धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 15 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 15 फरवरी 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 11:52 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 01:39 AM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र स्त्री नक्षत्र है और इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।
⚜️ योग – सुकर्मा योग 07:32 AM तक, उसके बाद धृति योग
प्रथम करण : वणिज – 10:48 ए एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 11:52 पी एम तक बव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:47 से 11:11 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:25:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:35:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:17 ए एम से 06:08 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:43 ए एम से 06:59 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:58 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:27 पी एम से 03:12 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:09 पी एम से 06:35 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:11 पी एम से 07:28 पी एम
💧 अमृत काल : 05:42 पी एम से 07:28 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 16 से 01:01 ए एम, फरवरी 16
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में इमरती अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ सर्बिया राज्य दिवस, भारतीय इतिहासकार व लेखक राधाकृष्ण चौधरी जयन्ती, भारतीय अभिनेता आशुतोष गोवरिकर जन्म दिवस, भारतीय अभिनेत्री मीरा जेसमिन जन्म दिवस, भारतीय शायर मिर्ज़ा ग़ालिब स्मृति दिवस, प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान स्मृति दिवस, उत्पादकता सप्ताह
✍🏼 तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗽 Vastu tips 🏚️
वास्तु के अनुसार कुछ दिशाएं ऐसी होती हैं जहां घर में शीशा लगाना आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दक्षिण, पश्चिम दिशा और आग्नेय, वायव्य एवं नैऋत्य कोण की दिवार पर शीशा, यानि कि मिरर नहीं लगाना चाहिए। अगर आपके घर या ऑफिस की इन दिशाओं में मिरर लगा है तो उसे वहां से तुरंत हटा दें, क्योंकि यह अशुभ होता है। यदि आप उसे नहीं हटा सकते इस वजह से क्योंकि कई घरों में शीशा दिवार पर टाइलस के बीच में लगा होता है, यानि इस तरह से लगा होता है कि उसे हटाना संभव नहीं है। तो आप उस पर कोई कपड़ा ढक सकते हैं जिससे उसकी आभा किसी भी वस्तु दोष को पनपने न दे। इस दिशा में लगा शीशा नुकसान ही देता है। इन दिशाओं में शीशा लगाने से भय़ बना रहता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कान का मैल निकालने के सुरक्षित उपाय
गर्म पानी का उपयोग: गुनगुने पानी से कान साफ करने की कोशिश करें।
नमक का घोल: नमक और पानी का मिश्रण कान में डालकर मुलायम कपड़े से साफ करें।
डॉक्टर की सलाह: अगर समस्या गंभीर हो, तो विशेषज्ञ की मदद लें।
🍾 Clear Wax Ear Drops: आपका सुरक्षित साथी
Clear Wax एक बेहतरीन समाधान है, जो कान के अंदर जमा मैल को नरम करके आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है।
🧉 Clear Wax के फायदे:
तेज़ असर: कान के मैल को 2-3 मिनट में नरम करता है।
सुरक्षित: बिना किसी जलन के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित।
प्राकृतिक तत्व: यह गहराई से सफाई करता है और कान को नुकसान नहीं पहुंचाता।
सरल उपयोग: ड्रॉपर के साथ आता है, जिससे इसे लगाना आसान है।
👉🏼 कैसे उपयोग करें?

ड्रॉपर की मदद से 2-3 बूंदें कान में डालें।
2-3 मिनट तक सिर को झुकाए रखें।
कान को हल्के कपड़े या टिशू से साफ करें।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
पानी में बेकिंग सोडा डालकर नहाएं बेकिंग सोडा यूरिनरी जलन को शांत करने में मदद कर सकता है। आधे चम्मच बेकिंग सोडा को गुनगुने पानी में मिलाकर नहाएं या Sitz bath करें। यह जलन को शांत करने में मदद करता है और pH स्तर को संतुलित करता है।
स्ट्रेस और अधिक समय तक बैठने से बचें अधिक तनाव या लंबे समय तक बैठे रहना भी यूरिनरी जलन को बढ़ा सकता है। अपनी जीवनशैली में बदलाव करें, और जितना हो सके, आरामदायक और आरामदायक स्थिति में बैठें। अधिक समय तक बैठने से बचें, खासकर अगर आपके पास UTI या जलन की समस्या है।
गर्म पानी की सिकाई आप गर्म पानी से सिकाई करने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे जलन में राहत मिल सकती है। एक गुनगुने पानी से भरी बोतल या हीट पैड को पेट और मूत्र मार्ग पर रखें, यह दर्द और जलन को कम कर सकता है।
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक दिन राजा मानसिक तनाव की वजह से दुखी होकर अपने घोड़े पर चढ़ा और जंगल की ओर निकल गया। राजा अकेला ही था, उसके साथ कोई सैनिक या सेवक नहीं थे। जंगल बहुत ही घना था। ऊंचे-ऊंचे पेड़ थे, पेड़ इतने ऊंचे-ऊंचे थे कि सूर्य की रोशनी भी ठीक से नीचे नहीं पहुंच रही थी।
जंगल में भटकते-भटकते राजा को बांसुरी की मधुर आवाज सुनाई देने लगी। राजा आवाज सुनकर हैरान था कि घने जंगल में इतनी मधुर बांसुरी की आवाज कहां से आ रही है।
कौन है जो इतना शांत है और इतनी मधुर बांसुरी बजा रहा है। राजा बांसुरी की आवाज की दिशा में आगे बढ़ने लगा। थोड़ी ही दूर जाकर राजा ने देखा कि एक ग्वाला पेड़ के नीचे बैठा है और बांसुरी बजा है। ग्वाले के कपड़े भी फटे-पुराने थे, माथे पर गमछा लपेट रखा था, उसके चेहरे पर मुस्कान और शांति दिखाई दे रही थी।
राजा सोचने लगा कि मैं इतना धनवान हूं, सेवक हैं, मुझे सुख-सुविधा की कोई कमी नहीं है, फिर मेरे चेहरे पर ऐसी शांति नहीं रहती है, जैसी इस गरीब ग्वाले के चेहरे पर है।
ग्वाले के आसपास उसकी गायें घास चर रही थीं। राजा ने उस ग्वाले के पास पहुंचा। ग्वाले ने राजा को देखा तो वह खड़ा हो गया और प्रणाम करने लगा।
राजा ने ग्वाले से पूछा कि भई एक बात बताओ, तुम तो इतने शांत हो जैसे तुम्हारे जीवन में कोई दुख ही नहीं है, इतनी मधुर बांसुरी बजा रहे हो, जबकि तुम्हारे कपड़े देखकर लगता है कि तुम काफी निर्धन हो।
ग्वाले ने कहा कि राजन् मैं बहुत ही सीधा-साधा ग्वाला हूं। मेरे पास कोई धन-दौलत नहीं है और मैं धनवान बनना भी नहीं चाहता, मैं राजा बनना नहीं चाहता। कहने के लिए तो व्यक्ति राजा बन जाता है, लेकिन असल में वह सेवक होता है। पूरे राज्य का और प्रजा का भार उसके ऊपर होता है। गलत इच्छाएं नहीं हैं तो मैं शांत हूं। राजा से अच्छा तो मैं गरीब ग्वाला ही बेहतर हूं, कम से कम मेरे जीवन में शांति तो है।
ये बातें सुनकर राजा सोच में पड़ गया, एक ग्वाला इतनी अच्छी बातें कह रहा था। राजा को समझ आ गया कि मेरे पास धन-संपत्ति भले ही है, मैं राज्य को और बढ़ाने की कोशिश करते रहता हूं, प्रजा से नए-नए कर के रूप में धन लेने की योजना बनाता हूं, ऐसी ही गलत इच्छाओं की वजह से मेरा मन अशांत है।
ग्वाले ने कहा कि राजन् सच्ची शांति इच्छाओं का त्याग करने के बाद ही मिल सकती है। जब तक मन में विचार चलते रहेंगे, मन अशांत रहेगा। तरह-तरह के विचार चलते रहेंगे तो तनाव कभी खत्म नहीं होगा।
ग्वाले की बातें सुनकर राजा को शांति पाने का रास्ता मिल गया था। अब राजा ने व्यर्थ इच्छाएं छोड़ दीं। अपने राज्य में ही संतुष्ट रहने लगा तो बहुत ही जल्द उसका मन भी शांत हो गया।
अगर हम तनाव दूर करना चाहते हैं तो हमें भी गलत इच्छाओं को छोड़ना पड़ेगा। वर्ना हमें शांति नहीं मिल पाएगी। शांति पाने के लिए गलत इच्छाएं छोड़ें और ध्यान करें।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।

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