ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 30 दिसम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 30 दिसम्बर 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 *
दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
*मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए। *मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल*
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार पौष माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 07:51 AM तक उपरांत एकादशी तिथि 05:00 AM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र भरणी 03:58 AM तक उपरांत कृत्तिका
🪐 नक्षत्र स्वामी – भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, जबकि इस नक्षत्र के देवता यमराज (यम) हैं।
⚜️ योग – सिद्ध योग 01:01 AM तक, उसके बाद साध्य योग
प्रथम करण : गर – 07:50 ए एम तक वणिज – 06:28 पी एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 05:00 ए एम, दिसम्बर 31 तक बव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:51:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:16:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:24 ए एम से 06:19 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:51 ए एम से 07:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:03 पी एम से 12:44 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:07 पी एम से 02:49 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:31 पी एम से 05:59 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:34 पी एम से 06:56 पी एम
💧 अमृत काल : 11:35 पी एम से 01:03 ए एम, दिसम्बर 31
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:57 पी एम से 12:51 ए एम, दिसम्बर 31
🪷 त्रिपुष्कर योग : 05:00 ए एम, दिसम्बर 31 से 07:14 ए एम, दिसम्बर 31
सर्वार्थ सिद्धि योग : 03:58 ए एम, दिसम्बर 31 से 07:14 ए एम, दिसम्बर 31
❄️ रवि योग : 07:13 ए एम से 03:58 ए एम, दिसम्बर 31
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ त्रिपुष्कर योग/ पुत्रदा एकादशी (सर्वे स्मार्त)/ महान संत रमण महर्षि जन्मोत्सव/ मुस्लिम लीग स्थापना दिवस, वैज्ञानिक विक्रम साराभाई स्मृति दिवस, सद्दाम हुसैन शहीद दिवस, हिंदी कवि दुष्यंत कुमार जन्म दिवस, बिहार के स्वतंत्रता सेनानी श्रीलाल शुक्ल जयन्ती, पूर्व मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय जन्म दिवस, राष्ट्रीय संकल्प योजना दिवस, राष्ट्रीय बाइकार्बोनेट ऑफ सोडा दिवस, भारतीय प्रख्यात उद्योगपति भाई मोहन सिंह जन्म दिवस, भारतीय शेर दलाल हर्षद मेहता स्मृति दिवस, बंदर दिवस (Monkey Day)
✍🏼 तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
🏘️ Vastu tips 🏚️
कलावा को हिंदू धर्म में मंगलसूचक धागा कहा जाता है। पूजा-पाठ, अनुष्ठान और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत इसी के साथ की जाती है। यह एक रक्षा कवच की तरह काम करता है और घर में सकारात्मकता को आकर्षित करता है।
घर की तिजोरी, कैश बॉक्स या पैसे रखने वाली अलमारी पर कलावा बांधना बेहद शुभ माना जाता है। इसे देवी लक्ष्मी का स्थान माना जाता है। यहां कलावा बांधने से धन की स्थिरता, बरकत और आर्थिक वृद्धि होती है।
*वास्तु के अनुसार कलश देवी-देवताओं और पवित्र नदियों का प्रतीक है। पूजा में रखे कलश के मुख पर कलावा बांधने से घर में शांति, पवित्रता और मानसिक शीतलता बनी रहती है। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ क्रोध से बचने के उपाय : एकांत में आर्तभाव से व सच्चे ह्रदय से भगवान से प्रार्थना कीजिये कि ‘हे प्रभो ! मुझे क्रोध से बचाइये |’ जिस पर क्रोध आ जाय उससे बड़ी नम्रता से, सच्चाई के साथ क्षमा माँग लीजिये | सात्त्विक भोजन करे | लहसुन, लाल मिर्च एवं तली हुई चीजों से दूर रहें | भोजन चबा-चबाकर कम-से-कम 25 मिनट तक करें | क्रोध की अवस्था में या क्रोध के तुरंत बाद भोजन न करें। भोजन से पूर्व हास्य-प्रयोग करने को कहते थे | अपने आश्रमों में भी भोजन से पूर्व हास्य-प्रयोग किया जाता है, साथ ही कुछ पंक्तियों का पाठ और जयघोष भी किया जाता है तो कभी ‘जोगी रे …’ भजन की कुछ पंक्तियाँ गायी जाती हैं | इस प्रकार रसमय होकर फिर भोजन किया जाता है | इस प्रयोग को करने से क्रोध से सुरक्षा तो सहज में ही हो जाती है और साथ-ही-साथ चित्त भगवद आनंद, माधुर्य से भी भर जाता है। 🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
हड़जोड़ क्या है हड़जोड़ जैसा की नाम से ही पता लगता है की यह हड्डियों को जोड़ने के काम आता होगा और यह बात सही भी है। प्राचीन काल से ही आयुर्वेद के अनुसार हड़जोड़ को हड्डियों को जोड़ने की औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
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हड़जोड़ में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और एंटीइंफ्लैमटरी गुण होने के कारण हड्डियों की समस्या के लिए रामबाण औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसर हड़जोड़ का पत्ता, तना और जड़ को एक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
*हड़जोड़ खाने का तरीका निम्नलिखित होता है क्योंकि हड़जोड़ को एक औषधि के रूप में कई सारी बीमारियों के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसलिए हड़जोड़ खाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। हड़जोड़ को कौन-कौन सी बीमारी में किस तरह उपयोग में लाया जाता है विस्तार से बता रहे हैं। 🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
एक गांव में कृष्णा बाई नाम की बुढ़िया रहती थी वह भगवान श्रीकृष्ण की परमभक्त थी। वह एक झोपड़ी में रहती थी। कृष्णा बाई का वास्तविक नाम सुखिया था पर कृष्ण भक्ति के कारण इनका नाम गांव वालों ने कृष्णा बाई रख दिया।
*घर घर में झाड़ू पोछा बर्तन और खाना बनाना ही इनका काम था। कृष्णा बाई रोज फूलों का माला बनाकर दोनों समय श्री कृष्ण जी को पहनाती थी और घण्टों कान्हा से बात करती थी। गांव के लोग यहीं सोचते थे कि बुढ़िया पागल है। *एक रात श्री कृष्ण जी ने अपनी भक्त कृष्णा बाई से यह कहा कि कल बहुत बड़ा भूचाल आने वाला है तुम यह गांव छोड़ कर दूसरे गांव चली जाओ।
अब क्या था मालिक का आदेश था कृष्णा बाई ने अपना सामान इकट्ठा करना शुरू किया और गांव वालों को बताया कि कल सपने में कान्हा आए थे और कहे कि बहुत प्रलय होगा पास के गाव में चली जा।
*लोग कहाँ उस बूढ़ी पागल का बात मानने वाले जो सुनता वहीं जोर जोर ठहाके लगाता। इतने में बाई ने एक बैलगाड़ी मंगाई और अपने कान्हा की मूर्ति ली और सामान की गठरी बांध कर गाड़ी में बैठ गई। और लोग उसकी मूर्खता पर हंसते रहे। *बाई जाने लगी बिल्कुल अपने गांव की सीमा पार कर अगले गांव में प्रवेश करने ही वाली थी कि उसे कृष्ण की आवाज आई – अरे पगली जा अपनी झोपड़ी में से वह सुई ले आ जिससे तू माला बनाकर मुझे पहनाती है। यह सुनकर बाई बेचैन हो गई तड़प गई कि मुझसे भारी भूल कैसे हो गई अब मैं कान्हा का माला कैसे बनाऊंगी?
*उसने गाड़ी वाले को वहाँ रोका और बदहवास अपने झोपड़ी की तरफ भागी। गांव वाले उसके पागलपन को देखते और खूब मजाक उडाते। *बाई ने झोपड़ी में तिनकों में फंसे सुई को निकाला और फिर पागलो की तरह दौडते हुए गाड़ी के पास आई। गाड़ी वाले ने कहा कि माई तू क्यों परेशान हैं कुछ नही होना। बाई ने कहा अच्छा चल अब अपने गांव की सीमा पार कर। गाड़ी वाले ने ठीक ऐसे ही किया।
पर यह क्या? जैसे ही सीमा पार हुई पूरा गांव ही धरती में समा गया। सब कुछ जलमग्न हो गया। गाड़ी वाला भी अटूट कृष्ण भक्त था। येन केन प्रकरेण भगवान ने उसकी भी रक्षा करने में कोई विलम्ब नहीं किया। प्रभु जब अपने भक्त की मात्र एक सुई तक की इतनी चिंता करते हैं तो वह भक्त की रक्षा के लिए कितना चिंतित होते होंगे। जब तक उस भक्त की एक सुई उस गांव में थी पूरा गांव बचा था। इसीलिए कहा जाता है कि:-
भरी बदरिया पाप की बरसन लगे अंगार।* संत न होते जगत में जल जाता संसार॥ 🚩‼️⚜️जय श्री राधे कृष्ण ⚜️‼️🚩 ••••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤•••• ⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।। *यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।

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