आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 30 अगस्त 2024
30 अगस्त 2024 दिन शुक्रवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की जया अथवा अजा एकादशी के पारण का निर्णय देखते हैं। तो जैसा की आप जानते हैं, कि तारीख 29 अगस्त 2024 को अर्द्धरात्रि के उपरान्त 01:34 AM बजे से शुरू होकर 30 अगस्त 2024 को अर्द्धरात्री के उपरान्त 01:38 AM बजे तक एकादशी थी। इसलिए आज 30 अगस्त 2024 को पारण का समय सुबह 06: AM से 08: AM बजे तक है। इस समय के भीतर ही सभी जया अथवा अजा एकादशी व्रतियों को एकादशी व्रत का पारण कर लेना चाहिए। आज जैन लोगों का पर्युषण पर्व का आरम्भ हो रहा है। आज स्थायीजययोग है। आज पूर्वसर्वार्थसिद्धियोग भी है।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि 02:25 AM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी तिथि के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुनर्वसु 05:55 PM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी ग्रह बृहस्पति और राशि स्वामी बुध हैं। नक्षत्र की देवी अदिति हैं।
⚜️ योग – व्यातीपात योग 05:46 PM तक, उसके बाद वरीयान योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 01:57 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 02:25 ए एम, अगस्त 31 तक गर
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:42:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:18:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:29 ए एम से 05:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:51 ए एम से 05:58 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:47 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:29 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:45 पी एम से 07:07 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:45 पी एम से 07:52 पी एम
💧 अमृत काल : 03:24 पी एम से 05:05 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, अगस्त 31
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:58 ए एम से 05:56 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को भोजन उपरान्त श्वेत वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
❄️ पर्व एवं त्यौहार – जया(अजा) एकादशी व्रत-(वैष्णव/निम्बार्क)/सर्वार्थसिद्धि योग/ सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश/ राष्ट्रीय समुद्र तट दिवस, राष्ट्रीय कॉलेज रंग दिवस, अमाग्विन्या दिवस, राष्ट्रीय टोस्टेड मार्शमैलो दिवस, राष्ट्रीय समग्र पालतू दिवस, अंतर्राष्ट्रीय व्हेल शार्क दिवस, लघु उद्योग दिवस, पत्रकार राजेन्द्र राठौर जन्म दिवस, प्रख्यात उद्योगपति कृष्ण कुमार बिड़ला स्मृति दिवस, जबरन गुमशुदगी के पीड़ितों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🏘️ Vastu tips_ 🏚️
वास्तु शास्त्र की मानें तो पानी के बर्तन को हमेशा पूर्व और उत्तर दिशा में ही रखना चाहिए। यह आपके घर के बहुत ही शुभ माना गया है। आचार्य श्री गोपी राम ने विस्तार से बताया कि घर के किस स्थान या दिशा में भूलकर भी पानी को नहीं रखा जाना चाहिए।
वास्तु के अनुसार इस स्थान पर रखें जल घर को बनवाते समय यह ध्यान रखें कि पानी की टंकी का स्थान वास्तु के नियमों के हिसाब से ही होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि घर में पानी रखने का स्थान घर के सदस्यों से संबंधित होता है। इसका स्थान वास्तु के अनुसार नहीं है, तो आर्थिक नुकसान होता है। पानी की टंकी का स्थान पश्चिम दिशा की तरफ ही होना चाहिए।
ईशान कोण दिशा में रखें पानी वास्तु शास्त्र की मानें तो घर में पानी का स्थान ईशान कोण पर ही रखें। यह आपके लिए काफी शुभ होता है। पानी का टैंक उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा में ही बनाएं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गुड़मार एक औषधीय पौधा है जो मध्य भारत, दक्षिण भारत और श्रीलंका का देशज है।
यह बेल के रूप में होता है। इसकी पत्ती को खा लेने पर किसी भी मीठी चीज का स्वाद लगभग एक घंटे तक के लिए समाप्त हो जाता है। इसे खाने के बाद गुड़ या चीनी की मिठास खत्म हो जाती है और वह खाने पर रेत के समान लगती है। इस विशेषता के कारण स्थानीय लोग इसे गुड़मार के नाम से पुकारते हैं। मधुमेह में इसका उपयोग प्रायः किया जाता है।
सिर्फ मधुमेह ही नहीं इसका डायरिया, पेचिश, पेट दर्द आदि में भी उपयोग किया जाता है। खास बात है कि गुड़मार के पत्ते ही नहीं बल्कि इसकी जड़ों से भी काफी फायदे होते हैं। इसकी जड़ों का प्रयोग वात रोग, पुराने बुखार में काफी लाभदायक होता है। गुड़मार को हर प्रकार की मिट्टी में देश में कहीं भी उगाया जा सकता है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
हड़जोड़ के गुण-यह हड्डियों को जोड़ने वाली, गर्म, दस्तावर, खाने में रूखी, मधुर, हल्की, पाचक, अधिक लेने पर पित्त की वृद्धि करने वाली होती है।
हड़जोड़ के सेवन से वात-कफ, पेट के कृमि यानी अति सूक्ष्म कीड़े, कीटाणु का जड़ से साफ कर देती है।
हड़जोड़ बवासीर और नेत्ररोग नाशक है।
हड़जोड़ की बड़ी बनाकर खाने से शरीर की समस्त क्षतिग्रस्त वात नाड़ियों की मरम्मत हो जाती है।
बड़ी बनाने की विधि–
हड़जोड़ लकड़ी की छाल को छीलकर शेष लकड़ी का एक भाग तथा छिलके रहित लेकर उड़द की दाल आधा भाग दोनों को पीसकर बड़ी बनाएं, जैसे घर में मुंह की दाल की बनाते हैं।
हड़जोड़ से निर्मित बड़ी को तिल तेल में पकाकर सुबह खाली पेट 25 से 50 ग्राम तक खाकर, गर्म दूध पियें। यह अत्यंत वातनाशक होती है।
हड़जोड़ गर्म रसायन ओषधि है।
प्राचीनकाल के वैद्य हड़जोड़ का रस कान में डालकर कीड़ा निकल देते थे।
हड़जोड़ का उपयोग स्कर्वी रोग में भी किया जाता है।
📘 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
एक बूढ़ा ब्राह्मण था वह रोज पीपल को जल से सींचता था । पीपल में से रोज एक लड़की निकलती और कहती पिताजी मैं आपके साथ जाऊँगी। यह सुनते-सुनते बूढ़ा दिन ब दिन कमजोर होने लगा तो बुढ़िया ने पूछा की क्या बात है ? बूढ़ा बोला कि पीपल से एक लड़की निकलती है और कहती है कि वह भी मेरे साथ चलेगी। बुढ़िया बोली कि कल ले आना उस लड़की को जहाँ छ: लड़कियाँ पहले से ही हमारे घर में है वहाँ सातवीं लड़की और सही।
अगले दिन बूढ़ा उस लड़की को घर ले आया। घर लाने के बाद बूढ़ा आटा माँगने गया तो उसे पहले दिनों की अपेक्षा आज ज्यादा आटा मिला था।
जब बुढ़िया वह आटा छानने लगी तो लड़की ने कहा कि लाओ माँ, मैं छान देती हूँ। जब वह आटा छानने बैठी तो परात भर गई। उसके बाद माँ खाना बनाने जाने लगी तो लड़की बोली कि आज रसोई में मैं जाऊँगी तो बुढ़िया बोली कि ना, तेरे हाथ जल जाएँगे लेकिन लड़की नहीं मानी और वह रसोई में खाना बनाने गई तो उसने तरह-तरह के छत्तीसों व्यंजन बना डाले और आज सभी ने भरपेट खाना खाया। इससे पहले वह आधा पेट भूखा ही रहते थे।
रात हुई तो बुढ़िया का भाई आया और कहने लगा कि दीदी मैं तो खाना खाऊँगा। बुढ़िया परेशान हो गई कि अब खाना कहाँ से लाएगी। लड़की ने पूछा की माँ क्या बात है ? उसने कहा कि तेरा मामा आया है और रोटी खाएगा लेकिन रोटी तो सबने खा ली है अब उसके लिए कहाँ से लाऊँगी। लड़की बोली कि मैं बना दूँगी और वह रसोई में गई और मामा के लिए छत्तीसों व्यंजन बना दिए। मामा ने भरपेट खाया और कहा भी कि ऎसा खाना इससे पहले उसने कभी नहीं खाया है। बुढ़िया ने कहा कि भाई तेरी पावनी भाँजी है उसी ने बनाया है।
शाम हुई तो लड़की बोली कि माँ चौका लगा के चौके का दीया जला देना, कोठे में मैं सोऊँगी। बुढ़िया बोली कि ना बेटी तू डर जाएगी लेकिन वह बोली कि ना मैं ना डरुँगी, मैं अंदर कोठे में ही सोऊँगी। वह कोठे में ही जाकर सो गई। आधी रात को लड़की उठी और चारों ओर आँख मारी तो धन ही धन हो गया। वह बाहर जाने लगी तो एक बूढ़ा ब्राह्मण सो रहा था। उसने देखा तो कहा कि बेटी तू कहाँ चली? लड़की बोली कि मैं तो दरिद्रता दूर करने आई थी। अगर तुम्हें दूर करवानी है तो करवा लो। उसने बूढे के घर में भी आँख से देखा तो चारों ओर धन ही धन हो गया।
सुबह सवेरे सब उठे तो लड़की को ना पाकर उसे ढूंढने लगे कि पावनी बेटी कहां चली गई। बूढ़ा ब्राह्मण बोला कि वह तो लक्ष्मी माता थी जो तुम्हारे साथ मेरी दरिद्रता भी दूर कर गई। हे लक्ष्मी माता ! जैसे आपने उनकी दरिद्रता दूर की वैसे ही सबकी करना।
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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।



