ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 23 फरवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि ••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 23 फरवरी 2026
23 फरवरी 2026 दिन सोमवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष कि षष्ठी तिथि है। आज की षष्ठी तिथि को श्रीस्कन्दषष्ठी व्रत के नाम से जाना जाता है। आज की षष्ठी में गोरुपिणीषष्टी व्रत बंगाल में होता है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “श्रीस्कन्दषष्ठी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।* सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।*
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – सोमवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 09:09 AM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र भरणी 04:33 PM तक उपरांत कृत्तिका
🪐 नक्षत्र स्वामी – भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह है। यह मेष राशि जिसका स्वामी मंगल है। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता (देवता) यमराज हैं,
⚜️ योग : ब्रह्म योग 10:18 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग
प्रथम करण : तैतिल 09:09 AM तक
द्वितीय करण : गर 08:06 PM तक, बाद वणिज
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:35:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:56:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05:37 मिनट से सुबह 06:28 बजे तक
🌇 प्रातः सन्ध्या : शाम 06:03 बजे से शाम 07:18 बजे तक
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर को 12:37 मिनट से दोपहर 13:23 बजे तक
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर को 14:54 मिनट से दोपहर 15:39 बजे तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 18:39 मिनट से शाम 19:04 बजे तक
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:41 मिनट से शाम 19:57 बजे तक
💧 अमृत काल : दोपहर को 16:42 मिनट से शाम 18:20 बजे तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि को 24:34 मिनट से रात्रि 25:24 बजे तक
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवियोग/ श्रीस्कन्दषष्ठी/ गोरुपिणीषष्टी (बंगाल)/ होलाष्टक प्रारम्भ/ कुब्जिका जयन्ती/ मासिक शिवरात्रि/ भद्रा/ पञ्चक/ गण्ड मूल/ आडल योग/ विडाल योग/ अभिनेत्री मधुबाला स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) स्थापना दिवस, बॉलीवुड अभिनेता विजय आनन्द पुण्य तिथि, सहज योग संस्थापक निर्मला श्रीवास्तव पुण्य तिथि, प्रसिद्ध क्रांतिकारी सरदार अजीत सिंह जयन्ती, महर्षि दयानंद सरस्वती जयन्ती, राष्ट्रीय टेनिस दिवस, राष्ट्रीय केले की रोटी दिवस, विश्व समझ और शांति दिवस, कर्लिंग का आनंद दिवस, राष्ट्रीय आतिथ्य सेवा कर्मचारी प्रशंसा दिवस, संत निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक गुरु बाबा हरदेव सिंह जन्म दिवस, प्रसिद्ध क्रांतिकारी सरदार अजीत सिंह जयन्ती, अभिनेत्री मधुबाला स्मृति दिवस, निर्माता व निर्देशक विजय आनंद स्मृति दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है। 🗽 *_Vastu tips* ⛲
घर का दर्पण, खिड़की का शीशा या कोई भी कांच अगर टूट जाए, तो उसे लंबे समय तक घर में न रखें। टूटे शीशे को शुक्र ग्रह से संबंधित माना गया है। ऐसे कांच घर में नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं। माना जाता है कि टूटा शीशा आपकी आर्थिक स्थिति और रिश्तों पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है।* टूटे बर्तन: आती है दरिद्रता ज्यादातर लोग चिटके हुए बर्तनों का बेझिझक इस्तेमाल करते हैं, लेकिन किचन में रखे टूटे बर्तन घर की समृद्धि को प्रभावित करते हैं। इसमें खाना बनाना या खाना दोनों ही वास्तु के अनुसार अशुभ है। माना जाता है कि टूटे बर्तनों की वजह से घर में दरिद्रता प्रवेश करती है और अन्नपूर्णा की कृपा कम हो जाती है। टूटा पलंग: बिगाड़ता है दांपत्य जीवन अगर पति-पत्नी टूटे हुए पलंग पर सोते हैं, तो वास्तु के हिसाब से इसे अशुभ माना जाता है। यह उनके रिश्ते में कड़वाहट, तनाव और कलह ला सकता है। ऐसा माना जाता है कि टूटा फर्नीचर सकारात्मक ऊर्जा को रोक देता है और वैवाहिक जीवन में बाधाएं पैदा करता है। 🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
नाभि पे तेल लगाने से:
*
फ़टे होंठ ठीक नहीं होंगे* आँखों में जलन या सुखपन नहीं जाएगा*
पाचन तंत्र ठीक नहीं होगा* चेहरे की रंगत नहीं ठीक होगी*
घुटने का दर्द ठीक नहीं होगा ..* आँखों की रौशनी तेज़ करने के लिए क्या करें:*
अच्छा और संतुलित आहार लें। टीवी और मोबाइल सिर्फ ज़रूरत के लिए ही इस्तेमाल करें। हो सके बिना टच वाला फ़ोन ले लें। हरियाली और ठंडी हवा , सुभह की धूंप आँखो में लगने दें।* आँखों का व्यायाम करें अपनी हथेली का जो उभरा हुआ हिस्सा है , अंघूठे के निच्चे वाला उस से आँखों को धीरे धीरे मालिश करें। उत्तम होगा की जब सुबह की आरती हो तो घी की दिए की लो से हाथ सेक लें और उसे आँखों पे मलें।*
*मूह में पानी भरकर, आँखों पे ठन्डे पानी के छपके लें। 🥛 *आरोग्य संजीवनी* 🍻 सुपारी खाने से पाचन तंत्र मज़बूत होता है और कब्ज़ से राहत मिलती है.*
सुपारी में मौजूद एंटी- बैक्टीरियल गुण दांतों की सड़न रोकते हैं.* सुपारी खाने से तंत्रिका तंत्र तेज़ होता है, जिससे डिप्रेशन से बचाव होता है.*
सुपारी में मौजूद पॉलीफ़ेनॉल इम्यूनोमॉड्यूलेटरी और एंटी-एलर्जी प्रभाव रखते हैं, जिससे डायरिया से बचाव होता है.* सुपारी खाने से मतली की समस्या में राहत मिलती है.*
सुपारी में मौजूद सैफ़्रोल यूरिन की समस्या को दूर करता है.* सुपारी खाने से एनीमिया जैसी बीमारी से निजात मिलती है.*
सुपारी खाने से आंखों की लालिमा में आराम मिलता है।* *पेट में कीड़े होने पर 10-30 मिली सुपारी के फल का काढ़ा बना लें। इसका सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं।
*इसी तरह, 5 मिली सुपारी के फल का रस पीने से भी पेट की बीमारी ठीक होती है। पेट की गंदगी मल द्वारा बाहर निकल जाती है। दांत दर्द कर रहा हो, तो बराबर-बराबर मात्रा में सुपारी, खदिर, पिप्पली, तथा मरिच का भस्म बना लें। इसे दांतों पर मलें। इससे दांतों का दर्द, मसूड़ों का दर्द, और जीभ के दर्द से राहत (supari benefits) मिलती है। 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
गाँव में एक वृद्ध पंडित जी रहते थे। उनके जीवन का एक ही नियम था—हाथ में भगवद्गीता, मुख पर कृष्ण का नाम और हृदय में धर्म। वे घर-घर जाकर कथा सुनाते और जो रूखा-सूखा मिल जाता, उसी में संतोष कर लेते।
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एक धुंधली शाम, जब पंडित जी कथा कर लौट रहे थे, एक खूँखार चोर ने उनका रास्ता रोक लिया। चमकती हुई छुरी दिखाकर वह गरजा, “पंडित! जो कुछ भी है, चुपचाप मेरे हवाले कर दे, वरना जान से जाएगा!”* पंडित जी तनिक भी विचलित नहीं हुए। उन्होंने शांत भाव से कहा, “बेटा, मेरे पास फटी धोती और इस गीता के अलावा कुछ नहीं है।*
पर हाँ, अगर तू सच में धनवान बनना चाहता है, तो कल मेरी कथा में आना। मैं एक ऐसे खजाने का पता बताऊंगा जिसे लूट लिया तो सात पीढ़ियां तर जाएंगी।” चोर को लगा कि शायद पंडित किसी सेठ के घर की गुप्त तिजोरी की बात कर रहा है। वह मान गया।* अगले दिन, चोर भीड़ में छिपकर बैठ गया। पंडित जी व्यासपीठ से बोले:*
*“भक्तों! मीलों दूर, वृंदावन की कुंज गलियों में एक नन्हा बालक ‘कान्हा’ रहता है। वह सांवला है, उसकी आँखों में जादुई चमक है और वह करोड़ों के हीरों-जवाहरात से लदा रहता है। हर रात वह पीपल के घने पेड़ के नीचे अकेला आता है। जो उसे पा ले, उसके सारे अभाव मिट जाते हैं।” *बाकी लोग इसे आध्यात्मिक उपदेश समझ रहे थे, पर उस चोर ने इसे ‘नक्शा’ मान लिया। उसके मन में लालच नहीं, एक जिद पैदा हो गई—”आज तो उस कान्हा को लूटकर ही रहूँगा!”
*चोर घर पहुँचा और अपनी पत्नी से बोला, “आज बड़े शिकार पर जा रहा हूँ, रास्ते के लिए कुछ खाने को दे दे।” गरीब पत्नी के पास केवल थोड़ा सा सत्तू था, उसने वही पोटली में बांध दिया। *टूटी चप्पलें और फटे कपड़ों में वह चोर नंगे पैर निकल पड़ा। उसके दिमाग में बस एक ही धुन सवार थी—कान्हा… कान्हा…! वह डरता था कि कहीं बच्चा उसे देखकर भाग न जाए, इसलिए उसने छिपने का मन बनाया। जब वह उस बताए हुए स्थान पर झाड़ियों में घुसा, तो नुकीले काँटों ने उसका बदन छलनी कर दिया।
*पर उसे दर्द का अहसास ही नहीं था। वह सत्तू का एक-एक दाना खाता और बुदबुदाता—”कान्हा, तू बस एक बार आ जा, आज तुझे छोड़ूँगा नहीं।” *इधर बैकुंठ में माता रुक्मणी घबरा गईं। उन्होंने देखा कि प्रभु जाने की तैयारी कर रहे हैं।
“स्वामी! वह चोर है, आपको लूटने के इरादे से बैठा है!” रुक्मणी जी बोलीं।
भगवान कृष्ण मंद-मंद मुस्कुराए और बोले, “देवी! दुनिया मुझे छप्पन भोग खिलाकर मांगती है, पर यह पापी मुझे पाने के लिए काँटों पर बैठा है। जो मेरे प्रेम में खुद को मिटाने को तैयार है, उसके हाथों लुटने में भी मुझे सुख मिलता है।”
अंधेरी रात में पायल की झंकार गूंजी। एक अलौकिक बालक नाचता हुआ आया। चोर झाड़ियों से शेर की तरह झपटा और बालक का हाथ पकड़ लिया।
“पकड़ लिया! बहुत भटकाया तूने मुझे। अब चुपचाप ये सारे गहने उतार दे, वरना…”
कान्हा हँसे। ऐसी हंसी कि चोर का पत्थर जैसा दिल मोम की तरह पिघलने लगा। प्रभु बोले, “अरे! डराता क्यों है? यह सब तेरा ही तो है। ले, सब ले ले।” कान्हा ने अपने गले का कौस्तुभ मणि, कुंडल और सारे आभूषण उस चोर की झोली में डाल दिए। चोर स्तब्ध था—जिस बालक को उसने डराया, वह उसे इतनी ममता भरी नज़रों से देख रहा था!
अगले दिन चोर सीधे पंडित जी की कथा में पहुँचा। उसने आधे गहने पंडित जी के चरणों में रख दिए और बोला, “महाराज! ये आपका हिस्सा। आपने ही तो पता बताया था। उस बालक को मैंने लूट लिया!”
पंडित जी की आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने गहनों की चमक देखी तो पहचान गए कि ये इंसानी दुनिया के नहीं हैं। वे रोने लगे, “मैं उम्र भर पोथियाँ पढ़ता रहा, मुझे दर्शन नहीं हुए! और तूने उसे सचमुच ढूंढ लिया?”
पंडित जी चोर के साथ उसी जंगल में गए। दोनों ने पुकारा—”कान्हा… कान्हा!”
*तभी फिर वही बालक प्रकट हुआ। पंडित जी चरणों में गिर पड़े। चोर ने पूछा, “भगवन! कल तो आप अकेले आए थे, * आज इस पंडित के लिए क्यों आए?” *प्रभु बोले, “बेटा! पंडित ने मुझे ‘शास्त्रों’ में खोजा, पर तूने मुझे ‘सच्चाई’ और ‘विश्वास’ से खोजा। तेरी वजह से आज इन्हें भी दर्शन मिले।”
*_परमात्मा को पाने के लिए पांडित्य नहीं, पागलपन चाहिए। वह चतुराई से नहीं, भोलेपन से रीझते हैं।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।

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