नगर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिवस संपन्न
सिलवानी। नगर की स्थानीय समिति द्वारा मां विजयसेन माता मंदिर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन का कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कथा वाचक पंडित अभीषेक शास्त्री ने अपने मधुर वाणी और भावपूर्ण शैली में श्रीमद् भागवत महापुराण के विविध दिव्य प्रसंगों का वर्णन कर श्रोताओं को भक्ति, ज्ञान और अध्यात्म की गहराइयों से अवगत कराया।
पंडित शास्त्री ने राजा परीक्षित के जन्म, महार्षि शुकदेव के आगमन, तथा सृष्टि प्रकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने समझाया कि श्रीमद् भागवत केवल कथा मात्र नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला अद्वितीय ग्रंथ है। इसके माध्यम से मानव जीवन में सत्य, प्रेम, नैतिकता और आत्मिक शांति का मार्ग प्राप्त होता है।
कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं युवा लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि कृष्ण केवल लीला पुरुषोत्तम ही नहीं, बल्कि जीवन के हर चरण के आदर्श भी हैं। उनकी लीलाएँ हमें करुणा, धैर्य, सदाचार और कर्तव्यपरायणता जैसे मूल्यों की शिक्षा देती हैं।
कथा स्थल पर भजन, कीर्तन और ध्यान के दौरान पूरे वातावरण में अध्यात्म की सुगंध फैल गई। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे और समय-समय पर “हरे कृष्ण–हरे राम” के जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम में नगरवासियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। आयोजन समिति ने बताया कि कथा का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म, प्रेम एवं सद्भाव का संदेश फैलाना है, ताकि लोग आध्यात्मिकता के माध्यम से अपने जीवन को और अधिक सार्थक बना सकें।
श्रीमद् भागवत कथा का समापन सातवें दिन भव्य पूर्णाहुति, हवन एवं प्रसाद वितरण के साथ किया जाएगा।



