धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 19 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 19 जून 2025
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास प्रारम्भ
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 11:55 AM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 11:16 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी शनि है। वहीं, इस नक्षत्र का राशि स्वामी गुरु (बृहस्पति) है.
⚜️ योग – सौभाग्य योग 02:45 AM तक, उसके बाद शोभन योग
प्रथम करण : कौलव – 11:55 ए एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 10:55 पी एम तक गर
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:50 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:20 पी एम से 07:40 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:22 पी एम
💧 अमृत काल : 06:42 पी एम से 08:13 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, जून 20 से 12:43 ए एम, जून 20
सर्वार्थ सिद्धि योग : 11:17 पी एम से 05:24 ए एम, जून 20
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को सवाकिलो पीले फल भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मूल प्रारंभ/सर्वार्थसिद्धि योग/श्री शीतलाष्टमी/ पंचक जारी/ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जन्म दिवस, महाराष्ट्र शिवसेना स्थापना दिवस, विश्व सिकल सेल दिवस, अभिनेत्री शिवानी रघुवंशी जन्म दिवस, जूनटीन्थ राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस, विश्व सैर-सपाटा दिवस, विश्व एथनिक दिवस, संघर्ष में यौन हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माधवराव सप्रे जयन्ती, नीरज मित्तल समाजसेवी महेंद्रगढ़ हरियाणा जन्म दिवस, अभिनेता मुकेश खन्ना जन्म दिवस, सुभाष मुखोपाध्याय स्मृति दिवस, विश्व एथनिक दिवस (World Ethnic Day in Hindi)
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
पश्चिम दिशा में किचन का होना शुभ या अशुभ?
वास्तु शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम की मानें तो रसोईघर आग्नेय कोण (दक्षिण पूर्व दिशा) में होना शुभ होता है क्यों आग्नेय कोण की दिशा का स्वामी शुक्र ग्रह है। शुक्र ही सुख और समृद्धि देता है। किचन अगर आग्नेय कोण में नहीं है तो पूर्व में चलेगा। ऐसे में अगर आपका किचन पश्चिम दिशा में है तो यह अशुभ है और इससे आपके घर-परिवार में गंभीर बीमारी देखने को मिलती रहेगी। इससे गृह कलह, परेशानी और दुर्घटना होने का योग बनता रहता है। ऐसे में पश्चिम दिशा में रसोई का होना शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि किचन अग्नि तत्व का प्रतीक है।इसके अलावा, नैऋत्य कोण यानी दक्षिण पश्चिम भी किचन के लिए आदर्श नहीं माना जाता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गर्मी में सत्तू के शीतल गुण: भुने हुए चने या जौ से बना सत्तू शीतवीर्य होता है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर में ठंडक पहुँचाता है। चरक संहिता के अनुसार, गर्मियों में पित्त दोष की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे अम्लता, जलन, घबराहट, पसीना, और थकावट जैसी स्थितियाँ होती हैं। सत्तू का शरबत इस पित्त वृद्धि को शांत करता है। इसमें मृदु लघुता (हल्कापन) होने के कारण यह पचने में आसान होता है और दीपन (भूख बढ़ाने वाला) व पाचन गुण भी रखता है।
जलतृषा और लवण संतुलन: गर्मियों में अत्यधिक पसीना शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स (लवण) की कमी कर देता है। सत्तू में यदि थोड़ा सेंधा नमक, भुना जीरा और नींबू मिलाया जाए, तो यह एक आदर्श ओरल रिहाइड्रेशन (जल पुनर्संयोजन) पेय बन जाता है। यह तृष्णा (प्यास) को शांत करता है — जैसा कि चरक ने कहा है:
“शीतं लघु स्निग्धं तृष्णाशमनं…
अर्थात ठंडे और लघु पेयों का सेवन तृष्णा को शांत करता है और शरीर में क्लेश (दाह-ज्वर) को मिटाता है।
बलवर्धन और भूख का नियंत्रण: सत्तू में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और रेशे (फाइबर) संतुलित मात्रा में होते हैं। यह बल्य (शक्ति देने वाला) होता है और दिनभर की थकान में ऊर्जा प्रदान करता है, साथ ही पाचन को बिना भारी किए हुए पेट भरने का अनुभव कराता है। इससे बार-बार भूख लगने की प्रवृत्ति पर भी नियंत्रण रहता है।
आरोग्य संजीवनी 🍶
पेट दर्द और अपच के लिए अजवाइन का पानी
अगर पेट में दर्द, गैस या अपच की समस्या हो, तो दादी माँ का यह नुस्खा तुरंत राहत देता है।
सामग्री:
1 छोटा चम्मच अजवाइन
1 कप पानी
चुटकी भर काला नमक (वैकल्पिक)
बनाने की विधि:
एक बर्तन में 1 कप पानी गर्म करें।
इसमें 1 छोटा चम्मच अजवाइन डालें और 3-4 मिनट तक उबालें।
पानी को गुनगुना होने दें, फिर इसे छान लें।
चाहें तो इसमें चुटकी भर काला नमक मिलाएँ।
इसे धीरे-धीरे घूँट-घूँट पियें।
फायदा:
यह नुस्खा पेट की गैस, अपच और हल्के पेट दर्द को ठीक करता है। अजवाइन पाचन को बेहतर बनाती है और पेट को हल्का रखती है। दिन में 1-2 बार ले सकते हैं।
📚 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
कोई धर्म-कर्म- दान- पुण्य को मानता है और कोई धर्म- कर्म- दान- पुण्य को बिल्कुल नहीं मानता ? ऐसा क्यों ?
यह सब हमारे बदलते परिपेक्ष्य और ज्ञान के स्तर के हमारे अंतःकरण पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण होता है। परंतु यदि हम हमारे द्वारा की जाने वाली क्रियाओं के क्रियान्वयन की रूप-रेखा को जान लें तो बिना औपचारिक कर्म-कांडों के भी अपने जीवन को सही दिशा दे सकते हैं।
मेरे धर्मपंथ में मान्य ब्रह्मविद्या शास्त्र ने कहा गया है — क्रिया उभयरूपा।
जिसका भावार्थ यह है कि मनुष्य द्वारा की जाने वाली सकाम क्रिया उसके उद्देश्य और परिणामों के आधार पर दो प्रकार के कर्म-फलों को जन्म देती है — पाप और पुण्य और कभी पाप-पुण्य मिश्रित रूप में भी होते हैं।
पाप कर्म का फल दुख होता है और पुण्य कर्म का फल सुख होता है।
मनुष्य योनि में किए गए इन कर्मों के फल कभी तो उनके परिणामों के साथ के साथ ही मिल जाते हैं और कभी देर से समुचित समय पर वर्तमान जन्म में या आने वाले जन्मों में विभिन्न योनियों के रूप में भी मिलते हैं।
परंतु, यदि क्रिया निष्काम भाव से की जाती है तो उसके परिणाम जो भी हों, उनके पाप या पुण्य रूप में कर्मफल नहीं मिलते।
निष्काम भाव अर्थात् बिना किसी कर्मफल की इच्छा के अपने हिस्से में आये कर्तव्यों की पूर्ति दुख-सुख सहते हुए परमेश्वर के वचनों के अनुसार करना।
हम दुख-सुख सहते हुए जैसे-जैसे अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, वैसे-वैसे हमारे पिछले कर्मों के आधार पर हमारे प्रारब्ध में लिखे पाप-पुण्य कर्मफलों का क्षालन होता जाता है।
यदि कर्तव्यों का पालन सकाम रूप में हो, जैसा कि जन्म-जन्मांतरों से होता आया है, तो इस प्रकार की गईं क्रियाओं के एवज़ में हमारा नया प्रारब्ध तैयार होता जाता है और हमारा योनि-चक्र चलता रहता है।
परंतु, जैसा कि ऊपर कहा है, यदि हम अपने हिस्से में आए कर्तव्यों की पूर्ति निष्काम भाव से करते हैं तो इस प्रकार की गईं क्रियाओं के एवज़ में हम नए कर्मफलों के भागीदार नहीं बनते। अतः पिछले कर्मफलों के क्षालन के साथ-साथ हमारी इच्छाएँ और पाप-पुण्य शून्य होते जाते हैं और हम परमेश्वर के परमानंदयुक्त मोक्ष के सुपात्र बनते जाते हैं।
“बहुत कठिन है डगर पनघट की”, परंतु असंभव नहीं है।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।

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