मध्य प्रदेश

सिविल हॉस्पिटल में ठेकेदार की मनमर्जी, पीआईक्यू की मेहरबानी

मेडिकल की आई बाढ़,
सिलवानी । नगर में सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग का निर्माण तो पूरा हो चुका है, लेकिन इसका उद्घाटन अभी तक नहीं हो पाया है। उद्घाटन की प्रतीक्षा में अस्पताल की अत्याधुनिक सुविधाएँ धूल खा रही हैं, जबकि बाहर की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। अस्पताल के आस-पास खुले अनगिनत मेडिकल स्टोर्स ने पान की दुकानों का रूप ले लिया है। इन मेडिकल स्टोर्स पर नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए दवाओं की बिक्री की जा रही है, और प्रशासनिक निगरानी का कोई असर नहीं है।
सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इसमें आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आपातकालीन सेवाएँ और उन्नत चिकित्सकीय उपकरण लगाए गए हैं। लेकिन उद्घाटन के लिए कोई निश्चित तारीख तय नहीं होने के कारण यह सुविधाएँ मरीजों तक पहुँच नहीं पा रही हैं। इसके पीछे राजनीतिक कारणों से लेकर प्रशासनिक ढिलाई तक की बातें सामने आ रही हैं। नगर के नागरिक भी नई सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
सिविल हॉस्पिटल की निर्माण एजेंसी पर विभाग की मेहरबानी से मनमर्जी का काम चल रहा है। भवन निर्माण की समय अवधि निकलने के बाद पीआईक्यू के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से निम्न स्तर का काम किया जा रहा है।
जहाँ अस्पताल का उद्घाटन लंबित है, वहीं अस्पताल के बाहर कई नए मेडिकल स्टोर्स तेजी से खुल गए हैं। ये स्टोर्स स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनकर नियम-कानूनों का पालन करना तो दूर, इन्हें पूरी तरह से अनदेखा कर रहे हैं। इन दुकानों का संचालन कुछ इस तरह से हो रहा है जैसे यह पान की दुकानें हों – बिना लाइसेंसधारी फार्मासिस्ट की उपस्थिति के दवाओं की बिक्री हो रही है, और दवाइयों का वितरण भी बिना किसी चिकित्सा परामर्श के किया जा रहा है।
लाइसेंसधारी और दुकान चलाने वाले अलग: इन मेडिकल स्टोर्स में पाया गया है कि जिस व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस है, वह अक्सर वहाँ मौजूद नहीं होता। दुकान कोई अन्य व्यक्ति चला रहा होता है, जिसे दवाइयों की जानकारी नहीं होती। यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के स्पष्ट उल्लंघन के अंतर्गत आता है।
बिना पर्चे के दवाइयाँ: डॉक्टर के पर्चे के बिना ही गंभीर बीमारियों की दवाइयाँ आसानी से मिल रही हैं। बिना किसी चिकित्सा विशेषज्ञता के लोग दवाइयाँ खरीद और खा रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाओं का अनियमित उपयोग भी एक बड़ी समस्या बन गया है।
प्रशासनिक अनदेखी और मनमानी
मेडिकल स्टोर्स के इस अनियमित संचालन के बावजूद, स्थानीय प्रशासन कोई सख्त कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा है। मेडिकल स्टोर्स की नियमित जाँच की आवश्यकता होती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी नियमों का पालन हो रहा है, लेकिन इसकी कमी ने स्थिति को और बदतर बना दिया है। प्रशासनिक अनदेखी ने इन दुकानदारों को मनमानी करने की खुली छूट दे दी है, जिससे कानून और नियमों की धज्जियाँ उड़ रही हैं।

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