविंद से हो रही वृहत शांतिधारा

भक्तिमय गंगा में डुबकी लगाते जैन कांच मंदिर दमोह के श्रावकगण
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। संयम के महापर्व दसलक्षण पर्व पर श्री आदिनाथ दिगंबर जैन कांच मंदिर दमोह में सुबह से ही भक्तजनों की भीड़भाड़ लग रही है। द्वितीय दिन उत्तम मार्दव धर्म के दिवस पर मंदिर जी की दोनो वेदियों पर क्रमशः श्री जी का अभिषेक किया जा रहा है, साथ ही विश्व शांति की मंगल कामना के साथ वृहत मंत्रोच्चारण के साथ शांतिधारा की जाती है। प्रथम दिवस उत्तम क्षमा के संबंध में विस्तार से पंडित श्री आदीश जी ने बताया कि श्रावक को यथाशक्ति क्षमा भाव धारण करना चाहिए, गाली सुन मन खेद न आनो, गुण को औगुण कहे अयानो, अर्थात अगर आपके समक्ष कोई आकर आपको गाली देने लगे, आपको अच्छाई को भी बुरा प्रदर्शित करने लगे, तब भी आपके मन में क्रोध उत्पन्न नही होना ही सच्चे श्रावक की पहचान होती है। श्रावको के लिए छः आवश्यक कर्तव्य बताए जिनमे देव पूजा सर्वोपरि है, इसी प्रकार दस धर्मो में सर्व प्रथम उत्तम क्षमा धर्म धारण करना बताया गया हैं। जिसने अपने परिवार में रहकर क्षमा को धारण कर लिया निश्चित ही वह उत्कृष्ट गति को धारण करता है, क्योंकि सबसे ज्यादा कर्म बंध हमारे साथ रहने वाले लोगो के साथ क्रोध करने पर बंध जाते है। जहां सुमत वहां संपत्ति नाना, अर्थात जहां क्रोध की निम्नता होती है, सब एक साथ मिलकर रहते है, वहां संपत्ति अर्थात लक्ष्मी का वास होता है। क्रोध ही सभी कर्मों के आस्रव का कारण होता है। घमंड करने से अपने भी पराए हो जाते है, मन में कोमलता से जीवन सुखमय हो जाता है। जो मन में हो वही बचनो में होना चाहिए। बचनो में वही होना चाहिए जो हमारे क्रिया में होता है। मंदिर जी में प्रतिदिन कांच मंदिर पाठशाला के बच्चो के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम निर्धारित हुए है।



