धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 15 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
          *_जय श्री हरि_*
🧾 *आज का पंचांग_* 🧾
      बुधवार 15 अक्टूबर  2025
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
*_बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
*बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल_*
🌐 *_कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,_*
👸🏻 *_शिवराज शक 352_*
✡️ *_शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2081 नल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5126_*
🕉️ *_संवत्सर (उत्तर) क्रोधी_*
☣️ *_आयन –  दक्षिणायन_*
🌨️ *_ऋतु – सौर शरद ऋतु_*
⛈️ *_मास – कार्तिक मास_*
🌗 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📆 *_तिथि – बुधवार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 10:34 AM तक उपरांत दशमी_*
✏️ *_तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है_*
💫 *_नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 12:00 PM तक उपरांत आश्लेषा_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। तथा पुष्य नक्षत्र का देवता देव गुरु बृहस्पति हैं, जो इस नक्षत्र के स्वामी होने के साथ-साथ देवताओं के गुरु माने जाते हैं।_*
⚜️ *_योग – साध्य योग 02:56 AM तक, उसके बाद शुभ योग_*
⚡ *_प्रथम करण : गर – 10:33 ए एम तक_*
✨ *_द्वितीय करण : वणिज – 10:29 पी एम तक विष्टि_*
🔥 *_गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।_*
⚜️ *_दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |_*
🌞 *_सूर्योदयः- प्रातः 06:14:00_*
🌅 *_सूर्यास्तः- सायः 05:52:00_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : 04:42 ए एम से 05:32 ए एम_*
🌇 *_प्रातः सन्ध्या : 05:07 ए एम से 06:22 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : 02:02 पी एम से 02:48 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : 05:51 पी एम से 06:16 पी एम_*
🏙️ *_सायाह्न सन्ध्या : 05:51 पी एम से 07:06 पी एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : 11:42 पी एम से 12:32 ए एम, अक्टूबर 16_*
🚓 *_यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकले।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र भेंट करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सिम्हथ तोराह (ज्यू-यहूदी)/ शिर्डी के साईं बाबा पुण्य तिथि/ भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जयन्ती, टाटा एयरलाइन कंपनी उद्घाटन दिवस, विश्व छात्र दिवस, स्वतंत्रता सेनानी बाबा कांशी राम पुण्य तिथि, राष्ट्रीय सौंदर्य विशेषज्ञ दिवस, अभिनेता विंसेंट मार्टेला जन्म दिवस, वैश्विक हाथ धुलाई दिवस, वर्ल्ड स्टूडेंट्स डे, भारतीय राजनीतिज्ञ महेंद्र नाथ पांडेय जन्म दिवस, दिल्ली के मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना जन्म दिवस, राजस्थान के भूतपूर्व मुख्यमंत्री हीरा लाल देवपुरा जन्म दिवस, गर्भावस्था और शिशु हानि स्मृति दिवस, विश्व अंध दिवस, विश्व छड़ी दिवस, विश्व ग्रामीण महिला दिवस, विश्व डाक दिवस (सप्ताह), राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह)
✍🏼 तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।          
🗼 *Vastu tips_* 🗺️
धन-धान्य में बढ़ोतरी के लिए करें ये उपाय अगर आप आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं तो नवरात्रि में इन उपायों को जरूर आजमाएं।
*_पहले दिन लाल रेशमी कपड़े में गोमती चक्र, हल्दी और चावल बांधकर माँ लक्ष्मी के चरणों में रखें और अंत में तिजोरी में स्थापित करें। इसके साथ ही रोज सुबह गाय को गुड़ वाली रोटी खिलाने से शनि दोष शांत होता है। रात में तकिए के नीचे लाल रुमाल रखें और “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः’ मंत्र का जाप करें।
ग्रह दोष शांति के उपाय मंगल दोष में हनुमान जी को गुड़ और चना अर्पित करें और शनि दोष के लिए काली उड़द और तेल पीपल के नीचे रखें। वहीं, राहु-केतु दोष शांति हेतु रोज सफेद चंदन का तिलक लगाएं और गणेश जी की पूजा करें।       
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
बरगद का पेड़ भारत में बहुत समय से जाना-पहचाना है। यह पेड़ बहुत विशाल होता है और अपने घने छांव, लंबी जड़ों और औषधीय गुणों के लिए खास माना जाता है। बरगद की छाल, पत्ते, फल और दूध – हर हिस्सा सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसके उपयोग से पाचन, त्वचा, दांत और जोड़ों की परेशानी जैसी कई समस्याओं में राहत मिलती है।
पत्ते और छाल का उपयोग दस्त, पेट दर्द और अपच में किया जाता है।
फल दिल की बीमारियों में फायदेमंद है, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है।
दांतों की सड़न और मसूड़ों की समस्या में बरगद की जड़ और फल फायदेमंद है।
छाल से बनी चाय या काढ़ा इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार है।
पत्तों का पेस्ट त्वचा के फोड़े, जलन और सूजन में लगाया जाता है।
दूध फटी एड़ियों और जोड़ों के दर्द में लगाया जाता है।
फल या छाल का चूर्ण डायरिया और दस्त में लाभकारी है।         
🍃 *आरोग्य संजीवनी* ☘️
*सरिवा की दो प्रमुख जातियाँ मानी जाती हैं —_*
श्वेत सरिवा (Hemidesmus indicus) — श्वेत पुष्पों वाली।
कृष्ण सरिवा — काली किस्म, जिसका वैज्ञानिक नाम क्रिप्टोलेपिस बुकनानी अथवा इच्नोकार्पस फ्रूटेंसेंस है।
दोनों की औषधीय क्रियाएँ समान मानी जाती हैं। इसकी जड़ें ही मुख्य औषधीय भाग हैं, जो सुगंधयुक्त, मधुर तथा तिक्त स्वाद वाली होती हैं।
आयुर्वेद में सरिवा को रक्तशोधक, शीतल, तथा त्रिदोषहर (वात, पित्त, कफ-संतुलक) औषधि के रूप में वर्णित किया गया है।
यह रक्तशोधक, विषहर, बल्य, दीपन, सौष्ठवकर है।
इन गुणों के कारण सरिवा को ज्वर, त्वचा रोग, पाचन विकार एवं विष प्रभावों के शमन में उपयोगी माना गया है।
आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार, इसमें कूमारिन, टैनिन, सैपोनिन एवं फ्लेवोनॉइड्स (जैसे हाइपरोसाइड, रुटिन) पाए जाते हैं, जो इसे एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी तथा एंटीमाइक्रोबियल गुण प्रदान करते हैं।
औषधीय प्रयोग (रोगानुसार उपयोग)
1 *पीलिया (कामला)*
लाभ: नेत्रों व त्वचा का पीलापन निवारण, भूख वृद्धि एवं ज्वर शमन।_*
सामग्री: सरिवा मूलचूर्ण 2 ग्राम, काली मिर्च 11 दाने।_*
विधि: दोनों को 25 मि.ली. जल में पीसकर सुबह खाली पेट सेवन करें।_*
अवधि: 7 दिन।      
📚 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
    कभी सोचा है अपने कि आप अपने ही शरीर में कहा बसे है। आप सोचते होंगे कि आप इस शरीर में हर जगह बसे होंगे या हो सकता है कि कभी आपने इस प्रश्न के बारे में सोचा ही नहीं हो।
       *_क्योंकि अध्यात्म क्षेत्र के बड़े-बड़े तुर्रम खान भी इस प्रश्न के बारे में शायद ही कभी सोचते हो। क्योंकि यह प्रश्न तब तक सामने नहीं आता जब तक आप कुछ समाधियों को पार नहीं करते और उच्च चेतना तक नहीं पहुंचते। मजे की बात यह भी है कि यह प्रश्न भी गहरी समाधियों के बिना समझ भी नहीं आता और न ही आ सकता।
*_आपको आपकी आध्यात्मिक जानकारी के लिए बता दूं कि आप शरीर में हर जगह व्याप्त नहीं है।
      *_मैं अभी आपको कहता हूँ, कि आप अपना ध्यान अपने दाएं पांव पर लेकर जाए। आप लेकर चले गए। बिल्कुल आसान है। आप अपना ध्यान अपने दाएं पाव पर लेकर चले गए।
       *_आप अपना ध्यान दाएं, बाएं पांव या फिर शरीर के किसी भी दूसरे हिस्से पर लेकर जा सकते हैं। लेकिन यहां आपने एक बात सोची कि आप अपने दाएं पांव पर ध्यान इसलिए ले जा सके क्योंकि आप वहां नहीं थे।
        *_उदाहरण के लिए यदि अभी मैं आपसे पूछता हूँ कि अभी आप कहां है? और आप उत्तर देते है कि आप अपने रूम में है। अब यदि मैं फिर से कहूं कि आप अपने रूम में जाइए! तो आपका उत्तर होगा कि मैं तो पहले ही अपने रूम में हूँ, फिर से कैसे जाऊं?
       *_लेकिन गाइडेड मेडिटेशन या योग निद्रा जैसी प्रविधि करते हुए हम अक्सर अपना ध्यान अपने शरीर के विभिन्न अंगों पर लेकर जाते है। तब यह विचार नहीं आता कि यह शरीर मेरा है और मैं अपने पैर में भी हूं और हर जगह पर हूँ।
      अब थोड़ा और गहनता से सोचते है। अगर मैं आपको कहूं कि आप अपने रूम से बाहर दूसरे रूम में जाएं। आप चले जाएंगे। अब यदि दूसरे रूम में बैठा कोई आपका संबंधी पूछे आप कहा से आए हो तो आप बता देंगे कि आप अपने रूम से आएं है।
यह इस आध्यात्मिक पहेली का हल है!
        अब आपको एक बात सोचनी है कि जब मैने आपको कहां कि आप अपने ध्यान को अपने दाएं पांव पर लेकर जाएं तो आप अपने शरीर में कहा से अपना ध्यान अपने दाएं पाव पर लेकर गए थे।
जल्दी से यह बात समझ नहीं आएगी। बार बार प्रैक्टिस करने से अपने होने का थोड़ा-थोड़ा आभास होना शुरू हो जाएगा।
       *_इससे होगा क्या? आपकी चेतना विकसित होगी। अद्भुत शक्तियों से अपने आप ही जुड़ जाएंगे। यह भी हो सकता है कि बहुत सारे आध्यात्मिक शक्तियों से आपका जुड़ाव हो जाए।
      आपका औरा बदल जाएगा। आपका कॉन्फिडेंस लेवल स्ट्रांग हो जाएगा। आप एक अलग ही व्यक्तित्व बन जाएंगे।
       क्योंकि यह स्थिति यानि खुद की चेतना को अपने भीतर समझना बेहद जटिल प्रक्रिया है और बहुत अधिक ध्यान करने से और चेतना पर काम करने से आती है तो आप इस दौरान चमत्कारी शक्तियों से भी जुड़ने लगते है।
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⚜️ *_नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।
*_आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।

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