Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 10 मई 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 10 मई 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – वैशाख मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 05:30 PM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र चित्रा 03:15 AM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है, तथा इस नक्षत्र के देवता विश्वकर्मा हैं।
⚜️ योग – सिद्धि योग 04:00 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 05:29 पी एम तक
✨ द्वितीय करण – गर – पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:26:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:34:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:09 ए एम से 04:51 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:30 ए एम से 05:33 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:32 पी एम से 03:26 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:01 पी एम से 07:22 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:02 पी एम से 08:05 पी एम
💧 अमृत काल : 08:01 पी एम से 09:50 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:56 पी एम से 12:38 ए एम, मई 11
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 03:15 ए एम, मई 11 से 05:33 ए एम, मई 11
❄️ रवि योग : 05:33 ए एम से 03:15 ए एम, मई 11
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में सात बादाम चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/रवियोग/गृहप्रवेश/गृहारंभ/ विश्व निष्पक्ष व्यापार दिवस , राष्ट्रीय रेलगाड़ी दिवस, राष्ट्रीय पवनचक्की दिवस, मातृ महासागर दिवस, विश्व ल्यूपस दिवस, अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस, राष्ट्रीय वाशिंगटन दिवस, अंतर्राष्ट्रीय अर्गानिया दिवस, संगीतकार पंकज मलिक जन्म दिवस, स्वतन्त्रता सेनानी प्रफुल्लचंद चाकी स्मृति दिवस, ‘पद्म श्री’ से सम्मानित’ नेकराम शर्मा जन्म दिवस, मई दिवस (विश्व श्रमिक दिवस), महाराष्ट्र स्थापना दिवस, गुजरात स्थापना दिवस
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
गाय को रोटी खिलाने का चमत्कार वास्तु शास्त्र में एक और खास उपाय बताया गया है, जो आपके बिजनेस को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। हर शुक्रवार को गाय को दो रोटी जरूर खिलाएं। ऐसा करने से जिंदगी में आने वाली परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।
गाय को रोटी खिलाना न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि ये आपके व्यापार में सफलता दिलाने में भी मदद करता है। अगर आप बिजनेस में लगातार तरक्की चाहते हैं, तो इस आसान उपाय को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
छोटे उपाय, बड़ा असर ये वास्तु उपाय बेहद आसान हैं और इन्हें अपनाने में ज्यादा समय या मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती। शाम के समय थोड़ा सा वक्त निकालकर इन उपायों को आजमाएं और अपने बिजनेस में बदलाव देखें।
ये न सिर्फ आपके व्यापार को नई दिशा देंगे, बल्कि आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में मदद करेंगे। तो देर किस बात की? आज से ही इन उपायों को अपनाएं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि को आमंत्रित करें।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आइए इसके फ़ायदों की तरफ़ नज़र दौड़ा लेते हैं। सरसों का तेल बालों के लिए बेहद फ़ायदेमंद रहता है।
सरसों का तेल बालों को लंबा और मज़बूत करता है, और सिर पर इसकी मालिश सकैल्प को पोषण देने का काम करता है।
इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, सरसों के तेल में बीटा कैरोटीन, फैटी एसिड, आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं.
अगर आपके बाल झड़ रहें हो तो गर्म सरसों के तेल से अपने सिर पर मालिश करें, इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने से आपके बालों की ग्रोथ अच्छी होगी।
सरसों का तेल बालों में होने सभी तरह की समस्याओं को दूर करने में मदद करता ही है, साथ ही बालों को लंबे समय तक काला रखने में भी सहायक होता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
गर्म पानी के फोटे दोपहर या रात के समय दो चम्मच नमक युक्त गर्म पानी में भिगो लें। फिर इसे घुटनों पर लगाएं और धीरे-धीरे मसाज करें। यह दर्द को कम करने में मदद करेगा।
हल्दी एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेट्रीय होती है जो घुटनों के दर्द को कम करने में मदद कर सकती है। एक चम्मच हल्दी को एक कप गर्म दूध में मिलाकर रोजाना पीएं।
अदरक अन्य एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेट्रीय होता है जो घुटनों के दर्द को कम करने में मदद कर सकता है। अदरक को पीसकर एक छोटे से टुकड़े में काटें और उसे घुटनों पर लगाएं। इसे घुटनों पर 20-30 मिनट के लिए रखें।
सरसों का तेल एक अन्य घरेलू उपाय है जो घुटने के दर्द को कम कर सकता है। सरसों के तेल को गरम करें और फिर इसे घुटनों पर मलें। यह दर्द को कम करने में मदद करेगा।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक बार भगवान विष्णु वैकुण्ठ लोक में लक्ष्मी जी के साथ विराजमान थे। उसी समय उच्चेः श्रवा नामक अश्व पर सवार होकर रेवंत का आगमन हुआ। उच्चेः श्रवा अश्व सभी लक्षणों से युक्त, देखने में अत्यंत सुन्दर था। उसकी सुंदरता की तुलना किसी अन्य अश्व से नहीं की जा सकती थी।अतः लक्ष्मी जी उस अश्व के सौंदर्य को एकटक देखती रह गई। जब भगवान विष्णु ने लक्ष्मी को मंत्रमुग्ध होकर अश्व को देखते हुए पाया तो उन्होंने उनका ध्यान अश्व की ओर से हटाना चाहा, लेकिन लक्ष्मी जी देखने में तल्लीन रही।झकझोरने पर भी लक्ष्मी जी की तंद्रा भंग नहीं हुई तब इसे अपनी अवहेलना समझकर भगवान विष्णु को क्रोध आ गया और खीझंकर लक्ष्मी को शाप देते हुए कहा- “तुम इस अश्व के सौंदर्य में इतनी खोई हो कि मेरे द्वारा बार-बार झकझोरने पर भी तुम्हारा ध्यान इसी में लगा रहा, अतः तुम अश्वी हो जाओ।”जब लक्ष्मी का ध्यान भंग हुआ और शाप का पता चला तो वे क्षमा मांगती हुई समर्पित भाव से भगवान विष्णु की वंदना करने लगी- “मैं आपके वियोग में एक पल भी जीवित नहीं रह पाउंगी, अतः आप मुझ पर कृपा करे एवं अपना शाप वापस ले ले।”अपने शाप में सुधार करते हुए कहा- “शाप तो पूरी तरह वापस नहीं लिया जा सकता। लेकिन हां, तुम्हारे अश्व रूप में पुत्र प्रसव के बाद तुम्हे इस योनि से मुक्ति मिलेगी और तुम पुनः मेरे पास वापस लौटोगी।
”भगवान विष्णु के शाप से अश्वी बनी हुई लक्ष्मी जी यमुना और तमसा नदी के संगम पर भगवान शिव की तपस्या करने लगी। लक्ष्मी जी के तप से प्रसन्न होकर शिव पार्वती के साथ आए। उन्होंने लक्ष्मी जी से तप करने का कारण पूछा तब लक्ष्मी जी ने अश्वी हो जाने से संबंधित सारा वृतांत उन्हें सुना दिया और अपने उद्धार की उनसे प्रार्थना की।तब भगवान शिव ने कहा- “देवी ! तुम चिंता न करो। इसके लिए मैं विष्णु को समझाऊंगा कि वे अश्व रूप धारणकर तुम्हारे साथ रमण करे और तुमसे अपने जैसा ही पुत्र उत्पन्न करे ताकि तुम उनके पास शीघ्र वापस जा सको।”भगवान शिव की बात सुनकर अश्वी रूप धारी लक्ष्मी जी को काफी प्रसन्नता हुई। उन्हें यह आभास होने लगा कि अब मैं शीघ्र ही शाप के बंधन से मुक्त हो जाउंगी और श्री हरि (विष्णु) को प्राप्त कर लुंगी।भगवान शिव वहां से चले गए। अश्वी रूप धारी लक्ष्मी जी पुनः तपस्या में लग गई। काफी समय बीत गया। लेकिन भगवान विष्णु उनके समीप नहीं आए। तब उन्होंने भगवान शिव का पुनः स्मरण किया। भगवान शिव प्रकट हुए। उन्होंने लक्ष्मी जी को संतुष्ट करते हुए कहा- “देवी ! धैर्य धारण करो। धैर्य का फल मीठा होता है। विष्णु जी अश्व रूप में तुम्हारे समीप अवश्य आएंगे।इतना कहकर भगवान शिव अंतर्धान हो गए। कैलाश पहुंचकर भगवान शिव विचार करने लगे कि विष्णु को कैसे अश्व बनाकर लक्ष्मी जी के पास भेजा जाए। अंत में, उन्होंने अपने एक गण-चित्ररूप को दूत बनाकर विष्णु के पास भेजा।चित्ररूप भगवान विष्णु के लोक में पहुंचे। भगवान शिव का दूत आया है, यह जानकर भगवान विष्णु ने दूत से सारा समाचार कहने को कहा।
दूत ने भगवान शिव की सारी बाते उन्हें कह सुनाई।अंत में, भगवान विष्णु शिव का प्रस्ताव मानकर अश्व बनने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने अश्व का रूप धारण किया और पहुंच गए यमुना और तपसा के संगम पर जहां लक्ष्मी जी अश्वी का रूप धारण कर तपस्या कर रही थी। भगवान विष्णु को अश्व रूप में आया देखकर अश्वी रूप धारी लक्ष्मी जी काफी प्रसन्न हुई।दोनों एक साथ विचरण एवं रमण करने लगे। कुछ ही समय पश्चात अश्वी रूप धारी लक्ष्मी जी गर्भवती हो गई। यथा समय अश्वी के गर्भ से एक सुन्दर बालक का जन्म हुआ। तत्पश्चात लक्ष्मी जी वैकुण्ठ लोक श्री हरि विष्णु के पास चली गई।लक्ष्मी जी के जाने के बाद उस बालक के पालन पोषण की जिम्मेवारी ययाति के पुत्र तुर्वसु ने ले ली, क्योंकि वे संतान हीन थे और पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ कर रहे थे। उस बालक का नाम हैहय रखा गया। कालांतर में हैहय के वंशज ही हैहयवंशी कहलाए।विशेष,,,, इस पौराणिक कथा से स्पष्ट है कि जिस तरह गाय में 33 कोटि देवता माने जाते हैं उसी तरह अन्य कई पशु पक्षियों में देवताओं का वास होता है l पांच पशु ऎसे है जिनकी संज्ञा तामसिक व्रतियों से दी है वे है == बकरे, महिष , ऊंट, बिलाव, एवं मेढ़ाlये काम, क्रोध, मद, लोभ एवं मोह का प्रतिनिधित्व करते हैं अतः इनका मांस एवं दूध तामसिक प्रवृत्ति का निर्माण करते हैं l इन पशु पक्षियों को आहार खिलाने से वैश्वानर यज्ञ के पुण्य प्राप्त होते हैं l इस पौराणिक कथा को पढ़ कर यह सत्य भी उजागर होता है की ” पुनर्जन्म” की अवधारणा सत्य है l
हमारी प्रवृतियों के तामसिक होने पर हमे इन अधम योनियों में जन्म लेना पड़ता है l
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।


