मध्य प्रदेश

कैरोसिन की भारी किल्लत से ग्रामीण जनता परेशान, दियाबाती, चूल्हे जलाना हुआ मुश्किल

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । बहुउपयोगी मिट्टी के तेल को जबसे शासन ने उचित मूल्य की दूकानो के माध्यम से उपलब्ध कराना बन्द किया है तभी से गांव देहात कस्बा बस्ती टोला मजरो मे रहने वाले लोगो को भारी मुसीबत का सामना करना पड रहा है उनका कहना है की कैरोसिन से सिर्फ दिया लालटेन अथवा चूल्हे अकेले नही जलते थे बल्कि कैरोसिन का कई तरह से लोग इस्तेमाल करते थे जिसमे पहला उपयोग घरो मे इसके छिडकाव से कीट, पतंगा, इल्ली, मक्खी, मच्छर, बर्र ततैया, चीटे, चीटी आदि नष्ट होते थे, श्मशानघाट मे बरसात के समय अंतिम संस्कार मे मिट्टी के तेल से ही काम चलता था जिससे शवदाह मे सहूलियत होती थी लोग घासलेट को औषधि के रुप मे भी उपयोग करते थे चोट मोट पेट दर्द मे लगाते ही लोगो को आराम मिलता था, बिजली व रसोई गैस के अभाव मे लोग घरो मे स्टोव, बत्ती स्टोव आदि जलाकर रसोई पका लिया करते थे घासलेट से जलने वाले स्टोव सफर मे बेहद उपयोगी होते थे जंग लगे नटबोल्टो को खोलने मे मिट्टी का तेल रामबाण था, वार्निश मे मिलाने मे उपयोगी था वार्निश, डामर आदि को धोने मे भी काम आता था, मच्छर-मक्खी मारने के लिये फागिग मशीन मे भी इसी का उपयोग धुआ के लिये होता था इस तरह मिट्टी का तेल लोगो की जीवन शैली का अभिन्न पदार्थ है जिसके उपलब्ध नही होने से लोग कितने परेशान हो रहे है यह वही समझ सकते है शासन घासलेट की उपलब्धता हेतु पूर्वानुसार उचित मूल्य की दूकान के माध्यम से वितरण व्यवस्था शीघ्र कराये जिससे लोगो की परेशानी दूर हो सके।

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