सड़को पर गौवंश की मौतो का जिम्मेदार कौन? बेजुबान पशुओं की रोजाना मौतों से घटता जा रहा है गोवंश

ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। प्रदेश के नेशनल हाईवे, स्टेट हाइवे एवं अन्य सड़क मार्ग में रोजाना ही किसी न किसी गौवंश की मोत का सिलसिला पिछले कई सालों से देखने को मिल रहा है। आज हालात इतने खराब हो चुके हैं कि एक्सीडेंट में मरने वाली ज्यादातर संख्या गौ माता या गोवंश की है।
इन मौतों का जुम्मेदार कौन ?
मध्य प्रदेश सरकार ने विभिन्न घोषणाएं तो की है लेकिन शहर से लेकर गांव तक गौ अधिनियम सुरक्षा को लेकर अभी तक व्यवस्थापित कोई नियम निर्देश नहीं जारी किए गए । जिसका जीता जागता प्रत्यक्ष आज सड़कों पर नजर आ रहा है । जहां आए दिन इन सड़कों में एक्सीडेंट के दौरान पड़ी हुई गौ माताएं व गौवंश दिन-रात मृत अवस्था में पड़े हुए नज़र आ रहे हैं ।
अब सवाल उठता है कि उनकी उचित व्यवस्था रहन-सहन खान के साथ-साथ चलाई जा रही विभिन्न गौशालाओं का भरण पोषण में आने वाले पैसे का उपयोग कहां किया जा रहा है । और जब इन गौ माता का एक्सीडेंट होता है तो तत्कालीन पशु चिकित्सा द्वारा उपचार सुविधा क्यों नहीं मुहैया कराई जाती हैं जिससे समय रहते क्यों गौवंशों को नहीं बचाया जा सकता ।
क्या सरकार और राजनीति केवल विभिन्न घोषणाओं और योजनाओं के माध्यम से अपने समय काल को निकाल देती है या फिर किसी के दबाव में दिए गए नियम को सुचारू रूप से चालू नहीं करती है। यह सबसे बड़ा सवाल मध्य प्रदेश सरकार में बैठे राजनीतिक दलों के साथ साथ स्थानीय प्रशासन के ऊपर लग रहा है? अगर यूं ही रोजाना इन गोवंशों की मौत होती रहेगी तो आने वाले समय में हम दो चीजों से वंचित रह जाएंगे एक गौ माता का दूध पोषण के लिए दूसरा इनके दर्शन के लिए अगर समय रहते हमने इन्हें बचाने का प्रयास नहीं किया तो हमारी धरोहर धीरे-धीरे घट घट कर विलुप्त हो जाएगी और केवल फोटो के माध्यम से ही हम गौवंश को जान सकेंगे और पहचान सकेंगे। स्थानीय लोगों ने प्रदेश में बैठे मुखिया एवं विभिन्न जिलों में बैठे उच्च स्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि जल्द से जल्द हमारे गौवंशों की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था और नियम निर्देश जारी कर इनके जीवन सुरक्षा को बचाने में अपना बहुमूल्य समय प्रदान करते हुए व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चालू करने के लिए तत्कालीन दिशा निर्देश का पालन करने हेतु आदेशित करें।



