आजादी के 75 साल बाद साईखेडा का ग्रामीण क्षेत्र से टूटा सम्पर्क
साईखेडा मुख्य सडक से दुधी नदी बारछी घाट तक एप्रोच सडक बनाने की मांग
रिपोर्टर : बृजेन्द्र कुशवाहा
साईंखेड़ा। 14-15 हजार आबादी वाले साईखेडा में सीएम राईज, प्रायवेट स्कूल, कालेज, तहसील, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, नगर परिषद जैसी संस्थाऐ संचालित है, साईखेडा से होशंगाबाद और रायसेन जिले के सैकड़ो गांव से जुडे है लेकिन आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद साईखेडा का ग्रामीण क्षेत्रो से सडक का सम्पर्क टूटा है। जिससे साईखेडा का व्यापार चौपट है ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सडक न होने से अपनी रोजमर्रा की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये यहां वहां भटकना पडता है । नगर वासियों और क्षेत्रीय जनो द्वारा लंबे समय से साईखेडा मुख्य सडक स्टेट हाईव 44 से बारछी घाट दुधी नदी तक एप्रोच सडक बनाऐ जाने की मांग मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर की जा रही है । इस मार्ग पर मवेशी बाजार से प्रायवेट, शासकीय स्कूल, छात्रावास, शमशान घाट, मृदा परीक्षण केन्द्र, शासकीय महाविद्यालय, सीएम राईज स्कूल और बारछी, जैतवाडा, सलैया, पुरैना, अन्हाई, कपूरी बनखेड़ी, सालेचौका, अजंदा पहुंच मार्ग है ।इन गांव से प्रतिदिन स्कूल आने जाने वाले छात्र छात्राएं, सब्जी व्यापारी ग्राम वासी मरीज का प्रतिदिन आना जाना लगा रहता है । पहुच मार्ग न होने के कारण बरसात मै स्कूल आने वाले विधार्थी आमजान खासे परेशान होते है किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होने पर ग्रामीण बेजा परेशान होते। साईखेडा से बारछी दुधी नदी तक एप्रोच सडक बनाऐ जाने के संबंध मै पूर्व गाडरवारा मुख्यमंत्री के प्रवास के दौरान नगर और क्षेत्रीयवासियों ने ऐप्रोच सडक बनाने की मांग ज्ञापन सौपकर था लेकिन बर्षो बीत जाने के बाद कोई प्रयास नहीं किये । बारछी दुधी नदी घाट से मुख्य सडक तक ऐप्रोच सडक बन जाने से नगर वासी क्षेत्रीय वासियों और व्यापारियों, विधार्थियों को फायदा मिलेगा । साईखेडा बारछी घाट तक सडक न होने से आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद साईखेडा का ग्रामीण क्षेत्र से सम्पर्क टूटने के कारण व्यापार चौपट है । ऐप्रोच सडक के बारे मै क्षेत्रवासी बिधायक सासंद और अधिकारियों से गुहार लगा चुके लेकिन अनसुनी की जा रही है, आगामी विधानसभा चुनाव में सडक मुद्दा बन सकता है। लोक निर्माण विभाग डीपीआर तैयार कर आगामी अनुपूरक बजट में प्रस्ताव रख बजट मै मंजूरी मिलने से सडक मार्ग से क्षेत्र को फायदा मिल सकता है । नगर वासियों सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से बार बार मांग की जा रही लेकिन अनसुनी की जा रही जिसका खामियाजा आगामी बिधान सभी दलो को भुगतना पडेगा।



