Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 07 नवम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 07 नवम्बर 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
*शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌦️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि 11:05 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रोहिणी 12:33 AM तक उपरांत म्रृगशीर्षा
🪐 नक्षत्र स्वामी – रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रह्मा हैं और इसका स्वामी ग्रह चन्द्रमा है। और इसकी राशि वृषभ है जिसका स्वामी शुक्र है।
⚜️ योग – परिघ योग 10:27 PM तक, उसके बाद शिव योग
⚡ प्रथम करण : गर – 11:05 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 09:16 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:17:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:14:00
ब्रह्म मुहूर्त : 04:53 ए एम से 05:45 ए एम* 👸🏻 *🌆 *प्रातः सन्ध्या : 05:19 ए एम से 06:37 ए एम*
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:26 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 5:32 पी एम से 05:58 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:32 पी एम से 06:50 पी एम
💧 अमृत काल : 09:44 पी एम से 11:09 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 08
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस, महाराष्ट्र में विद्यार्थी दिवस, राष्ट्रीय रेटिनॉल दिवस, भीमराव आंबेडकर के विद्यालय प्रवेश दिवस, भारतीय वैज्ञानिक सी.वी. रमन जन्म दिवस, राष्ट्रीय भालू को गले लगाओ दिवस, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ पंडित विश्वम्भर नाथ जन्म दिवस, स्वतन्त्रता सेनानी बिपिन चंद्र पाल जन्म दिवस, वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन जयन्ती, भारतीय पार्श्व गायक श्रीनिवास जन्म दिवस, शिशु सुरक्षा दिवस, महान् अक्टूबर क्रान्ति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस (सप्ताह) ✍🏼 *तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।।
🗼 Vastu tips ⛲
फेंगशुई के अनुसार घर का प्रवेश द्वार सिर्फ अंदर-बाहर जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यह समृद्धि का प्रवेश द्वार होता है। अगर दरवाजा चरमराता है या ठीक से बंद नहीं होता तो यह नकारात्मक ऊर्जा को जन्म देता है। इसलिए मुख्य दरवाजे की सफाई और रखरखाव जरूरी है। दरवाजे के कब्जों में तेल डालें, ताकि कोई आवाज न आए और दरवाजे के सामने अनावश्यक चीजें न रखें। दरवाजे के आस-पास रोशनी रखें और स्वागत का प्रतीक जैसे वेलकम मैट या सकारात्मक संदेश वाला बोर्ड लगाएं। इससे शुभ ऊर्जा का घर में प्रवेश बढ़ता है।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पान के पत्तों को चबाना पाचन क्रिया के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. कब्ज एसिडिटी जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिए पान की पत्तियां चबानी चाहिए. अल्सर जैसी बीमारियों को ठीक करने में भी ये पत्तियां काफी फायदेमंद होती हैं.यदि किसी व्यक्ति को मसूड़ों में सूजन या गांठ जैसी कोई समस्या हो जाती है, तो ऐसे व्यक्ति को पान की पत्तियां चबानी चाहिए. इन पत्तियों में पाए जाने वाले तत्व मसूड़ों की सूजन को कम करते हैं और मसूड़ों में उभरी हुई गांठों को भी ठीक करते हैं.पान की पत्तियों का सेवन करने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है, इसलिए डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए पान की पत्तियां चबाना बेहद लाभकारी है. छाती में जकड़न और फेफड़ों की समस्या में पान के पत्तों का सेवन करना चाहिए. इनके सेवन से धीरे-धीरे शरीर का उपचार होने लगता है. यदि ठीक से सांस नहीं ले पा रही हैं तो गर्म पानी में पान के पत्तों के साथ लौंग और इलायची को उबालें, जब पान आधा हो जाए तो इस पानी का सेवन करें. इससे फेफड़ों में आई सूजन भी कम होती है. पान के पत्ते शरीर में ऑक्सीडेशन प्रक्रिया को बढ़ावा देने का काम करता है, जिससे वजन को कंट्रोल करने में सहायता मिलती है. यह भूख को प्रभावित किए बिना वजन को संतुलित रख सकता है.
🩻 आरोग्य संजीवनी 🩸
🌿 श्रेष्ठ आयुर्वेदिक दवाएँ (त्रिदोष-संतुलन के लिए)
त्रिफला चूर्ण / त्रिफला टैबलेट
तीन फल: हरड़, बहेड़ा, आँवला।
🔹 लाभ: पाचन सुधारे, विषहर, त्वचा-शुद्धि, आँखों के लिए लाभकारी। साइड इफेक्ट: अधिक मात्रा में लेने से ढीलापन या हल्का दस्त।*
च्यवनप्राश
🔹 लाभ: रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता, त्रिदोष- संतुलक, त्वचा और फेफड़ों के लिए अच्छा। साइड इफेक्ट: मधुमेह रोगी को सावधानी — इसमें गुड़/शक्कर होती है।
अश्वगंधा चूर्ण / कैप्सूल
🔹 लाभ: वात-पित्त को संतुलित करता, तनाव कम करता, बलवर्धक। साइड इफेक्ट: अत्यधिक सेवन से गर्मी या पित्त बढ़ सकता है।
*शतावरी चूर्ण
🔹 *लाभ: पित्त-कफ संतुलक, हार्मोनल संतुलन में सहायक।साइड इफेक्ट: अधिक मात्रा में लेने से कुछ लोगों को पेट भारी लग सकता है। त्रिदोषहर योग / त्रिफला गूग्गुलु (क्लासिक आयुर्वेदिक संयोजन 🔹 लाभ: तीनों दोषों को संतुलित करने वाला, शरीर शुद्धि में उपयोगी। 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कार्तिक पूर्णिमा की अद्भुत और प्रेरणादायक कहानी
बहुत समय पहले की बात है — जब भगवान शिव और ब्रह्मा के बीच यह विवाद हुआ कि सृष्टि में सबसे बड़ा कौन है। दोनों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं था। तब भगवान विष्णु ने इस विवाद को सुलझाने के लिए एक अनंत ज्योति स्तंभ (शिवलिंग) के रूप में प्रकट होकर कहा “जो इस ज्योति स्तंभ का आदि या अंत ढूंढ लेगा, वही महान कहलाएगा।”
ब्रह्मा ऊपर की ओर उड़े और विष्णु नीचे की ओर गए, परंतु कोई भी उस अनंत ज्योति के आदि-अंत का पता नहीं लगा सका। अंत में विष्णु ने विनम्रता से हार स्वीकार की, जबकि ब्रह्मा ने झूठ बोल दिया कि उन्हें शिवलिंग का सिर मिल गया है। तब भगवान शिव प्रकट हुए और क्रोधित होकर बोले “हे ब्रह्मा! तुमने असत्य कहा है। इसलिए अब तुम्हारी पूजा पृथ्वी पर नहीं होगी।” और फिर भगवान शिव ने उस दिन को महापवित्र बना दिया वही दिन था कार्तिक पूर्णिमा। 🌸 उसी दिन से यह तिथि शिव, विष्णु और ब्रह्मा तीनों का संगम मानी जाती है। 🌊 इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और व्रत करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। 🌕 कहते हैं कि इस दिन देवताओं का निवास पृथ्वी पर होता है, और हर दीपक भगवान तक पहुँचने वाला संदेश बनता है।
✨ *_एक और कथा: त्रिपुरासुर नामक राक्षस तीन लोकों पर अत्याचार कर रहा था। तब भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का संहार इसी दिन किया था। इसलिए इस दिन को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
📿 *संदेश:*
कार्तिक पूर्णिमा हमें यह सिखाती है कि सत्य, विनम्रता और प्रकाश ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग हैं।
══════◄••❀••►═══════
⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।।

