दमोह में अवैध उत्खनन को लेकर उठे सवाल, जांच और कार्रवाई की मांग

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। जिले में कथित अवैध उत्खनन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर किए जा रहे दावों के अनुसार दमोह बाईपास के पास वरपटी की पहाड़ी, ग्राम किल्लाई के समीप, ग्राम पंचायत आनु, ग्राम पंचायत हरदुआ मुडर के अंतर्गत खचारी पटी की पहाड़ी सहित पथरिया जनपद क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर मुरम, गिट्टी और पत्थर के कथित अवैध उत्खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अवैध उत्खनन के कारण पहाड़ियों और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंच रहा है। उनका कहना है कि जिले में नई कॉलोनियों के निर्माण और सड़क निर्माण कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में मुरम, गिट्टी एवं पत्थर की आवश्यकता के बीच कथित रूप से अवैध खनन और परिवहन का कारोबार जारी है।
खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं ने जिला खनिज अधिकारी राजकुमार गुप्ता की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि अवैध उत्खनन से संबंधित शिकायतों, सीएम हेल्पलाइन और सूचना के अधिकार के तहत की गई कार्रवाई को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष इस खबर के लिए उपलब्ध नहीं है।
उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में मध्यप्रदेश विधानसभा में दमोह जिले में अवैध रेत एवं पत्थर उत्खनन को लेकर पूर्व में प्रश्न उठ चुके हैं। वर्ष 2022 के एक विधानसभा उत्तर में शासन ने बताया था कि अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के मामलों में मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम, 2022 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
कई स्थानों पर अवैध खनन का दावा
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं द्वारा वरपटी, किल्लाई, आनु, हरदुआ मुडर तथा पथरिया क्षेत्र में कथित अवैध उत्खनन की जांच की मांग की गई है। उनका कहना है कि यदि इन स्थानों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए और खनन की अनुमति, लीज क्षेत्र, रॉयल्टी एवं परिवहन दस्तावेजों की जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि जिले में बड़े पैमाने पर किए जा रहे कथित अवैध उत्खनन की निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित की जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल
शिकायत में कुछ अधिकारियों और राजनीतिक प्रभाव से जुड़े व्यक्तियों पर खनन कारोबारियों को संरक्षण देने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन दावों की सत्यता जांच का विषय है। संबंधित अधिकारियों और जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
जिले में अवैध उत्खनन को लेकर पहले भी सरकारी स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। विधानसभा के पुराने रिकॉर्ड में भी दमोह जिले से संबंधित खनन मामलों और अवैध उत्खनन के प्रकरणों का उल्लेख मिलता है।
अब देखना होगा कि सामने आई शिकायतों और आरोपों को लेकर जिला प्रशासन मौके पर जांच कराता है या नहीं। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जिले के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों का सीमांकन कर वैध-अवैध खनन की स्थिति सार्वजनिक की जाए और पर्यावरणीय नुकसान का भी आकलन कराया जाए।



