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Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 08 अगस्त 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 08 अगस्त 2024
08 अगस्त 2024 दिन गुरुवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी का पावन व्रत है। आज भगवान श्रीगणेश जी की पूजा सनातनी माताओं बहनों द्वारा अपने पुत्रों के दीर्घायु हेतु किया जाता है। गणपति पूजन के उपरान्त रात्रि (09:56 PM) पर चन्द्रमा के निकलने पर उन्हें देखकर अर्घ्य देकर ही अपना व्रत खोलती हैं। आप सभी सनातनियों को “वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 12:37 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी तिथि के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 11:34 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरा फाल्गुनी का स्वामी सूर्य है। उत्तराफाल्गुनी के देवता अर्यमा होते हैं।
⚜️ योग – शिव योग 12:38 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग
प्रथम करण : वणिज – 11:19 ए एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 12:36 ए एम, अगस्त 09 तक बव
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:28:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:32:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:21 ए एम से 05:04 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:43 ए एम से 05:47 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:53 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:40 पी एम से 03:33 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:06 पी एम से 07:28 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:06 पी एम से 08:11 पी एम
💧 अमृत काल : 03:27 पी एम से 05:15 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, अगस्त 09 से 12:48 ए एम, अगस्त 09
❄️ रवि योग : 05:47 ए एम से 11:34 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मं‍त्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को पीले वस्त्र प्रदान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/विनायकी चतुर्थी व्रत/रवियोग/ नाग चतुर्थी उपवास/ दुर्वा गणपति व्रत/ किसान दिवस, राष्ट्रीय डॉलर दिवस, मोहनदास करमचंद गांधी ने ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन शुरुवाती दिवस, राष्ट्रीय सीबीडी दिवस, अंतर्राष्ट्रीय बिल्ली दिवस, राष्ट्रीय व्हाटाबर्गर दिवस, भारतीय क्रिकेटर दिलीप सरदेसाई जन्म दिवस
✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
दक्षिण पश्चिम दिशा में बाथरूम के लिए वास्तु उपाय
अगर आपका बाथरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में है, तो आपको वास्तु के इन उपायों का पालन अवश्य करना चाहिए:
वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम बाथरूम की दीवार के बाहरी भाग पर वास्तु पिरामिड रखना चाहिए।
शौचालय के दरवाजे हमेशा बंद रखने चाहिए।
बाथरूम के दक्षिण-पश्चिम दिशा में धातु का कोई सामान नहीं रखना चाहिए।
वास्तु के अनुसार बाथरूम में एग्जॉस्ट फैन को उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।
बाथरूम की बाहरी दीवार पर तीन या नौ सीसा वाले हेलिक्स रखें। साथ ही आप बाथरूम के दरवाजे के फ्रेम के बाहर लकड़ी के तीन पिरामिड भी रख सकते हैं।
वास्तु अनुरूप आपको पीतल के कटोरे में सादा नमक रखना चाहिए और इसे हर हफ्ते बदलाना चाहिए।
दक्षिण-पश्चिम दिशा में शौचालय और बाथरूम के लिए आपको पीले जैसे हल्के रंगों का उपयोग करना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पिता और पुत्र में नहीं बनती हो तो ये उपाय करे पिता और पुत्र में नहीं बनती हो या आपसी विरोध रहता हो तो या मंगल 9 वे स्थान पर बैठा हो तो नियमित 40 मंगलवार हनुमान जी के चरणों में जाकर 7 मुठी साबुत मसूर और 7 लौंग अर्पित करे
मतभेद दूर करने के लिये पुत्र की पिता से न बनती हो तो अमावस्या, चतुर्दर्शीय या ग्रहण के दिन पुत्र पिता के जूतों से पुराने मोज़े निकाल कर उनमें नए मोज़े रख दे, दोनों के बीच चल रहा वैमनस्य दूर हो जाएगा।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
दम्मा की चिकित्सा :- पान का रस , अदरख का रस, अनार का रस, प्याज का रस, लहसन का रस, पिक्कार का रस 100-100 ग्राम; पीपर 100 ग्राम, काली मिर्च 60 ग्राम। इनको मिला कर रखें।
मदार के 25 पीले पत्तों पर बराबर मात्र में चूना और सेंध नमक पानी में घोलकर पत्तो पे लेप करके, छाया में सुखालें। इसे एक मिट्टी की हांड़ी में बंद करके कन्डो से भरे एक गज लम्बे चौरे गहरे गड्ढे में डालकर फूँक दें।
ठंडा होने पर यह भस्म निकालकर ऊपर की सामग्री में मिलाकर आग पर चढ़ाएं और इसमें 2 किलो बूरा डालकर गधा शरबत बना लें।
👉🏽 मात्रा – इसमें से एक बार चम्मच गरम पानी में मिलाकर पियें। तीन बार।
☝🏼 सावधानी – अधिक मात्रा में सेवन न करें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
एक दिन चूल्हे की आग बुझ गई, बहू भागी-भागी पड़ोसन के घर गई और बोली, “मुझे थोड़ी सी आग दे दो, मेरे चूल्हे की आग बुझ गई है। मेरे सास-ससुर सुबह चार बजे से बाहर गए हुए हैं और वे थके-हारे वापिस आएँगे, मुझे उनके लिए खाना बनाना है।” पड़ोसन कहती है, अरी तू तो बावली है, तूझे तो ये दोनों मिलकर पागल बना रहे हैं। इनका ना कोई बेटा है और ना ही कोई बेटी ही है। बहू बोली, ना, ना आप ऎसे मत बोलो क्योंकि इनका बेटा काशी बनारस पढ़ने गया है। पड़ोसन फिर बोली, अरे, तूझे ये झूठ बोलकर लाए हैं, इनका कोई बेटा नहीं है।
अब बहू पड़ोसन की बातों में आ गई और कहने लगी कि अब आप ही बताओ मैं क्या करूँ ? पड़ोसन कहने लगी, करना क्या है, जब सास-ससुर आयें तब जली-फूँकी रोटी बना देना, अलूनी-पलूनी दाल बना देना।
खीर की कड़छी दाल में और दाल की कड़छी खीर में डाल देना। बहू पड़ोसन की सारी सीख लेकर अपने घर आ गई और जैसा पड़ोसन ने बताया वैसा ही उसने किया। जब सास-ससुर घर आए तब भूखों का कोई आदर-सत्कार बहू ने नहीं किया और ना ही उनके कपड़े धोये।
जब सास-ससुर को खाना दिया तो सास बोली, बहू ये जली-फूँकी रोटी क्यों हैं ? और दाल भी अलूनी है? बहू पलटकर जवाब देती है कि आज यही खाओ सासू जी। अगर एक दिन ऐसा खाना खा भी लिया तो तुम्हारा कुछ बिगड़ नहीं जाएगा। मुझे तो जीवनभर ही अनूठी रहना है। बहू की बातें सुनकर सास बोली कि आज तो बहू ने अच्छी सीख नहीं सीखी है। अब बहू फिर से पड़ोसन के घर भागती है और कहती है कि अब आगे बताओ कि मुझे क्या करना है ? पड़ोसन बोली कि अब तुम सातों कोठों की चाबी माँग लेना।
अगले दिन जब सास जाने लगी तो बहू अड़ गई कि मुझे तो सातों कोठों की चाबी चाहिए तो ससुर कहने लगा कि दे दो इसे चाबी, आज नहीं तो कल चाबी इसे ही देनी है। हम आज हैं कल नहीं इसलिए चाबी दे दो। सास-ससुर के जाने के बाद बहू ने कोठे खोलकर देखे तो किसी में अन्न भरा है, किसी में धन भरा है, किसी में बरतन भरे हैं, सभी में अटूट भंडार भरे पड़े हैं। जब बहू ने सातवाँ कोठा खोला तो उसमें महादेव जी, पार्वती जी, गणेश, लक्ष्मी जी, पीपल पथवारी, कार्तिक के ठाकुर, राई दामोदर, तुलसा जी का बिड़वा, गंगा-जमुना बह रही है, छत्तीस करोड़ देवी-देवता भी विराजमान है और वहीं एक लड़का चंदन की चौकी पर बैठा माला जप रहा है।
सब देख बहू लड़के से कहती है, तू कौन है ? लड़का कहता है कि मेरा तेरा पति हूँ, दरवाजा बन्द कर दे जब मेरे माँ-बाप आयेंगे तब खोलना। सारा नजारा देखकर बहू बहुत खुश हुई और नाचती फिरने लगी। सोलह श्रृंगार कर, सुंदर वस्त्र पहन-ओढ़ सास-ससुर का इंतजार करने लगी। उनके लिए छत्तीस प्रकार के पकवान बनाकर रखे। सास-ससुर जब वापिस आए तब उसने उनका बहुत आदर-सत्कार किया, उनके कपड़े धोए, उनके पैर दबाए। बहू सास के पैर दबाते कहने लगी कि माँ जी आप इतनी दूर बारह कोस यात्रा कर के गंगा-जमुना का स्नान करने जाती हो, थक जाती हो तो तुम घर में स्नान क्यों नहीं करती हो ?
बहू की बात सुन सास कहने लगी कि भला गंगा-जमुना भी घर में बहा करती है क्या ? बहू बोली हाँ माँजी बहती हैं चलो मैं आपको दिखाती हूँ। उसने सातवाँ कोठा खोलकर दिखाया तो उसमें गणेश, लक्ष्मी, महादेव, पार्वती, पीपल पथवारी माता लहरा रही है, तुलसा जी लहरा रही है, कार्तिक के ठाकुर, राई दामोदर, गंगा जमुना बह रही है। छत्तीस करोड़ देवी-देवता विराजमान है और वहीं तिलक लगाए चंदन की चौकी पर एक लड़का माला जप रहा है। माँ ने कहा कि तू कौन है ? लड़का बोला, माँ मैं तेरा बेटा हूँ। बुढ़िया फिर बोली, तू कहाँ से आया है ? लड़के ने कहा कि मुझे कार्तिक देवता ने भेजा है।
बुढ़िया कहती है कि बेटा ये दुनिया कैसे जानेगी, कैसे जानेगा मेरा घर का धनी, क्या जानेंगी देवरानी-जेठानी, क्या जानेगा मेरा अगड़-बगड़ पड़ोस कि तू मेरा ही बेटा है ? बुढ़िया ने विद्वान पंडितों से सलाह ली तो वह बोले, इस पार बहू-बेटा साथ खड़े हो जायें और उस पार बुढ़िया खड़ी हो जाये। बुढ़िया चाम (चमड़ा) की अंगिया (ब्लाउज) पहने, छाती में से दूध की धार निकल जाये, बेटे की दाढ़ी-मूँछ भीग जायें, पवन पानी से गठजोड़ा बँध जाये तो जब जाने कि यह बुढ़िया का ही बेटा है। उसने ऎसा ही किया।
चाम की अंगिया फट गई, छाती में से दूध की धार निकली, बेटे की दाढ़ी-मूँछ भीग गई, पवन पानी से बहू बेटे का गठजोड़ बंध गया। ब्राह्मण-ब्राह्मणी की खुशी का पार ना रहा, वे बहुत खुश हुए। हे कार्तिक के ठाकुर, राई दामोदर भगवान ने जैसे बहू-बेटा उसको दिए वैसे सभी को देना।_
समाप्त
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।

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