आवारा जानवर अभी भी घूम रहे है सडको पर, कलेक्टर के सख्त आदेश के बाद भी जबावदार निष्क्रिय

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर। आवारा जानवरो पर नकेल कसने उन्हे पकडकर गौशालाओ मे पहुंचाने एवं गोपालको के पालतु जानवरो को अपने नियन्त्रण मे रखने उन्हे अपने ही घर की गोशाला मे बांधकर रखने एवं उन्हे सडको गांवो खेतो मे खुला आवारा नही छोडने की सख्त हिदायतो के बावजूद गोपालक अभी भी लापरवाह बने हुए है। देखा जा रहा है की कलेक्टर के सख्तादेश के बाद भी प्रशासन के संबंधित अधिकारी कर्मचारियो व्दारा इस पर कोई कार्रवाही नही की जा रही है जिससे आवारा जानवरो की यह गंभीर समस्या यथावत बनी हुई है आवारा जानवर खेतो मे घुसकर खडी फसलो को नुकसान पहुंचा रहे है वही आवारा जानवर बाजारो मे होटलो, चाय, पान, फल सब्जियो की दूकानो मे भी भारी उत्पात मचाकर इनको क्षति पहुंचा रहे है राह चलते लोगो महिलाओ दिव्यांगो छोटे छोटे बच्चो स्कूली छात्र छात्राओ आदि को यह जानवर मारने दौड रहे है इनके समूह मे सडको पर बैठने से आवागमन बाधित हो रहा है. साथ ही यह तेज रफ्तार वाहनो की चपेट मे आने से सडक दुर्घटना के शिकार हो रहे है। गौरझामर मे आवारा पशुओ की तरफ किसी ने आज तक कोई ठोस कदम नही उठाया है तमाम बुध्दीजीवियो जानकारो अमीरो बडे बडे किसानो के होते हुए इसका सारगर्भित हल नही खोजा जा सका यह बेहद दुखद व चिंता की बात है लोगो का कहना है कि जिस प्रकार पहले गौखर लेकर बरेदी जंगल चराने ले जाते थे उसे बंद क्यो किया गया, गौखर बंद होने से ही आवारा जानवर छुटटा होकर फी् घूमने को मजबूर हो गये यदि तभी शासन ग्राम पंचायतों के माध्यम से बरेदी की व्यवस्था करता तो जानवर आवारा नही फिर पाते, संबधिताधिकारियो को कलेक्टर के दिये निर्देशो का पालन करना चाहिये जिससे आवारा जानवरो पर नियंत्रण हो सके।



