अचानक बारिश से लोग हुऐ परेशान, वही किसानों की ओपन खरीदी केंद्रों में पड़े होने से अधिकतर हुई धान गीली

कलेक्टर के आदेश के बावजूद भी नहीं हो सकी उचित व्यवस्था किसानों के चेहरो पर चिंता की लकीरें
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। जबलपुर जिले में शनिवार की सुबह से बेमौसम तेज गरज के साथ हो रही बारिश से जहां किसानों के खेतों में लगी हुई गेहूं की नई फसलों को इस बारिश के पानी से उनके चेहरे में खुशी देखी गई । वहीं दूसरी ओर इन किसानों की उपज धान पड़ी खरीदी केंद्रों में ओपन के दौरान अधिकतर गीली नजर आ रही है । आपको बता दें कि जिले में बारिश को लेकर कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा लिखित निर्देश जारी करते हुए बताया गया था कि शनिवार और रविवार को तेज बारिश होने के कारण कोई भी किसान अपनी स्टॉल बुकिंग धान खरीदी केंद्रों पर न ले जाएं। वहीं निर्देश भी किया था कि जिन भी खरीदी केंद्रों में रखी हुई धान है उस धान की सुरक्षा हेतु उचित व्यवस्था भी की जाए। इतनी अधिक मात्रा में खुले में रखी हुई धान इस बारिश के पानी से गीली हो गई। साथ ही वेयर हाउस के बाहर रखी अधिकांश धान पानी और तिरपाल की व्यवस्था न होने के कारण गीली हो गई हैं।
बेमौसम बारिश – रुक-रुक कर हो रही बारिश से लगभग कई हज़ार क्विंटल अधिक किसानों की पड़ी हुई धान गीली होने से वे चिंतित और परेशान हो रहे हैं । कुछ किसानों ने शासन प्रशासन के ऊपर आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर शासन निमित्त निर्देश अनुसार 2 दिसंबर से खरीदी प्रारंभ कर देता तो आज इन किसानों की पड़ी हुई धान इस प्रकार से बारिश में गीली ना होती इस पर किसान इतना परेशान भी ना होता हर बार की तरह इस बार भी खरीदी केंद्रों में तो व्यवस्थाएं कम अव्यवस्थाएं ज्यादा नजर आती हैं केवल खाना पूर्ति के अनुसार आदेश निर्देश जारी कर दिए जाते हैं लेकिन उनके पति पालन करने वाले कर्मचारियों अधिकारियों को इस बारे में पता ही नहीं चल पाता है और इस तरह की परेशानियां सामने आकर खड़ी हो जाती है। अब सवाल यह उठता है कि देर रात जिला कलेक्टर के आदेश का पालन देर रात से कैसे हो पाता। क्योंकि शनिवार को सुबह से ही बारिश चालू हो गई । खरीदी केंद्रों में खुले में रखी हुई धान की व्यवस्थाएं कैसे हो सके समय पर।
सिहोरा अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र के किसान नूंजीग्राम के जितेन पटेल ने बताया कि अचानक से बारिश ने हमारे क्षेत्र के किसानों की रखी हुई धान पानी में डूब गई । और गीली हो गई जो कुछ बची कुची है हो सकता वह भी खराब हो जाए 14 से 15 किसान की ओपन रखी खरीदी केंद्र में धान को आज मैंने बारिश के पानी में जाकर देखा तो रखरखाव के चलते पानी अधिक होने से धान के समीप पानी जा पहुंचा था l
इनका कहना –
सिहोरा ब्लॉक मंझगवा भीखाखेड़ा- किसान ओबीसी जितेन्द्र कुमार कुर्मी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बेमौसम बारिश से हमारे किसान भाईयों की धान को नुकसान हुआ है उसका जिम्मेदार शासन प्रशासन का गलत सिस्टम जिम्मेदार है, यदि शासन प्रशासन ने निर्धारित दिनांक 2 दिसम्बर से धान खरीदीं शुरू कर दी होती तो निश्चित ही 95% किसान भाईयों की धान की तौल हो चुकी होती। एवं धान परिवहन का अच्छा सिस्टम बना होता तो निश्चित ही सभी खरीदीं केंद्रों का धान उठ चुका होता, इसलिए जो भी धान में क्षति हुई है और आगे भी जो क्षति होगी, उसके लिए सिर्फ शासन प्रशासन की लापरवाही, गलत सिस्टम, सुस्त चाल है,जिम्मेदार है और जिम्मेदार होगी।



