सेहत के प्रति संजीदा हुए लोग : 300 टन प्रतिमाह घट गई सोयाबीन तेल की खपत
अपना रहे मूंगफली, सनफ्लॉवर, कॉटनशीड ऑयल, 2 साल पहले 99 प्रतिशत थी सोयाबीन की खपत, अन्य तेलों के दाम घटने से भी खाद्य तेल में बदलाव
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। जिले के लोग अब सोयाबीन तेल की जगह अन्य खाद्य तेल अपना रहे हैं। 2 साल पहले तक जहां 98 से 99% उपयोग सोयाबीन तेल का ही होता था। वह अब घटकर 85 से 90% तक पर आ गया है। औसतन जिले में हर माह 2000 से 2500 टन खाद्य तेल की खपत होती है। इसमें से अब 300 टन प्रतिमाह की खपत अन्य तेल की होने लगी है।हलवाइयों के मुताबिक तेल की खपत सर्वाधिक वैवाहिक सीजन के दौरान ही होती है। सोयाबीन की जगह अन्य तेल का उपयोग होने की मुख्य वजह लोगों का स्वास्थ्य के प्रति संजीदा होना और सोयाबीन एवं अन्य तेलों के दामों में पहले की अपेक्षा ज्यादा अंतर नहीं रहना भी है।
वर्तमान में यह हैं तेल के फुटकर रेट….
सोयाबीन- 130 से 142 रुपए प्रति लीटर।
मूंगफली- 160 से 200 रुपए प्रति लीटर।
सरसों – 170 से 200 रुपए प्रति लीटर।
सनफ्लॉवर – 150 से 180 रु. प्रति लीटर।
सोयाबीन की जगह अन्य तेलों के चलन के यह हैं प्रमुख वजहें….
दामों में अब पहले जैसा अंतर नहीं बचा- फुटकर व्यवसायियों गौरी शंकर राय ,पतिराम प्रजापति अलर्क राजपूत के मुताबिक अन्य तेलों की खपत बढ़ने का एक प्रमुख कारण इनके रेटों में ज्यादा अंतर रहना नहीं है। कुछ साल पहले तक सोयाबीन का तेल 80 रुपए लीटर तो सनफ्लॉवर और मूंगफली का 130 रुपए लीटर था। अब सोयाबीन के तेल और सनफ्लॉवर-मूंगफली के तेल के दाम में 10 से 30 रुपए प्रति लीटर का अंतर रह गया है। ऐसे में लोग सोयाबीन की जगह अन्य तेल भी खरीदने लगे हैं।
यूपी-बिहार के लोगों ने सरसों तेल का क्रेज बढ़ाया- शहर में रह रहे यूपी और बिहार के लोग सोयाबीन और मूंगफली की जगह सरसों का तेल ज्यादा उपयोग करते हैं। इन्हीं परिवारों की देखा-देखी अन्य लोगों ने भी सरसों के तेल का उपयोग प्रायोगिक तौर पर करना शुरू किया। इसके चलते सरसों के तेल की बिक्री भी बढ़ी है।
कोविड के बाद स्वास्थ्य की चिंता बढ़ी—
कोरोना संक्रमण के बाद लोगों में सबसे ज्यादा सजगता खान-पान को लेकर बढ़ी है। अधिकांश लोगों को चिकित्सकों ने भी सलाह दी कि वे ऐसे तेल का उपयोग करें जो सुपाच्य हो। यही वजह है कि कई लोगों ने सोयाबीन को छोड़कर मूंगफली, सरसों, सनफ्लॉवर, कॉटनशीड ऑयल जैसे तेलों का उपयोग शुरू कर दिया।
हर 2 माह में तेल बदलते रहना चाहिए…
हर दो माह में खाने का तेल चेंज करते रहना चाहिए। गुड़ कोलेस्ट्रॉल को जो अच्छा करे वह तेल उपयोग में लेना चाहिए। हर तेल की स्टडी और रिजल्ट लगातार बदलते रहते हैं। फैट पौलिसेचुरेटेड और मोनोसेचुरेटेड वाले तेल को उपयोग करना चाहिए। जो तेल आप उपयोग कर रहे हैं उसके कंटेंट भी पता कर लेना चाहिए। ऑलिव ऑयल सबसे अच्छा है, हालांकि इसका चलन रायसेन में कम है। – डॉ. मनीष जैन, एसोसिएट प्रोफेसर, बीएमसी
वैवाहिक सीजन और त्योहारों के समय सोयाबीन तेल की खपत सबसे ज्यादा…
तेल के थोक व्यवसायी अनिल चौरसिया, नितिन मालपानी राठी
का कहना है 2 साल पहले तक 98 से 99% लोग सोयाबीन तेल का ही उपयोग करते थे। हालांकि यह अब कुछ हद तक कम हुआ है। इसकी जगह मूंगफली, सनफ्लॉवर, कॉटन ऑयल, सोयाबीन आदि ने ली है। फिर भी सबसे ज्यादा खपत सोयाबीन की ही है। खासकर वैवाहिक और त्योहारी सीजन में सोयाबीन की रिकॉर्ड खपत होती है।तेल थोक व्यवसायी अनिल कुमार चौरसिया का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों के चलते कुछ लोगों ने अन्य तेलों का उपयोग शुरू किया है, लेकिन अभी भी शहर सहित जिले में अधिकांश लोग सोयाबीन का ही उपयोग करते हैं। इसकी वजह है कि कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण लोग रेट को ही महत्व देते हैं। इसकी क्वालिटी और पैकिंग भी लगातार सुधर रही है।
गर्मियों में पाम ऑयल तो सर्दियों में बढ़ जाती है अन्य तेलों की डिमांड…
व्यवसायियों के मुताबिक पाम ऑयल का उपयोग सबसे ज्यादा गर्मियों में होता है। नमकीन बनाने में ही इसकी खपत सर्वाधिक है। सर्दियों में हार्ट अटैक की संभावना ज्यादा रहती है। ऐसे में लोग सोयाबीन की जगह अन्य तेल का उपयोग बढ़ा देते हैं। शेष समय सोयाबीन की बिक्री ही जिले में सर्वाधिक होती है। कॉटनशीड ऑयल भी नवंबर से फरवरी तक ही ज्यादा बिकता है।



