ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 31 मार्च 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 31 मार्च 2026
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌝 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 06:56 AM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 03:20 PM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। इस नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता भग हैं, जो धन और सौभाग्य प्रदान करते हैं।
⚜️ योग : गण्ड योग 03:41 PM तक, उसके बाद वृद्धि योग
प्रथम करण : तैतिल 06:56 AM तक
द्वितीय करण : गर 06:58 PM तक, बाद वणिज
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदय प्रातः 06:13:05
🌅 सूर्यास्त संध्या 18:38:18
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:40 ए एम से 05:26 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : सु 05:03 ए एम से 06:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:01 पी एम से 12:50 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:37 पी एम से 07:00 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:38 पी एम से 07:48 पी एम
💧 अमृत काल : सुबह 08:48 ए एम से 10:26 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 12:02 ए एम, अप्रैल 01 से 12:48 ए एम, अप्रैल 01
❄️ रवि योग : सुबह 06:13 ए एम से 03:20 पी एम 08:16 पी एम से 06:11 ए एम, अप्रैल 01
🚓 यात्रा शकुन- मंगलवार को दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भक्ति महावीर स्वामी जयन्ती/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ हिन्दी लेखक रमा शंकर व्यास जन्म दिवस, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित जन्म दिवस, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर दृश्यता दिवस, सीज़र चावेज़ दिवस, राष्ट्रीय प्रॉम दिवस, भारतीय महिला चिकित्सक आनंदीबाई गोपालराव जोशी जन्म दिवस, इतिहासकार दत्तात्रेय बलवंत पारसनिस पुण्य तिथि, अभिनेत्री मीनाकुमारी स्मृति दिवस, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष गुरुचरण सिंह तोहरा स्मृति दिवस, उड़ीसा के मुख्यमंत्री राजेंद्र नारायण सिंह देव जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
देख भाई, अगर तू घर में सिलाई मशीन रखने की सोच रहा है, तो वास्तु का चक्कर समझ ले वरना काम में बरकत नहीं होगी। सिलाई मशीन ‘धारदार’ और ‘लोहे’ की चीज़ है, इसलिए इसे कहीं भी पटक देना सही नहीं है। वास्तु के हिसाब से मशीन रखने की सबसे धाकड़ जगह उत्तर-पश्चिम (North-West) कोना है, जिसे वायव्य कोण कहते हैं। इस कोने में मशीन रखने से तेरा काम बिना किसी रुकावट के सर्र-सर्र चलेगा और घर में फालतू का कलेश भी नहीं होगा। अगर वहां जगह नहीं बन रही, तो तू इसे दक्षिण-पश्चिम (South-West) यानी नैऋत्य कोण में भी सेट कर सकता है, बस ध्यान रखियो कि मशीन भारी होती है तो उसे ज़मीन पर मजबूती से टिका के रख।
*एक बात और गांठ बांध ले, मशीन को कभी भी उत्तर-पूर्व (North-East) यानी ईशान कोण में भूलकर भी मत रखना, क्योंकि वो भगवान की जगह होती है और वहां लोहे-लक्कड़ का कबाड़ या सिलाई-कटाई का काम करना भारी पड़ सकता है। सिलाई करते समय अपना मुंह हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) की तरफ रखियो, इससे दिमाग तेज़ चलेगा और सिलाई की फिनिशिंग भी एकदम झकास आएगी। और हां, काम खत्म होने के बाद मशीन को खुला मत छोड़, उस पर बढ़िया सा कवर डाल के रख ताकि उसकी निगेटिविटी बाहर न फैले और मशीन भी एकदम चकाचक रहे। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ यदि हम चाहते हैं कि हमारा कोलेस्ट्रॉल स्तर न बढ़े तो खाने के लगभग 30 मिनट बाद एक चम्मच सौंफ अवश्य खाना चाहिए। *आधी कच्ची सौंफ का चूर्ण और आधी भुनी सौंफ के चूर्ण में हींग और काला नमक मिलाकर 2 से 6 ग्राम मात्रा में दिन में तीन-चार बार प्रयोग करने से गैस और अपच दूर हो जाती है।
*भुनी हुई सौंफ और मिश्री समान मात्रा में पीसकर हर दो घंटे बाद ठंडे पानी के साथ फँकी लेने से मरोड़दार दस्त, आँव और पेचिश में लाभ होता है। यह कब्ज को दूर करती है। *बादाम, सौंफ और मिश्री तीनों बराबर भागों में लेकर पीसकर रख लें और रोज दोनों टाइम भोजन के बाद एक चम्मच लेने से स्मरणशक्ति बढ़ती है।
*दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से कफ की समस्या समाप्त होती है। अस्थमा और खांसी में सौंफ सहायक है। कफ और खांसी के इलाज के लिए सौंफ खाना फायदेमंद होता है। 🍻 आरोग्य संजीवनी 🍯
विभिन्न औषधियों से उपचार
*_10 ग्राम पानी में 2 ग्राम गुड़ और 2 ग्राम शुंठी के चूर्ण को अच्छी तरह मिलाकर कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरापन कम हो जाता है।
*_500 मिलीलीटर काकजंघा का रस लेकर 250 मिलीलीटर तेल में डालकर पकाने के लिये रख दें। जब पकते हुये तेल बाकी रह जाये तो उसे छानकर सुबह और शाम बूंद-बूंद करके कान में डालने से बहरापन दूर होता है।
*
काकजंघा के पत्तों के रस को गर्म करके बूंद-बूंद कान में डालने से बहरेपन के रोग में लाभ मिलता है।
*10 मिलीलीटर जैतून के पत्तों के रस में 10 ग्राम शहद में मिलाकर गुनगुना करके कान में डालने से कुछ ही महीनों में बहरापन ठीक हो जाता है। *कड़वे बादाम के तेल को गुनगुना करके रोजाना सुबह और शाम कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरापन ठीक हो जाता है।
*100 मिलीलीटर बादाम के तेल में लहसुन की 10 कलियों को डालकर पका लें। जब पकने पर लहसुन की कलियां जल जायें तो इस तेल को छानकर कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरापन दूर होने लगता है। *_3-3 ग्राम गुलाबी फिटकरी, केसर और एलुवा को पीसकर तुलसी के 50 ग्राम रस में मिलाकर 3-4 बूंदे कान में डालें। ऐसा कुछ दिन तक लगातार करने से कुछ ही दिनों में बहरापन दूर हो जाता है। *अजवायन से बने तेल को रोजाना कान में डालने से बहरापन दूर हो जाता है।
*बेलपत्र को गौमूत्र के साथ पीसकर बकरी के दूध में मिलाकर आग पर पकाकर तेल बना लें। इस तेल को कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरापन ठीक हो जाता है। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ उद्दालक ऋषि के पुत्र का नाम श्‍वेतकेतु था। उद्दालक ऋषि के एक शिष्य का नाम कहोड़ था। कहोड़ को सम्पूर्ण वेदों का ज्ञान देने के पश्‍चात् उद्दालक ऋषि ने उसके साथ अपनी रूपवती एवं गुणवती कन्या सुजाता का विवाह कर दिया। कुछ दिनों के बाद सुजाता गर्भवती हो गई। एक दिन कहोड़ वेदपाठ कर रहे थे तो गर्भवती सुजाता ने कहा कि आप वेद का गलत पाठ कर रहे हैं। यह सुनते ही कहोड़ क्रोधित होकर उसके गर्भ पर चोट की । *हठात् एक दिन कहोड़ राजा जनक के दरबार में जा पहुँचे। वहाँ बंदी से शास्त्रार्थ में उनकी हार हो गई। हार हो जाने के फलस्वरूप उन्हें जेल में बन्दी बना दिया गया। इस घटना के बाद अष्टावक्र का जन्म हुआ।
*पिता के न होने के कारण वह अपने नाना उद्दालक को अपना पिता और अपने मामा श्‍वेतकेतु को अपना भाई समझता था। एक दिन जब वह उद्दालक की गोद में बैठा था तो श्‍वेतकेतु ने उसे अपने पिता की गोद से खींचते हुये कहा कि हट जा तू यहाँ से, यह तेरे पिता की गोद नहीं है। अष्टावक्र को यह बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंने तत्काल अपनी माता के पास आकर अपने पिता के विषय में पूछताछ की। माता ने अष्टावक्र को सारी बातें सच-सच बता दीं। *अपनी माता की बातें सुनने के पश्‍चात् अष्टावक्र अपने मामा श्‍वेतकेतु के साथ बंदी से शास्त्रार्थ करने के लिये राजा जनक के यज्ञशाला में पहुँचे। वहाँ द्वारपालों ने उन्हें रोकते हुये कहा कि यज्ञशाला में बच्चों को जाने की आज्ञा नहीं है। इस पर अष्टावक्र बोले कि अरे द्वारपाल ! केवल बाल सफेद हो जाने या अवस्था अधिक हो जाने से कोई बड़ा आदमी नहीं बन जाता। जिसे वेदों का ज्ञान हो और जो बुद्धि में तेज हो वही वास्तव में बड़ा होता है। इतना कहकर वे राजा जनक की सभा में जा पहुँचे और बंदी को शास्त्रार्थ के लिये ललकारा।
*राजा जनक ने अष्टावक्र की परीक्षा लेने के लिये पूछा कि वह पुरुष कौन है जो तीस अवयव, बारह अंश, चौबीस पर्व और तीन सौ साठ अक्षरों वाली वस्तु का ज्ञानी है? *राजा जनक के प्रश्‍न को सुनते ही अष्टावक्र बोले कि राजन्! चौबीस पक्षों वाला, छः ऋतुओं वाला, बारह महीनों वाला तथा तीन सौ साठ दिनों वाला संवत्सर आपकी रक्षा करे।
*अष्टावक्र का सही उत्तर सुनकर राजा जनक ने फिर प्रश्‍न किया कि वह कौन है जो सुप्तावस्था में भी अपनी आँख बन्द नहीं रखता? जन्म लेने के उपरान्त भी चलने में कौन असमर्थ रहता है? कौन हृदय विहीन है? और शीघ्रता से बढ़ने वाला कौन है? *अष्टावक्र ने उत्तर दिया कि हे जनक! सुप्तावस्था में मछली अपनी आँखें बन्द नहीं रखती। जन्म लेने के उपरान्त भी अंडा चल नहीं सकता। पत्थर हृदयहीन होता है और वेग से बढ़ने वाली नदी होती है।
*अष्टावक्र के उत्तरों को सुकर राजा जनक प्रसन्न हो गये और उन्हें बंदी के साथ शास्त्रार्थ की अनुमति प्रदान कर दी। *बंदी ने अष्टावक्र से कहा कि एक सूर्य सारे संसार को प्रकाशित करता है, देवराज इन्द्र एक ही वीर हैं तथा यमराज भी एक है।
*अष्टावक्र बोले कि इन्द्र और अग्निदेव दो देवता हैं। नारद तथा पर्वत दो देवर्षि हैं, अश्‍वनीकुमार भी दो ही हैं। रथ के दो पहिये होते हैं और पति-पत्नी दो सहचर होते हैं। बंदी ने कहा कि संसार तीन प्रकार से जन्म धारण करता है। कर्मों का प्रतिपादन तीन वेद करते हैं। तीनों काल में यज्ञ होता है तथा तीन लोक और तीन ज्योतियाँ हैं। *अष्टावक्र बोले कि आश्रम चार हैं, वर्ण चार हैं, दिशायें चार हैं और ओंकार, अकार, उकार तथा मकार से बना है । ये वाणी के प्रकार भी चार हैं।
*बंदी ने कहा कि यज्ञ पाँच प्रकार का होता है, यज्ञ की अग्नि पाँच हैं, ज्ञानेन्द्रियाँ पाँच हैं, पंच दिशाओं की अप्सरायें पाँच हैं, पवित्र नदियाँ पाँच हैं तथा पंक्‍ति छंद में पाँच पद होते हैं। *अष्टावक्र बोले कि दक्षिणा में छः गौएँ देना उत्तम है, ऋतुएँ छः होती हैं, मन सहित इन्द्रयाँ छः हैं, कृतिकाएँ छः होती हैं और साधक भी छः ही होते हैं।
*बंदी ने कहा कि पालतु पशु सात उत्तम होते हैं और वन्य पशु भी सात ही, सात उत्तम छंद हैं, सप्तर्षि सात हैं और वीणा में तार भी सात ही होते हैं। *अष्टावक्र बोले कि आठ वसु हैं तथा यज्ञ के स्तम्भक कोण भी आठ होते हैं।
*बंदी ने कहा कि पितृ यज्ञ में समिधा नौ छोड़ी जाती है, प्रकृति नौ प्रकार की होती है तथा बृहती छंद में अक्षर भी नौ ही होते हैं। *अष्टावक्र बोले कि दिशाएँ दस हैं, तत्वज्ञ दस होते हैं, बच्चा दस माह में होता है (सामान्य रूप से कहा है) और दहाई में भी दस ही होता है।
*बंदी ने कहा कि ग्यारह रुद्र हैं, यज्ञ में ग्यारह स्तम्भ होते हैं और पशुओं की ग्यारह इन्द्रियाँ होती हैं। अष्टावक्र बोले कि बारह आदित्य होते हैं बारह दिन का प्रकृति यज्ञ होता है, जगती छंद में बारह अक्षर होते हैं और वर्ष भी बारह मास का ही होता है। बंदी ने कहा कि त्रयोदशी उत्तम होती है, पृथ्वी पर तेरह द्वीप हैं।…… इतना कहते कहते बंदी श्‍लोक की अगली पंक्ति भूल गये और चुप हो गये। इस पर अष्टावक्र ने श्‍लोक को पूरा करते हुये कहा कि वेदों में तेरह अक्षर वाले छंद अति छंद कहलाते हैं और अग्नि, वायु तथा सूर्य तीनों तेरह दिन वाले यज्ञ में व्याप्त होते हैं। इस प्रकार शास्त्रार्थ में बंदी की हार हो जाने पर अष्टावक्र ने कहा कि राजन् ! यह हार गया है, अत एव इसे भी जेल में डाल दिया जाये। तब बंदी बोला कि हे महाराज! मैं वरुण का पुत्र हूँ और मैंने सारे हारे हुये ब्राह्मणों को अपने पिता के पास भेज दिया है। मैं अभी उन सबको आपके समक्ष उपस्थित करता हूँ। बंदी के इतना कहते ही बंदी से शास्त्रार्थ में हार जाने के बाद जेल में डाले गये सार ब्राह्मण जनक की सभा में आ गये, जिनमें अष्टावक्र के पिता कहोड़ भी थे।
अष्टावक्र ने अपने पिता के चरणस्पर्श किये। पिता ने उसे आशीर्वाद दिया ।
▬▬▬▬▬๑ ⁂❋⁂ ๑▬▬▬▬▬
⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
*_आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

Related Articles

Back to top button