मध्य प्रदेश

रायसेन जिले का साप्ताहिक रोज़नामचा : जननी की निर्दयता… नवजात की पीड़ा और शिक्षा तंत्र की विफलता

हरीश मिश्र, लेखक ( स्वतंत्र पत्रकार ), स्वरदूत क्रमांक -९५८४८१५७८१
रोजनामचा एक ऐसी लेखा बही है । जिसमें मृगांचल एक्सप्रेस दिन-प्रतिदिन के सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक घटनाक्रम को क्रमवार अभिलेखन किया है। आज से प्रत्येक सोमवार पढ़ें । अपनी प्रतिक्रिया एवं सुझाव दें।
पांच दिन का नवजात शिशु खेत में मिला । इस समाचार से अंखियन आंसू आ गए,
हुई घनेरी पीर।
जननी की निष्ठुरता देख ,
मन हुआ अधीर।
खिलने से पहले ही कली ( नवजात शिशु ) को जननी ने खेत में फेंक दिया । नवजात को सुरक्षित देखा ‌।
बेटी के अपराध की आत्मग्लानि में पिता को फांसी पर लटकते देखा। एक भूल का परिणाम परिवार को बिखरते देखा।
स्वामी विवेकानंद कालेज का नाम और रंग बदलते देखा। अब प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस कहलाएगा। सवाल सरकार से है! बदलना है तो इरादे बदलो। नाम और रंग बदलने से क्या होता है! नाम बदलने से किरदार नहीं बदल जाते।
शिवराज सरकार ने भी स्कूलों के नाम और रंग बदलकर सी एम राइज कर वाह-वाही लूटी थी । करोड़ों रुपए का बजट आवंटित किया । शिक्षकों ने भी समर्पित भाव से शिवराज की मंशा अनुरुप बहुत मेहनत कर पुताई , फर्नीचर खरीदी में बजट ठिकाने लगा कर परीक्षा परिणाम 30% से कम दिया।
परीक्षा परिणाम के बाद जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधिकारी ने जिनका परीक्षा परिणाम 30% से कम आया उन विद्यालयों के शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए पत्राचार का खेल-खेला। नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया , पर ऐसे शिक्षकों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ख़बर तो यह है कि 30% से कम परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों के हौंसले बुलंद हैं। वह संगठित होकर जिला प्रशासन को खुली चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे
अकर्मण्य शिक्षकों के एक प्रतिनिधि मंडल को शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मिलते देखा । अकर्मण्य शिक्षकों के संगठन मुखिया जो कभी बच्चों को ना खुद पढ़ाते हैं , बस शिक्षकों को कामचोरी का प्रशिक्षण देते हैं, ने मीडिया को समाचार जारी कर बताया है कि शिक्षा मंत्री का अभय वरदान मिल गया। किसी भी शिक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसलिए नाम बदलने से कुछ नहीं होगा, किरदार बदलो।
इस सप्ताह सत्य अहिंसा की धरा सांची में अहिंसा के अनुयाई, चमड़ा कुटाई का उद्योग संचालित करने वाले एवं नशा कारोबारी के बीच हिंसा का तांडव होते देखा। बेरोजगारों को मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग की परीक्षा देते देखा। आई टी आई भवन से छात्रा को गिरते देखा। सिलवानी में प्रेम प्रसंग में सलमा की हत्या होते देखी। वन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को वन अमले पर हमला करते देखा।
रतनपुर स्थित एग्रीकल्चर वेयर हाउस को गीला गेहूं उपार्जन करते देखा था। अब खाद्य इंस्पेक्टर को काला-पीला करते देखा। अच्छी खबर यह है कि लीपापोती के बाद किसानों का करोड़ों रुपए का भुगतान दो तीन दिन में हो जाएगा।
अंतिम खबर यह है… जिला पंचायत में अब हर काम पर रत्ती भर गुजारा-भत्ता टेक्स लगेगा ‌। सूत्रों अनुसार जर्जर टेबल पर बैठे, सहज, सरल , धीमे स्वर में बात करने वाले कर्मचारी को मुरैना की खस्ता गजक खाते और पंचायत सचिवों, सहायक सचिव, सरपंचों से रत्ती भर गुजारा-भत्ता टेक्स वसूलते देखा।

अंखियन आंसू आ गए,
हुई घनेरी पीर।
जननी की निष्ठुरता देख ,
मन हुआ अधीर।

…बदलना है तो इरादे बदलो। नाम और रंग बदलने से क्या होता है! नाम बदलने से किरदार नहीं बदल जाते।

वन विभाग देश-भक्ति , जन-सेवा विभाग की शरण में

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