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Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 20 फरवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि ••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 20 फरवरी 2026
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌦️ मास – फाल्गुन मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 02:38 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 08:07 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं, जो कर्मफल और न्याय के देवता माने जाते हैं। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता अहिर्बुध्न्य है
⚜️ योग – साध्य योग 06:23 PM तक, उसके बाद शुभ योग
प्रथम करण : गर 02:38 PM तक
द्वितीय करण – वणिज 01:52 AM तक, बाद विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:38:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:54:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 5 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक
🌟 अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक
✡️ विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त – शाम 6 बजकर 12 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा
💧 अमृत काल दोपहर 3 बजकर 28 मिनट से शाम 5 बजकर 1 मिनट तक
💥 भद्रा: सुबह 11:25 से रात 11:45 तक (भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं
☀️ सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग का संयोग शाम 8 बजकर 7 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ रवि योग/ पंचक जारी/ सामाजिक न्याय के विश्व दिवस, समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले, राष्ट्रीय नेतृत्व दिवस, अभिनेता अनु कपूर जन्म दिवस, हरियाणा के दुसरे मुख्यमंत्री राव वीरेन्द्र सिंह जयन्ती, स्वतंत्रता सेनानी शरत चन्द्र बोस स्मृति दिवस, अरुणाचल प्रदेश दिवस, मिजोरम दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
खाने के बर्तन में हाथ धोना- अगर आप खाने के बाद बर्तन में हाथ धोते हैं तो अन्नपूर्णा माता आपसे रुष्ट हो जाती है। ऐसा करने पर आपके घर में दरिद्रता का वास हो सकता है। इसलिए कभी भी खाने के बाद बर्तन में हाथ आपको नहीं धोने चाहिए।
*बंद घड़ियों को घर में रखना- वास्तु के अनुसार घर में बंद घड़िया रखने से भी आपको बचना चाहिए। बंद घड़ियों के कारण आपके जीवन की प्रगति भी रुक सकती है और आपको आर्थिक हानि हो सकती है। *गंदी चादर ओढ़ना- जो लोग घर में बहुत दिनों तक चादर को धोते नहीं हैं और गंदी चादर को ओढ़ते या बिछाते हैं तो इसे भी वास्तु में अशुभ संकेत माना जाता है। इसके कारण आपको धन हानि हो सकती है।
*घर के मुख्य द्वार पर गंदगी रखना- घर के मुख्य द्वार से ही आप भी आपको देवी-देवता भी आपके घर में प्रवेश करते हैं। ऐसे में कभी भी मुख्य द्वार पर आपको कूड़ा, जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए। ऐसा करने से मात लक्ष्मी आपस रूठ सकती हैं। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ चांगेरी घास के औषधीय लाभ
■ शराब और नशे की आदत में मददगार :चांगेरी के नियमित सेवन से शराब और अन्य नशीले पदार्थों की आदत कम करने में मदद मिलती है। यह शरीर को डिटॉक्स करने और मानसिक शक्ति बढ़ाने में सहायक है।
■ *हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी : चांगेरी के पत्तों में पोटैशियम, कैल्शियम, विटामिन C, कैरोटीन और ऑक्सलेट पाए जाते हैं। इससे शरीर में जमा सूजन कम होती है, पित्त संतुलित रहता है और हृदय स्वस्थ रहता है। नियमित सेवन से हृदय की ताकत बढ़ती है और रक्त संचार सुधरता है। ■ त्वचा संबंधी समस्याओं में उपयोगी : चांगेरी में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। इसका पेस्ट या रस त्वचा पर लगाने से पिंपल्स, फोड़े-फुंसियां, काले धब्बे और खुजली में राहत मिलती है। यदि पेस्ट को चंदन या हल्दी के साथ मिलाया जाए तो त्वचा की रोगप्रतिरोधक क्षमता और निखार बढ़ता है। 🍷 *आरोग्य संजीवनी* 🍶
त्रिफला के नाम तथा गुण – हरड, बहेड़ा और आंवला इन तीनों के फल यदि समान भाग से एकत्र किये जायं तो यही त्रिफला कहलाता है। इसके फलत्रिक और वरा ये भी नामान्तर पर है। त्रिफला – कफ तथा पित्त को नाश करनेवाली एवं प्रमेह व कुष्ठ को दूर करनेवाली, दस्तावर, नेत्रों के लिये हितकर, अग्निदीपक, रुचिकारक एवं विषम ज्वर को नाश करने वाली होती है ।
आजकल विद्वान् यद्यपि हरड, बहेड़ा और आंवला – इन तीनों को एक साथ मिलाकर त्रिफला मानते हैं तो भी इनके सम भाग होने मत भेद है। कोई एक भाग हरड, दो भाग बहेड़ा और में तीन भाग आंवला एवं कोई एक भाग हरड, दो भाग बहेड़ा और चार भाग आंवला को त्रिफला कहते हैं। एक हरड़, दो बहेड़े और चार आंवले को भी बहुत लोग त्रिफला मानते हैं। उसी प्रकार एक हरड़ से एक भाग हरड, दो बहेड़ा से दो भाग बहेड़ा और चार आंवले से चार भाग आंवले समझते हैं किन्तु यदि एक हरड, दो बहेड़े और चार आंवले (बनारसी बड़े आंवले से भिन्न ) लिये जायं तो ये प्रायः समभाग ही होते हैं।* *मात्रा – 2 से 5 ग्राम।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
एक कबूतर और एक क़बूतरी एक पेड़ की डाल पर बैठे थे।उन्हें बहुत दूर से एक आदमी आता दिखाई दिया ।क़बूतरी के मन में कुछ शंका हुआ औऱ उसने क़बूतर से कहा कि चलो जल्दी उड़ चले नहीं तो ये आदमी हमें मार डालेगा।क़बूतर ने लंबी सांस लेते हुए इत्मीनान के साथ क़बूतरी से कहा..भला उसे ग़ौर से देखो तो सही, उसकी अदा देखो, लिबास देखो, चेहरे से शराफत टपक रही है, ये हमें क्या मारेगा..बिलकुल सज्जन पुरुष लग रहा है…? क़बूतर की बात सुनकर क़बूतरी चुप हो गई।जब वह आदमी उनके क़रीब आया तो अचानक उसने अपने वस्त्र के अंदर से तीर कमान निकाला औऱ झट से क़बूतर को मार दिया…औऱ बेचारे उस क़बूतर के वहीं प्राण पखेरू उड़ गए….
*असहाय क़बूतरी ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई औऱ बिलखने लगी।उसके दुःख का कोई ठिकाना न रहा औऱ पल भर में ही उसका सारा संसार उजड़ गया।उसके बाद वह क़बूतरी रोती हुई अपनी फरियाद लेकर राजा के पास गई औऱ राजा को उसने पूरी घटना बताई।राजा बहुत दयालु इंसान था। *राजा ने तुरंत अपने सैनिकों को उस शिकारी को पकड़कर लाने का आदेश दिया।तुरंत शिकारी को पकड़ कर दरबार में लाया गया।शिकारी ने डर के कारण अपना जुर्म कुबूल कर लिया।उसके बाद राजा ने क़बूतरी को ही उस शिकारी को सज़ा देने का अधिकार दे दिया औऱ उससे कहा कि ” तुम जो भी सज़ा इस शिकारी को देना चाहो दे सकती हो औऱ तुरंत उसपर अमल किया जाएगा ।
*क़बूतरी ने बहुत दुःखी मन से कहा कि ” हे राजन,मेरा जीवन साथी तो इस दुनिया से चला गया जो फ़िर क़भी भी लौटकर नहीं आएगा, इसलिए मेरे विचार से इस क्रूर शिकारी को बस इतनी ही सज़ा दी जानी चाहिए कि *अगर वो शिकारी है तो उसे हर वक़्त शिकारी का ही लिबास पहनना चाहिए , ये शराफत का लिबास वह उतार दे क्योंकि शराफ़त का लिबास ओढ़कर धोखे से घिनौने कर्म करने वाले सबसे बड़े नीच होते है
*_इसलिए अपने आसपास शराफ़त का ढोंग करने वाले बहरूपियों से हमेशा सावधान रहें……….सतर्क रहें औऱ अपना बहुत ख़याल रखें………!!
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।

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