
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 14 नवम्बर 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। *शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
*शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । *शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल 🌐 *कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,* ✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌦️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष दशमी तिथि 12:50 AM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 09:20 PM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस नक्षत्र के अधिदेवता भग हैं, जो सौभाग्य और आनंद की देवी हैं।
⚜️ योग – वैधृति योग 06:25 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 12:07 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 12:49 ए एम, नवम्बर 15 तक बव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:22:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:12:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:57 ए एम से 05:50 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:23 ए एम से 06:43 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:27 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:28 पी एम से 05:54 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:28 पी एम से 06:47 पी एम
💧 अमृत काल : 02:29 पी एम से 04:12 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:32 ए एम, नवम्बर 15
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जयन्ती, बाल दिवस, राष्ट्रीय सीट बेल्ट दिवस, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री लक्ष्मीचंद जैन स्मृति दिवस, भारत प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार हरिवंशराय बच्चन जन्म दिवस, प्रसिद्ध गौड़ीय वैष्णव गुरु तथा धर्मप्रचारक भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद स्मृति दिवस, प्रसिद्ध बाल साहित्यकार हरिकृष्ण देवसरे स्मृति दिवस, विश्व मधुमेह (डायबिटीज) दिवस, लेखक विकास खन्ना जन्म दिवस, राष्ट्रीय पुस्तक दिवस (सप्ताह) ✍🏼 *तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🫖 Vastu tips 🍵
*आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, मनी प्लांट की मिट्टी में थोड़ा सा दूध डालना बेहद लाभकारी होता है। दूध को पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इससे पौधे में सात्विक ऊर्जा बढ़ती है और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। साथ ही कर्ज से मुक्ति मिलती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। *मिट्टी में चीनी डालने से बढ़ती है बरकत अगर मनी प्लांट की मिट्टी में थोड़ी चीनी डाल दी जाए, तो यह पौधा तेजी से बढ़ता है। वास्तु के अनुसार, गन्ने से बनी चीनी घर में मधुरता और धनवृद्धि का संकेत देती है। इस उपाय से घर का वातावरण सौम्य बनता है, धन हानि रुकती है और राहु के दोष भी कम होते हैं।
*पौधे पर कलावा बांधें घर की स्थायी सुख-समृद्धि के लिए मनी प्लांट पर लाल कलावा बांधना चाहिए। इससे पौधे की ऊर्जा और अधिक शुभ हो जाती है और घर में स्थिर धन का प्रवाह बना रहता है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ एक पुरानी कहावत भी है।
जीवित रहने के लिए खाना चाहिए न कि केवल खाने के लिए जीवित रहना।
*यह भी सुना है कि नींद,भूख, लड़ाई,को व्यक्ति अपनी इच्छानुसार बढ़ा सकता है। *मुझे अपना पुश्तैनी गांव , वहां की परंपराएं, खान-पान आदि सभी कुछ अच्छी तरह से याद है वहां सभी घरों में दोपहर का भोजन खाने की प्रथा ही नहीं थी। सभी लोग सुबह १०-११ बजे और रात को जल्दी ही भोजन कर लेते थे। उस समय हमारे गांव में बिजली भी नहीं थी अतः जल्दी जल्दी सभी काम कर लिए जाते थे।
*दोपहर को खाना / लंच करने का सिलसिला नौकरी लगने के उपरांत , सिर्फ काम वाले दिनों में, शुरू हुआ और रिटायरमेंट के उपरांत फिर गांव वाला हिसाब शुरू कर दिया था। अर्थात दिन में दो बार। *लेकिन सभी लोगों के लिए एक ही फार्मूला निश्चित नहीं हो सकता। दिन भर कड़ी मेहनत करने वाले मजदूर और कुर्सी पर बैठ कर वाईट कालर जाब करने वालों की भोजन की जरूरत भी अलग-अलग होती है। इसी तरह, नौजवान, अधेड़, वरिष्ठ नागरिक, पहलवान, हिष्टपुष्ट, कमजोर शरीर व्यक्ति की भूख भी अलग-अलग होती है।
*तो बस जो भी खायें, पौष्टिक आहार होना चाहिए और भूख से थोड़ा कम खाना चाहिए। सीजनल सब्जियां और फल खाने चाहिए और ओवर ईटिंग से बचना चाहिए। 🥠 *आरोग्य संजीवनी* 🪵 चर्म रोगों के उपचार में सहायक अर्जुन की छाल त्वचा की समस्याओं जैसे कि एक्जिमा, सोरायसिस, और अन्य स्किन प्रॉब्लम्स से छुटकारा दिलाने में सहायक है। इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण त्वचा पर होने वाले संक्रमण को रोकते हैं और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं। *पाचन तंत्र के लिए अर्जुन की छाल पेट की समस्याओं जैसे कि अपच, दस्त, और गैस से राहत दिलाने में मदद करती है। यह पेट की दीवारों को मजबूत करने और पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करती है।
*हड्डियों के लिए अर्जुन की छाल में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं जो हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बनाते हैं। यह गठिया और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं में राहत देने में मददगार हो सकती है। 📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
क्या आपने कभी सोचा है — क्यों कुछ लोगों के जीवन में बार-बार सब टूट जाता है, जबकि वे किसी का बुरा नहीं करते?
*क्या यह केवल दुर्भाग्य है — या ईश्वर की कोई छिपी हुई योजना? यही सवाल था केशव के मन में, जब वह अपनी बाँसुरी यमुना में बहाने जा रहा था।पर तभी नीलवर्ण श्रीकृष्ण प्रकट हुए —और जो उन्होंने कहा, वो हर उस आत्मा के लिए संदेश है जो “हार” को अंत समझती है। यह केवल एक कथा नहीं, बल्कि हरेक टूटी आत्मा का पुनर्जन्म है।
🌸 जब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा – “केशव, तेरा टूटना ही तेरी सबसे बड़ी साधना है…
*यह एक आत्मा को झकझोर देने वाली कहानी है — एक ऐसे कलाकार केशव की, जिसने अपने दर्द से भागना चाहा, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसे सिखाया कि टूटना हार नहीं, भक्ति का आरंभ है। एक दिव्य कथा जो हर उस आत्मा के लिए है जिसने प्रेम में हारकर, ईश्वर को पा लिया। *रात के सन्नाटे में यमुना किनारे बैठा केशव बस एक ही बात सोच रहा था — “क्यों हर बार जब मैं सच्चा होता हूँ, तब सब झूठ मुझसे जीत जाते हैं?” उसकी आँखें लाल थीं, और हथेलियाँ मिट्टी से भीगीं हुईं।उसने मुँह उठाकर आकाश की ओर देखा — वही तारे, वही चाँद — पर आज कुछ अलग था।आज उसे लग रहा था कि जैसे तारे भी उससे मुँह मोड़ चुके हैं।
*वो एक कलाकार था — संगीत उसका प्राण था। पर जीवन की विडंबना यह थी कि उसकी रचनाएँ लोग चुरा ले जाते थे,और उसकी सच्चाई पर सब हँसते थे। जिस लड़की के लिए उसने राग लिखे — वो भी चली गई, कहती हुई — “तू बहुत अच्छा है, पर दुनिया ऐसे लोगों से नहीं चलती।” वो टूट चुका था। उस रात उसने तय किया — वो अब कोई संगीत नहीं बनाएगा।वो अपनी बांसुरी को यमुना में बहा देगा… और संगीत के लिए कभी फिर लौटेगा नहीं। *जब उसने बाँसुरी उठाई, तो एक हल्की हवा चली। यमुना की लहरें अजीब ढंग से हिलने लगीं — जैसे कोई उसे रोक रहा हो। पर उसने अनदेखा किया। “अब किसी को मेरी परवाह नहीं,” उसने कहा। और तभी —
*पीछे से एक स्वर उठा —नर्म, मधुर, पर असीम शक्ति से भरा —“तो क्या तुझे लगता है, तेरा संगीत सिर्फ तेरा था, केशव?” वो पलटकर देखता है —और सामने वही खड़ा है…नीलवर्ण, मुस्कुराता हुआ, मोरपंख सिर पर, आँखों में असीम करुणा लिए उसके सामने प्रकट हुए हैं – भगवान श्रीकृष्ण।केशव अवाक् रह गया। वो कुछ और शब्द नहीं निकाल पाया, बस काँपते हुए बोला — “मेरा नाम भी केशव है… फिर आपका भी…?” *श्रीकृष्ण मुस्कुराए और कहने लगे— “क्योंकि तेरा नाम मेरा ही प्रतिबिंब है। ‘केशव’ वही है जो भीतर और बाहर दोनों को जीत ले — पर पहले भीतर का अंधकार जीतना पड़ता है, मेरे प्रिय।” केशव रो पड़ा — “पर मुरलीधर, मैं तो बिल्कुल ही हार गया… हर किसी से, यहाँ तक कि खुद से भी।”
*श्रीकृष्ण पास आए।उनकी दृष्टि ऐसी थी कि केशव का भय, रोष और अकेलापन एक साथ पिघल गया। “तू हारा नहीं है,” श्रीकृष्ण ने कहा। “तू बस एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ सत्य और मोह का युद्ध चल रहा है। और जब आत्मा का युद्ध होता है, तो सब बाहर बिखरता है — ताकि भीतर का संगीत फिर जन्म ले सके।” केशव काँपते स्वर में बोला — “पर मेरा संगीत अब मर गया है…” *श्रीकृष्ण हल्के से हँसे उन्होंने अपनी बांसुरी हाथ में ली और कहा — “संगीत कभी मरता नहीं, केशव। वो बस तब तक मौन रहता है जब तक तू अपने भीतर के शोर से मुक्त नहीं हो जाता।” फिर उन्होंने अपनी बाँसुरी होंठों से लगाई। एक सुर निकला — ऐसा जो न धरती का था, न आकाश का। वो सुर जैसे हर टूटे राग को जोड़ रहा था, हर अधूरी प्रार्थना को पूर्ण कर रहा था।
*_केशव की आँखों से आँसू बहने लगे। वो वहीं ज़मीन पर गिर पड़ा। उसने श्रीकृष्ण के चरणों को पकड़ लिया — “प्रभु, मैंने सबको दोष दिया… पर असल में मैं ही अपने भीतर खो गया था।”
*श्रीकृष्ण ने उसके सिर पर हाथ रखा। *“जब तू टूटता है, तब मैं तेरे भीतर जन्म लेता हूँ। जब तू मौन होता है, तब मेरी बाँसुरी बोलती है। और जब तू फिर से प्रेम करना सीखता है — तब तू वास्तव में केशव बन जाता है।” यमुना किनारे हवा थम गई थी। वो बाँसुरी का स्वर, वो नील आभा, सब धीरे-धीरे विलीन हो गए।
*केशव वहीं बैठा रहा —पर अब उसका चेहरा शांत था, आँखों में प्रकाश था। उसने अपनी पुरानी बाँसुरी उठाई, और पहली बार महसूस किया — संगीत अब बाहर ही नहीं, उसके भीतर भी बह रहा है। *अगली सुबह गाँव के लोगों ने सुना — यमुना किनारे एक युवक ऐसा राग बजा रहा था, जिसे सुनकर हर किसी की आँखें भीग गईं।
*_कहा जाता है —वो राग ‘केशव राग’ कहलाया —जो आज भी कुछ आत्माओं के भीतर बजता है, जब वे श्रीकृष्ण के मौन में अपना स्वर ढूँढती हैं।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।।



