शिव जी हमें क्या शिक्षा देते हैं :कमलेश कृष्ण शास्त्री

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । दीनदयाल कॉलोनी में चल रहा पंच दिवसीय रुद्राभिषेक के तृतीय दिवस में पं.कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा आज हम उस परम करुणामय शिव जी की महिमा का स्मरण करने के लिए एकत्र हुए हैं, जिन्हें शास्त्रों ने देवों के देव महादेव कहा है। शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि कल्याण, करुणा, त्याग, तपस्या और परम सत्य के साक्षात स्वरूप हैं।
शिव जी का जीवन हमें सिखाता है कि जो स्वयं कष्ट सहकर भी संसार का कल्याण करे, वही सच्चा महादेव है। समुद्र मंथन के समय जब कालकूट विष निकला और समस्त सृष्टि संकट में पड़ गई, तब किसी ने उसे स्वीकार नहीं किया। उस समय शिव जी ने स्वयं विष का पान कर संसार की रक्षा की और नीलकंठ कहलाए। यही शिवत्व है—स्वयं कष्ट सहकर दूसरों का कल्याण करना।
शिव जी को भोलेनाथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्त के प्रेम को देखते हैं, वैभव को नहीं। एक लोटा जल, कुछ बिल्वपत्र और सच्ची श्रद्धा से वे प्रसन्न हो जाते हैं। वे राजा और रंक, दोनों पर समान कृपा करते हैं।
शिव जी हमें सिखाते हैं कि जीवन में अहंकार नहीं, विनम्रता; क्रोध नहीं, करुणा; लोभ नहीं, संतोष; और द्वेष नहीं, प्रेम होना चाहिए। उनके मस्तक पर चंद्रमा शीतलता का संदेश देता है, जटाओं से बहती गंगा पवित्रता का, गले का सर्प निर्भयता का और त्रिशूल धर्म, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक है।
श्रावण मास में शिव जी की उपासना का विशेष महत्व है। इस पवित्र मास में किया गया रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप और “ॐ नमः शिवाय” का स्मरण मन को शांति, जीवन को पवित्रता और आत्मा को ईश्वर के निकट ले जाता है।
आइए, हम केवल शिवलिंग पर जल ही न चढ़ाएँ, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष का भी अभिषेक करें। जब हमारा मन निर्मल होगा, तभी सच्चे अर्थों में शिव जी की कृपा प्राप्त होगी।
शिव जी हमें बताते है कि इस संसार में जो कुछ भी दिखाई देता है, वह सब शिव की ही शक्ति से संचालित है। शिव जी निराकार भी हैं और साकार भी। वे आदि हैं, अनादि हैं और अनंत हैं।



